पटना में UGC बिल के खिलाफ आक्रोश:जेपी गोलंबर से कारगिल चौक तक आज पैदल मार्च, सवर्ण समाज-करणी सेना का विरोध
UGC बिल 2026 को लेकर देशभर में विरोध-प्रदर्शन जारी है। पटना में भी सड़कों पर आक्रोश दिखेगा। आज सवर्ण समाज और करणी सेना की ओर से गांधी मैदान के जेपी गोलंबर से कारगिल चौक तक पैदल मार्च निकाला जाएगा। यह मार्च दोपहर 1.30 बजे से शुरू होगा। इससे पहले 28 जनवरी को भी पटना में ऑल बिहार स्टूडेंट यूनियन और सवर्ण समाज एकता मंच के बैनर तले इस बिल के खिलाफ प्रदर्शन किया गया था। प्रदर्शनकारियों ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के पोस्टर पर कालिख पोतकर अपना विरोध जताया था। उनका कहना था कि यह कानून ‘काला कानून’ है और इसे तुरंत वापस लिया जाना चाहिए। प्रदर्शन में शामिल उज्जवल कुमार ने कहा था कि UGC बिल छात्रों के हित में नहीं है। सरकार समानता की बात करती है, लेकिन विश्वविद्यालयों में जातीय भेदभाव को बढ़ावा देने वाले कानून ला रही है। उन्होंने आरोप लगाया कि अगर वास्तव में समानता होती, तो ऐसा कानून लाने की जरूरत ही नहीं पड़ती। उज्जवल कुमार ने कड़ा विरोध जताते हुए कहा था कि जरूरत पड़ी तो आंदोलन और तेज किया जाएगा।
यूजीसी बिल को तेज प्रताप यादव का खुला समर्थन राजद नेता तेज प्रताप यादव ने यूजीसी के नए नियमों को ऐतिहासिक कदम बताया है। उन्होंने कहा कि सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर लाया गया कानून का मकसद विश्वविद्यालयों और कॉलेजों में जातिगत भेदभाव को रोकना है।' कांग्रेस ने उठाए एकतरफा चर्चा पर सवाल कांग्रेस ने UGC बिल को लेकर हो रही चर्चाओं को एकतरफा बताया है। पार्टी का कहना है कि यह समझने की जरूरत है कि इस कानून का दुरुपयोग कैसे और क्यों किया जाएगा। उन्होंने कहा कि कानून को लेकर गलत अफवाह फैलाकर देश को गुमराह किया जा रहा है।
UGC के नए नियमों का विरोध क्यों? UGC ने 13 जनवरी को अपने नए नियमों को नोटिफाई किया था। इसका नाम है- 'प्रमोशन ऑफ इक्विटी इन हायर एजुकेशन इंस्टीट्यूशन रेगुलेशन्स, 2026।' इसके तहत कॉलेजों और यूनिवर्सिटी में जाति आधारित भेदभाव को रोकने के लिए विशेष समितियां, हेल्पलाइन और मॉनिटरिंग टीमें बनाने के निर्देश दिए हैं। ये टीमें खासतौर पर SC, ST और OBC छात्रों की शिकायतों को देखेंगी। सरकार का कहना है कि ये बदलाव उच्च शिक्षा संस्थानों में निष्पक्षता और जवाबदेही लाने के लिए किए गए हैं। हालांकि नियमों को जनरल कैटेगरी के खिलाफ बताकर विरोध हो रहा है। आलोचकों का कहना है कि सवर्ण छात्र ‘स्वाभाविक अपराधी’ बना दिए गए हैं। जनरल कैटेगरी के स्टूडेंट्स का कहना है कि नए नियम कॉलेज या यूनिवर्सिटी कैंपसों में उनके खिलाफ भेदभाव को बढ़ावा दे सकते हैं। इससे कॉलेजों में अराजकता पैदा होगी।
UGC बिल 2026 को लेकर देशभर में विरोध-प्रदर्शन जारी है। पटना में भी सड़कों पर आक्रोश दिखेगा। आज सवर्ण समाज और करणी सेना की ओर से गांधी मैदान के जेपी गोलंबर से कारगिल चौक तक पैदल मार्च निकाला जाएगा। यह मार्च दोपहर 1.30 बजे से शुरू होगा। इससे पहले 28 जनवरी को भी पटना में ऑल बिहार स्टूडेंट यूनियन और सवर्ण समाज एकता मंच के बैनर तले इस बिल के खिलाफ प्रदर्शन किया गया था। प्रदर्शनकारियों ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के पोस्टर पर कालिख पोतकर अपना विरोध जताया था। उनका कहना था कि यह कानून ‘काला कानून’ है और इसे तुरंत वापस लिया जाना चाहिए। प्रदर्शन में शामिल उज्जवल कुमार ने कहा था कि UGC बिल छात्रों के हित में नहीं है। सरकार समानता की बात करती है, लेकिन विश्वविद्यालयों में जातीय भेदभाव को बढ़ावा देने वाले कानून ला रही है। उन्होंने आरोप लगाया कि अगर वास्तव में समानता होती, तो ऐसा कानून लाने की जरूरत ही नहीं पड़ती। उज्जवल कुमार ने कड़ा विरोध जताते हुए कहा था कि जरूरत पड़ी तो आंदोलन और तेज किया जाएगा।
यूजीसी बिल को तेज प्रताप यादव का खुला समर्थन राजद नेता तेज प्रताप यादव ने यूजीसी के नए नियमों को ऐतिहासिक कदम बताया है। उन्होंने कहा कि सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर लाया गया कानून का मकसद विश्वविद्यालयों और कॉलेजों में जातिगत भेदभाव को रोकना है।' कांग्रेस ने उठाए एकतरफा चर्चा पर सवाल कांग्रेस ने UGC बिल को लेकर हो रही चर्चाओं को एकतरफा बताया है। पार्टी का कहना है कि यह समझने की जरूरत है कि इस कानून का दुरुपयोग कैसे और क्यों किया जाएगा। उन्होंने कहा कि कानून को लेकर गलत अफवाह फैलाकर देश को गुमराह किया जा रहा है।
UGC के नए नियमों का विरोध क्यों? UGC ने 13 जनवरी को अपने नए नियमों को नोटिफाई किया था। इसका नाम है- 'प्रमोशन ऑफ इक्विटी इन हायर एजुकेशन इंस्टीट्यूशन रेगुलेशन्स, 2026।' इसके तहत कॉलेजों और यूनिवर्सिटी में जाति आधारित भेदभाव को रोकने के लिए विशेष समितियां, हेल्पलाइन और मॉनिटरिंग टीमें बनाने के निर्देश दिए हैं। ये टीमें खासतौर पर SC, ST और OBC छात्रों की शिकायतों को देखेंगी। सरकार का कहना है कि ये बदलाव उच्च शिक्षा संस्थानों में निष्पक्षता और जवाबदेही लाने के लिए किए गए हैं। हालांकि नियमों को जनरल कैटेगरी के खिलाफ बताकर विरोध हो रहा है। आलोचकों का कहना है कि सवर्ण छात्र ‘स्वाभाविक अपराधी’ बना दिए गए हैं। जनरल कैटेगरी के स्टूडेंट्स का कहना है कि नए नियम कॉलेज या यूनिवर्सिटी कैंपसों में उनके खिलाफ भेदभाव को बढ़ावा दे सकते हैं। इससे कॉलेजों में अराजकता पैदा होगी।