गुजरात में बड़ा प्रशासनिक बदलाव: 6 महानगरपालिकाओं में जन प्रतिनिधियों की विदाई, अब IAS संभालेंगे शहर की कमान

गुजरात में स्थानीय स्वराज्य संस्थाओं के निर्वाचित जन प्रतिनिधियों का पांच साल का कार्यकाल पूरा होने पर राज्य सरकार ने एक महत्वपूर्ण निर्णय लिया है। सरकार द्वारा जारी नई अधिसूचना के अनुसार, राज्य की 6 बड़ी महानगरपालिकाओं - अहमदाबाद, वडोदरा, सूरत, ...

Mar 8, 2026 - 12:26
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गुजरात में बड़ा प्रशासनिक बदलाव: 6 महानगरपालिकाओं में जन प्रतिनिधियों की विदाई, अब IAS संभालेंगे शहर की कमान

गुजरात में स्थानीय स्वराज्य संस्थाओं के निर्वाचित जन प्रतिनिधियों का पांच साल का कार्यकाल पूरा होने पर राज्य सरकार ने एक महत्वपूर्ण निर्णय लिया है। सरकार द्वारा जारी नई अधिसूचना के अनुसार, राज्य की 6 बड़ी महानगरपालिकाओं - अहमदाबाद, वडोदरा, सूरत, राजकोट, जामनगर और भावनगर में अब निर्वाचित प्रतिनिधियों के स्थान पर प्रशासनिक तंत्र द्वारा संचालन किया जाएगा। इसके लिए राज्य सरकार ने वरिष्ठ IAS अधिकारियों को इन महानगरपालिकाओं के प्रशासक (Administrator) के रूप में नियुक्त किया है।

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किस शहर में किस IAS अधिकारी को मिली जिम्मेदारी?

 

सरकार के आदेश के मुताबिक विभिन्न शहरों में अनुभवी अधिकारियों को तैनात किया गया है। अहमदाबाद में मुकेश कुमार, सूरत में मिलिंद तोरवणे, वडोदरा में शालिनी अग्रवाल, भावनगर में हर्षद पटेल, जामनगर में आरती कंवर और राजकोट में रम्या मोहन को प्रशासक नियुक्त किया गया है। खास बात यह है कि इनमें से अधिकांश अधिकारी पहले भी संबंधित जिलों में अपनी सेवाएं दे चुके हैं, जिससे वे वहां की भौगोलिक और प्रशासनिक परिस्थितियों से अच्छी तरह वाकिफ हैं।

 

चुनाव में देरी का मुख्य कारण

 

सामान्यतः पांच साल का कार्यकाल पूरा होने पर चुनाव आयोजित किए जाते हैं, लेकिन इस बार इसमें देरी हुई है। राज्य में वर्तमान में SIR (Special Investment Region) की प्रक्रिया चल रही है, जिसके कारण स्थानीय स्वराज्य संस्थाओं के चुनाव समय पर नहीं हो सके। जब तक यह प्रक्रिया पूरी नहीं हो जाती और नए चुनाव नहीं हो जाते, तब तक शहरों का प्रशासन सुचारू रूप से चलता रहे और विकास कार्य न रुकें, इसलिए सरकार ने यह प्रशासनिक व्यवस्था लागू की है।

 

अगले अप्रैल-मई में चुनाव होने की प्रबल संभावना

 

प्रशासकों की नियुक्ति एक अस्थायी व्यवस्था है। प्राप्त जानकारी के अनुसार, राज्य में अगले अप्रैल या मई महीने में इन रुकी हुई स्थानीय स्वराज्य संस्थाओं के चुनाव होने की प्रबल संभावना है। प्रशासनिक औपचारिकताएं पूरी होने के बाद राज्य चुनाव आयोग द्वारा आधिकारिक कार्यक्रम की घोषणा की जा सकती है।

 

राजनीतिक दलों में चुनावी हलचल तेज

 

चुनावों की आहट मिलते ही राज्य के राजनीतिक दलों में सक्रियता बढ़ गई है। कांग्रेस और आम आदमी पार्टी (AAP) ने अभी से अपनी तैयारियां शुरू कर दी हैं। विशेष रूप से, कांग्रेस ने स्थानीय चुनावों को ध्यान में रखते हुए सात अलग-अलग समितियों का गठन किया है और बैठकों का दौर शुरू कर दिया है। इसके अलावा, योग्य उम्मीदवारों के चयन के लिए 'सेंस' (कार्यकर्ताओं की राय) लेने की प्रक्रिया भी शुरू कर दी गई है।  Edited by : Sudhir Sharma