खनन उद्यमियों की समस्याएं लेकर CM से मिला प्रतिनिधिमंडल:ट्रैक्टर-ट्रॉली का ई-रवन्ना शुरू करने और वजन सीमा 6 टन करने की मांग

लघु उद्योग भारती के प्रतिनिधिमंडल ने बुधवार को मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा से मुलाकात की। प्रतिनिधिमंडल ने खनन क्षेत्र से जुड़ी समस्याओं को लेकर सीएम को छह सूत्री ज्ञापन सौंपा। प्रतिनिधिमंडल ने खनन नियमों को व्यावहारिक बनाने और छोटे खनन उद्यमियों, ग्रामीणों और स्थानीय रोजगार को राहत देने की मांग मुख्यमंत्री के सामने रखी। लघु उद्योग भारती के राष्ट्रीय संयुक्त महामंत्री नरेश पारीक, प्रदेश उपाध्यक्ष नटवर अजमेरा और भाजपा विशेष संपर्क प्रकोष्ठ के प्रदेश सह प्रभारी तेज सिंह के नेतृत्व में प्रतिनिधिमंडल ने मुख्यमंत्री से चर्चा की। प्रतिनिधिमंडल ने मांग की कि केंद्र सरकार की MCDR-2021 के तहत लागू ड्रोन सर्वे नीति को राज्य में MMCR के तहत भी अपनाया जाए। छोटे खनन पट्टों को ड्रोन सर्वे से मुक्त रखने और ड्रोन सर्वे की SOP का नोटिफिकेशन जल्द जारी करने की मांग की। ट्रैक्टर-ट्रॉली का ई-रवन्ना शुरू करने की मांग प्रतिनिधिमंडल ने ट्रैक्टर-ट्रॉली के लिए ई-रवन्ना शुरू करने की मांग की। प्रतिनिधिमंडल ने कहा- इससे सरकार को राजस्व मिलेगा। ग्रामीण काश्तकारों और स्थानीय लोगों का रोजगार भी चलता रहेगा। साथ ही अवैध खनन और परिवहन पर अंकुश लगने के साथ भ्रष्टाचार और अपराध में कमी आ सकती है। ट्रैक्टर-ट्रॉली की वजन सीमा 2.5 टन से बढ़ाकर पूर्व की तरह 6 टन करने की भी मांग रखी गई। DMFT फंड के नियमों में बदलाव की मांग प्रतिनिधिमंडल ने DMFT फंड के नियमों को व्यावहारिक बनाने का आग्रह किया। कहा गया कि खनन प्रभावित क्षेत्रों के विकास और कल्याण के लिए एकत्रित राशि का उपयोग प्राथमिकता के आधार पर खनन पट्टा क्षेत्र के राजस्व गांव, पर्यावरण, स्वास्थ्य एवं चिकित्सा सुविधाओं के लिए होना चाहिए। इसके बाद ग्राम पंचायत के स्कूलों अथवा 5 किलोमीटर के दायरे में आने वाले क्षेत्रों को प्राथमिकता देने की मांग की गई। DMFT फंड का एक निश्चित हिस्सा पर्यावरण पर खर्च करने और उसका पूरा रिकॉर्ड खान विभाग के पास रखने का सुझाव भी दिया गया। बंद खदानों को फिर शुरू करने की नीति बनाने की मांग प्रतिनिधिमंडल ने कहा- खनन पट्टों के अनावश्यक खंडन और बंद खदानों को दोबारा शुरू करने में विभागीय उदासीनता के कारण खनिज उत्पादन और सरकार के रॉयल्टी राजस्व में गिरावट आई है। छोटी-मोटी कमियों पर पट्टे निरस्त करने के बजाय सुधार का अवसर देने की मांग की गई। साथ ही बंद खदानों को दोबारा शुरू करने के लिए नीति बनाने का आग्रह किया। OTS योजना का जल्द लाभ देने की मांग प्रतिनिधिमंडल ने मुख्यमंत्री को बताया- वन टाइम सेटलमेंट (OTS) योजना पर भरोसा करते हुए खान मालिकों ने सर्वे कराया। निर्धारित राशि जमा करने की तैयारी की, लेकिन प्रक्रिया में शिथिलता के कारण योजना का अपेक्षित लाभ नहीं मिल पाया। प्रतिनिधिमंडल ने खान मालिकों को OTS योजना का लाभ जल्द देने की मांग की, जिससे सरकार का राजस्व भी बढ़ सके। चारागाह भूमि के मामले में समाधान की मांग राजस्थान स्मॉल माइंस (चेजा पत्थर) लीज होल्डर एसोसिएशन की ओर से प्राप्त आवेदन की प्रति भी मुख्यमंत्री को सौंपी गई। प्रतिनिधिमंडल ने बताया- चारागाह भूमि में खनन पट्टों का आवंटन होने के बाद उसके बदले भूमि उपलब्ध कराने में समस्या आ रही है। इसके समाधान के लिए खातेदारी भूमि के स्थान पर राजकीय भूमि को निश्चित प्रीमियम राशि पर समर्पित करने का प्रावधान करने की मांग की गई। प्रतिनिधिमंडल ने कहा- खनन क्षेत्र की इन समस्याओं का समाधान होने से छोटे खनन उद्यमियों को राहत मिलेगी। ग्रामीण और स्थानीय रोजगार को बढ़ावा मिलेगा तथा सरकार के राजस्व में भी वृद्धि होगी।

Aug 26, 2026 - 23:17
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खनन उद्यमियों की समस्याएं लेकर CM से मिला प्रतिनिधिमंडल:ट्रैक्टर-ट्रॉली का ई-रवन्ना शुरू करने और वजन सीमा 6 टन करने की मांग
लघु उद्योग भारती के प्रतिनिधिमंडल ने बुधवार को मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा से मुलाकात की। प्रतिनिधिमंडल ने खनन क्षेत्र से जुड़ी समस्याओं को लेकर सीएम को छह सूत्री ज्ञापन सौंपा। प्रतिनिधिमंडल ने खनन नियमों को व्यावहारिक बनाने और छोटे खनन उद्यमियों, ग्रामीणों और स्थानीय रोजगार को राहत देने की मांग मुख्यमंत्री के सामने रखी। लघु उद्योग भारती के राष्ट्रीय संयुक्त महामंत्री नरेश पारीक, प्रदेश उपाध्यक्ष नटवर अजमेरा और भाजपा विशेष संपर्क प्रकोष्ठ के प्रदेश सह प्रभारी तेज सिंह के नेतृत्व में प्रतिनिधिमंडल ने मुख्यमंत्री से चर्चा की। प्रतिनिधिमंडल ने मांग की कि केंद्र सरकार की MCDR-2021 के तहत लागू ड्रोन सर्वे नीति को राज्य में MMCR के तहत भी अपनाया जाए। छोटे खनन पट्टों को ड्रोन सर्वे से मुक्त रखने और ड्रोन सर्वे की SOP का नोटिफिकेशन जल्द जारी करने की मांग की। ट्रैक्टर-ट्रॉली का ई-रवन्ना शुरू करने की मांग प्रतिनिधिमंडल ने ट्रैक्टर-ट्रॉली के लिए ई-रवन्ना शुरू करने की मांग की। प्रतिनिधिमंडल ने कहा- इससे सरकार को राजस्व मिलेगा। ग्रामीण काश्तकारों और स्थानीय लोगों का रोजगार भी चलता रहेगा। साथ ही अवैध खनन और परिवहन पर अंकुश लगने के साथ भ्रष्टाचार और अपराध में कमी आ सकती है। ट्रैक्टर-ट्रॉली की वजन सीमा 2.5 टन से बढ़ाकर पूर्व की तरह 6 टन करने की भी मांग रखी गई। DMFT फंड के नियमों में बदलाव की मांग प्रतिनिधिमंडल ने DMFT फंड के नियमों को व्यावहारिक बनाने का आग्रह किया। कहा गया कि खनन प्रभावित क्षेत्रों के विकास और कल्याण के लिए एकत्रित राशि का उपयोग प्राथमिकता के आधार पर खनन पट्टा क्षेत्र के राजस्व गांव, पर्यावरण, स्वास्थ्य एवं चिकित्सा सुविधाओं के लिए होना चाहिए। इसके बाद ग्राम पंचायत के स्कूलों अथवा 5 किलोमीटर के दायरे में आने वाले क्षेत्रों को प्राथमिकता देने की मांग की गई। DMFT फंड का एक निश्चित हिस्सा पर्यावरण पर खर्च करने और उसका पूरा रिकॉर्ड खान विभाग के पास रखने का सुझाव भी दिया गया। बंद खदानों को फिर शुरू करने की नीति बनाने की मांग प्रतिनिधिमंडल ने कहा- खनन पट्टों के अनावश्यक खंडन और बंद खदानों को दोबारा शुरू करने में विभागीय उदासीनता के कारण खनिज उत्पादन और सरकार के रॉयल्टी राजस्व में गिरावट आई है। छोटी-मोटी कमियों पर पट्टे निरस्त करने के बजाय सुधार का अवसर देने की मांग की गई। साथ ही बंद खदानों को दोबारा शुरू करने के लिए नीति बनाने का आग्रह किया। OTS योजना का जल्द लाभ देने की मांग प्रतिनिधिमंडल ने मुख्यमंत्री को बताया- वन टाइम सेटलमेंट (OTS) योजना पर भरोसा करते हुए खान मालिकों ने सर्वे कराया। निर्धारित राशि जमा करने की तैयारी की, लेकिन प्रक्रिया में शिथिलता के कारण योजना का अपेक्षित लाभ नहीं मिल पाया। प्रतिनिधिमंडल ने खान मालिकों को OTS योजना का लाभ जल्द देने की मांग की, जिससे सरकार का राजस्व भी बढ़ सके। चारागाह भूमि के मामले में समाधान की मांग राजस्थान स्मॉल माइंस (चेजा पत्थर) लीज होल्डर एसोसिएशन की ओर से प्राप्त आवेदन की प्रति भी मुख्यमंत्री को सौंपी गई। प्रतिनिधिमंडल ने बताया- चारागाह भूमि में खनन पट्टों का आवंटन होने के बाद उसके बदले भूमि उपलब्ध कराने में समस्या आ रही है। इसके समाधान के लिए खातेदारी भूमि के स्थान पर राजकीय भूमि को निश्चित प्रीमियम राशि पर समर्पित करने का प्रावधान करने की मांग की गई। प्रतिनिधिमंडल ने कहा- खनन क्षेत्र की इन समस्याओं का समाधान होने से छोटे खनन उद्यमियों को राहत मिलेगी। ग्रामीण और स्थानीय रोजगार को बढ़ावा मिलेगा तथा सरकार के राजस्व में भी वृद्धि होगी।