31 मार्च की रात एक विमान भारत पहुंचा जिसमें 20 भारतीयों के ताबूत थे। यह उन लोगों के शब्द थे जो कुवैत में अलग-अलग परिस्थितियों में मारे गए। पिछले कुछ दिनों में कुवैत में अलग-अलग परिस्थितियों में मारे गए। कम से कम 20 लोगों के शव मंगलवार को एक स्पेशल विमान से कोच्ची पहुंचे। शवों को लेकर कुवैत एयरवेज का विमान रात करीब 10:40 पर सीआईएल पर उतरा। हवाई अड्डा के अधिकारियों ने बताया कि पश्चिम एशिया में चल रहे संघर्ष के कारण विमान सेवाओं में आई रुकावटों की वजह से इन शवों को पहले घर नहीं लाया जा सका था। अधिकारियों ने बताया, पिछले कुछ दिनों में कुवैत में मारे गए और केरल तथा तमिलनाडु के अलग-अलग हिस्सों के रहने वाले लोगों के शव मंगलवार रात को एक ही विमान से कोची लाए गए। हमें हर मामले में मौत के कारणों की जानकारी नहीं है। जरूरी औपचारिकताएं पूरी करने के बाद हम शवों को उनके परिजनों को सौंप देंगे।
सीआईएल अधिकारियों ने बताया कि शवों को कुवैत से कोलंबो होते हुए एक विशेष विमान से कोची लाया गया। सीआईएल के स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों ने शवों को सौंपने से पहले की सभी औपचारिकताएं पूरी की। सीआईएल अधिकारियों के मुताबिक मृतक अल्पपुजा और कोटायम जैसे स्थानों के साथ-साथ तमिलनाडु के भी अलग-अलग हिस्सों के रहने वाले थे। कुवैत में फंसे इन पार्थिव शरीरों को वापस भारत लाने का मामला लंबे समय से अटका हुआ था। दरअसल पश्चिम एशिया में जारी जंग की वजह से कुवैत से आने जाने वाली उड़ानों पर बड़ा असर पड़ा है। जिससे इन डेड बॉडीज को भारत लाने में देरी हुई। लगातार कोशिशों और औपचारिक प्रक्रियाओं के पूरा होने के बाद अब इन पार्थिव शरीरों को आखिरकार उनके घर लाया गया है। भारत पहुंचने पर आवश्यक कागजी कारवाई पूरी की गई और फिर इन्हें उनके परिजनों को सौंप दिया गया। अपने प्रियजनों के शव मिलने से परिवारों को भावनात्मक संतोष तो मिला लेकिन दुख का माहौल अब भी कायम है।