किसानों को नहीं करने दिया दिल्ली कूच:हरियाणा पुलिस ने खनौरी बॉर्डर पर रोके; भारत-अमेरिका ट्रेड डील के विरोध में पंजाब साइड धरना शुरू

पंजाब के किसानों को रविवार को हरियाणा की तरफ से दिल्ली कूच नहीं करने दिया गया। भारत-अमेरिका ट्रेड डील के विरोध में दिल्ली के जंतर-मंतर तक ‘किसान बचाओ पदयात्रा’ निकालने पहुंचे संयुक्त किसान मोर्चा (गैर राजनीतिक) के नेता जगजीत सिंह डल्लेवाल समेत 55 पदयात्रियों को खनौरी-दाता सिंहवाला बॉर्डर पर हरियाणा पुलिस ने रोक लिया। बॉर्डर पर बैरिकेडिंग, कंटीली तार, कंक्रीट ब्लॉक और कंटेनर लगाकर रास्ता बंद किया गया है और भारी पुलिस बल तैनात है। किसानों की जींद DC वैशाली शर्मा के साथ दो बार बैठक हुई, लेकिन कोई समाधान नहीं निकला। इसके बाद किसानों ने पंजाब की तरफ धरना शुरू करने का ऐलान किया। इससे पहले डल्लेवाल ने कहा था कि रास्ता किसानों ने नहीं, हरियाणा पुलिस ने रोका है। अगर किसानों को आगे नहीं जाने दिया गया तो वे रातभर यहीं रुकेंगे। इधर, जींद, कैथल और फतेहाबाद में खनौरी बॉर्डर की ओर जा रहे किसानों को पुलिस ने डिटेन किया। बॉर्डर सील और किसानों को डिटेन करने की तस्वीरें... जानिए किसान नेता डल्लेवाल ने क्या कहा… SP बोले- धारा 163 लागू, किसानों को आगे नहीं जाने देंगे जींद SP कुलदीप सिंह भी दाता सिंहवाला बॉर्डर पर पहुंचे। उन्होंने कहा कि आम जनता को किसी तरह की परेशानी नहीं होने दी जाएगी। दिल्ली कूच करने पहुंचे किसानों को बताया जाएगा कि इलाके में धारा 163 लागू है, इसलिए उन्हें आगे जाने की अनुमति नहीं दी जा सकती। सुरक्षा के मद्देनजर जगह-जगह नाके लगाए गए हैं। कौन थे किसान शुभकरण, जिनकी खनौरी बॉर्डर पर मौत हुई शुभकरण सिंह पंजाब के बठिंडा जिले के बल्लो गांव के युवा किसान थे और 2020-21 के किसान आंदोलन में भी शामिल हुए थे। फरवरी 2024 में MSP की कानूनी गारंटी समेत अन्य मांगों को लेकर किसानों के दिल्ली कूच के दौरान वह 13 फरवरी को खनौरी बॉर्डर पहुंचे थे। 21 फरवरी को किसानों और सुरक्षा बलों के बीच टकराव के दौरान शुभकरण गंभीर रूप से घायल हुए और पटियाला के राजिंदरा अस्पताल में डॉक्टरों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया। पोस्टमॉट्रम में उनके सिर में धातु के छर्रे मिले थे। उनकी मौत के बाद किसान संगठनों ने इसे आंदोलन के दौरान हुई मौत बताते हुए जिम्मेदार लोगों पर कार्रवाई की मांग की। 28 फरवरी को पंजाब पुलिस ने उनके पिता की शिकायत पर अज्ञात लोगों के खिलाफ FIR दर्ज की और 29 फरवरी को उनके पैतृक गांव में अंतिम संस्कार किया गया। शुभकरण की मौत के बाद किसान संगठनों ने उन्हें आंदोलन का शहीद माना और खनौरी बॉर्डर पर उनकी याद में शहीदी स्थल बनाया।

Aug 16, 2026 - 21:25
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किसानों को नहीं करने दिया दिल्ली कूच:हरियाणा पुलिस ने खनौरी बॉर्डर पर रोके; भारत-अमेरिका ट्रेड डील के विरोध में पंजाब साइड धरना शुरू
पंजाब के किसानों को रविवार को हरियाणा की तरफ से दिल्ली कूच नहीं करने दिया गया। भारत-अमेरिका ट्रेड डील के विरोध में दिल्ली के जंतर-मंतर तक ‘किसान बचाओ पदयात्रा’ निकालने पहुंचे संयुक्त किसान मोर्चा (गैर राजनीतिक) के नेता जगजीत सिंह डल्लेवाल समेत 55 पदयात्रियों को खनौरी-दाता सिंहवाला बॉर्डर पर हरियाणा पुलिस ने रोक लिया। बॉर्डर पर बैरिकेडिंग, कंटीली तार, कंक्रीट ब्लॉक और कंटेनर लगाकर रास्ता बंद किया गया है और भारी पुलिस बल तैनात है। किसानों की जींद DC वैशाली शर्मा के साथ दो बार बैठक हुई, लेकिन कोई समाधान नहीं निकला। इसके बाद किसानों ने पंजाब की तरफ धरना शुरू करने का ऐलान किया। इससे पहले डल्लेवाल ने कहा था कि रास्ता किसानों ने नहीं, हरियाणा पुलिस ने रोका है। अगर किसानों को आगे नहीं जाने दिया गया तो वे रातभर यहीं रुकेंगे। इधर, जींद, कैथल और फतेहाबाद में खनौरी बॉर्डर की ओर जा रहे किसानों को पुलिस ने डिटेन किया। बॉर्डर सील और किसानों को डिटेन करने की तस्वीरें... जानिए किसान नेता डल्लेवाल ने क्या कहा… SP बोले- धारा 163 लागू, किसानों को आगे नहीं जाने देंगे जींद SP कुलदीप सिंह भी दाता सिंहवाला बॉर्डर पर पहुंचे। उन्होंने कहा कि आम जनता को किसी तरह की परेशानी नहीं होने दी जाएगी। दिल्ली कूच करने पहुंचे किसानों को बताया जाएगा कि इलाके में धारा 163 लागू है, इसलिए उन्हें आगे जाने की अनुमति नहीं दी जा सकती। सुरक्षा के मद्देनजर जगह-जगह नाके लगाए गए हैं। कौन थे किसान शुभकरण, जिनकी खनौरी बॉर्डर पर मौत हुई शुभकरण सिंह पंजाब के बठिंडा जिले के बल्लो गांव के युवा किसान थे और 2020-21 के किसान आंदोलन में भी शामिल हुए थे। फरवरी 2024 में MSP की कानूनी गारंटी समेत अन्य मांगों को लेकर किसानों के दिल्ली कूच के दौरान वह 13 फरवरी को खनौरी बॉर्डर पहुंचे थे। 21 फरवरी को किसानों और सुरक्षा बलों के बीच टकराव के दौरान शुभकरण गंभीर रूप से घायल हुए और पटियाला के राजिंदरा अस्पताल में डॉक्टरों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया। पोस्टमॉट्रम में उनके सिर में धातु के छर्रे मिले थे। उनकी मौत के बाद किसान संगठनों ने इसे आंदोलन के दौरान हुई मौत बताते हुए जिम्मेदार लोगों पर कार्रवाई की मांग की। 28 फरवरी को पंजाब पुलिस ने उनके पिता की शिकायत पर अज्ञात लोगों के खिलाफ FIR दर्ज की और 29 फरवरी को उनके पैतृक गांव में अंतिम संस्कार किया गया। शुभकरण की मौत के बाद किसान संगठनों ने उन्हें आंदोलन का शहीद माना और खनौरी बॉर्डर पर उनकी याद में शहीदी स्थल बनाया।