अररिया में बड़े स्तर पर कर्मियों का ट्रांसफर:एनआईसी रेंडमाइजेशन सॉफ्टवेयर से हुई पारदर्शी प्रक्रिया
अररिया में जिला पदाधिकारी विनोद दूहन की उपस्थिति में विभिन्न विभागों के कर्मियों का बड़े पैमाने पर स्थानांतरण किया गया। यह प्रक्रिया एनआईसी के रेंडमाइजेशन सॉफ्टवेयर के माध्यम से पूरी पारदर्शिता और निष्पक्षता के साथ संपन्न हुई। पारदर्शिता सुनिश्चित करने के लिए पूरी प्रक्रिया की वीडियोग्राफी भी कराई गई। प्रशासनिक आवश्यकता और कार्यहित को ध्यान में रखते हुए, मनरेगा के तहत एक ही प्रखंड में तीन वर्ष से अधिक समय से कार्यरत कर्मियों का स्थानांतरण किया गया। इसमें 6 कनीय अभियंता, 8 कंप्यूटर ऑपरेटर एवं कार्यपालक सहायक, 5 लेखापाल, 27 पंचायत तकनीकी सहायक और 152 पंचायत रोजगार सेवक शामिल हैं, जिन्हें विभिन्न प्रखंडों में स्थानांतरित किया गया। प्रधानमंत्री आवास योजना (ग्रामीण) के अंतर्गत भी 8 ग्रामीण आवास पर्यवेक्षक, 4 कार्यपालक सहायक और 8 ग्रामीण आवास सहायकों का स्थानांतरण किया गया। साथ ही, नव पदस्थापित प्रखंडों की पंचायतों का आवंटन भी संबंधित ग्रामीण आवास सहायकों को कर दिया गया। बिहार सरकार के निर्देश पर पशुपालन विभाग के जिला एवं प्रखंड स्तर पर कार्यरत 10 डाटा एंट्री ऑपरेटरों का भी एनआईसी रेंडमाइजेशन सॉफ्टवेयर के जरिए स्थानांतरण हुआ। 1 जुलाई को योगदान देने का निर्देश समाहरणालय एवं उससे संबद्ध कार्यालयों के 18 कार्यपालक सहायकों को जिला, अनुमंडल एवं लोक शिकायत कार्यालय सहित अन्य कार्यालयों में प्रतिनियुक्त किया गया है, जिन्हें 1 जुलाई 2026 को योगदान देने का निर्देश दिया गया है। इसके अतिरिक्त, जिला पंचायत राज कार्यालय के अंतर्गत संविदा पर कार्यरत 49 लेखपाल सह आईटी सहायकों और 200 कार्यपालक सहायकों को भी विभिन्न प्रखंडों में स्थानांतरित कर नई पदस्थापना दी गई। स्थानांतरित कर्मी 30 जून तक प्रभार सौंप दें जिला पदाधिकारी विनोद दूहन ने निर्देश दिया कि सभी स्थानांतरित कर्मी 30 जून तक अपने वर्तमान कार्यालय का प्रभार सौंप दें और 1 जुलाई के पूर्वाह्न में नए पदस्थापित कार्यालय में अनिवार्य रूप से योगदान दें। पशुपालन विभाग के डाटा एंट्री ऑपरेटरों को 2 जुलाई तक योगदान देना होगा। उन्होंने स्पष्ट किया कि समय पर विरमित नहीं किए जाने पर कर्मी 1 जुलाई से स्वतः विरमित माने जाएंगे। डीएम ने बताया कि इस पूरी प्रक्रिया का उद्देश्य प्रशासनिक दक्षता बढ़ाना और विभिन्न विभागों में कार्यों का संतुलित एवं प्रभावी निष्पादन सुनिश्चित करना है।
अररिया में जिला पदाधिकारी विनोद दूहन की उपस्थिति में विभिन्न विभागों के कर्मियों का बड़े पैमाने पर स्थानांतरण किया गया। यह प्रक्रिया एनआईसी के रेंडमाइजेशन सॉफ्टवेयर के माध्यम से पूरी पारदर्शिता और निष्पक्षता के साथ संपन्न हुई। पारदर्शिता सुनिश्चित करने के लिए पूरी प्रक्रिया की वीडियोग्राफी भी कराई गई। प्रशासनिक आवश्यकता और कार्यहित को ध्यान में रखते हुए, मनरेगा के तहत एक ही प्रखंड में तीन वर्ष से अधिक समय से कार्यरत कर्मियों का स्थानांतरण किया गया। इसमें 6 कनीय अभियंता, 8 कंप्यूटर ऑपरेटर एवं कार्यपालक सहायक, 5 लेखापाल, 27 पंचायत तकनीकी सहायक और 152 पंचायत रोजगार सेवक शामिल हैं, जिन्हें विभिन्न प्रखंडों में स्थानांतरित किया गया। प्रधानमंत्री आवास योजना (ग्रामीण) के अंतर्गत भी 8 ग्रामीण आवास पर्यवेक्षक, 4 कार्यपालक सहायक और 8 ग्रामीण आवास सहायकों का स्थानांतरण किया गया। साथ ही, नव पदस्थापित प्रखंडों की पंचायतों का आवंटन भी संबंधित ग्रामीण आवास सहायकों को कर दिया गया। बिहार सरकार के निर्देश पर पशुपालन विभाग के जिला एवं प्रखंड स्तर पर कार्यरत 10 डाटा एंट्री ऑपरेटरों का भी एनआईसी रेंडमाइजेशन सॉफ्टवेयर के जरिए स्थानांतरण हुआ। 1 जुलाई को योगदान देने का निर्देश समाहरणालय एवं उससे संबद्ध कार्यालयों के 18 कार्यपालक सहायकों को जिला, अनुमंडल एवं लोक शिकायत कार्यालय सहित अन्य कार्यालयों में प्रतिनियुक्त किया गया है, जिन्हें 1 जुलाई 2026 को योगदान देने का निर्देश दिया गया है। इसके अतिरिक्त, जिला पंचायत राज कार्यालय के अंतर्गत संविदा पर कार्यरत 49 लेखपाल सह आईटी सहायकों और 200 कार्यपालक सहायकों को भी विभिन्न प्रखंडों में स्थानांतरित कर नई पदस्थापना दी गई। स्थानांतरित कर्मी 30 जून तक प्रभार सौंप दें जिला पदाधिकारी विनोद दूहन ने निर्देश दिया कि सभी स्थानांतरित कर्मी 30 जून तक अपने वर्तमान कार्यालय का प्रभार सौंप दें और 1 जुलाई के पूर्वाह्न में नए पदस्थापित कार्यालय में अनिवार्य रूप से योगदान दें। पशुपालन विभाग के डाटा एंट्री ऑपरेटरों को 2 जुलाई तक योगदान देना होगा। उन्होंने स्पष्ट किया कि समय पर विरमित नहीं किए जाने पर कर्मी 1 जुलाई से स्वतः विरमित माने जाएंगे। डीएम ने बताया कि इस पूरी प्रक्रिया का उद्देश्य प्रशासनिक दक्षता बढ़ाना और विभिन्न विभागों में कार्यों का संतुलित एवं प्रभावी निष्पादन सुनिश्चित करना है।