चांदपुरा वार्ड-1 में 150 वर्षों से हो रही मां काली:आषाढ़ बैरागन पर शुरू हुई अर्चना, ग्रामीणों ने की मंदिर निर्माण की मांग

बेगूसराय सदर प्रखंड की चांदपुरा पंचायत के वार्ड संख्या-1 में सोमवार को मां काली की पूजा शुरू हुई। यह पूजा आषाढ़ माह के बैरागन के अवसर पर 150 वर्षों से अधिक पुरानी परंपरा के तहत की जा रही है। पूजा से पहले वैदिक मंत्रोच्चार के साथ ध्वजा फहराया गया, जिसके बाद विधि-विधान से अर्चना प्रारंभ हुई। पूजा स्थल पर सुबह से ही श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़ रही है। मां काली के जयकारों, शंखध्वनि और घंटियों की गूंज से पूरा क्षेत्र भक्तिमय हो गया है। महिलाएं श्रद्धापूर्वक पूजा-अर्चना कर रही हैं, जिसमें युवा, बुजुर्ग और बच्चे भी उत्साह के साथ शामिल हैं। स्थानीय ग्रामीण अमित कुमार ने बताया कि यहां मां काली की प्रतिमा के बजाय पिंडी स्वरूप में पूजा की जाती है। श्रद्धालु झाप, फूल और पान-प्रसादी चढ़ाकर मां का आशीर्वाद ले रहे हैं। स्थानीय मान्यता है कि सच्चे मन से आराधना करने वाले भक्तों की मनोकामनाएं पूरी होती हैं। पूजा के दौरान आरती, भजन-कीर्तन, हवन और प्रसाद वितरण जैसे आयोजन किए जा रहे हैं। श्रद्धालु मां काली से क्षेत्र की सुख-समृद्धि, शांति और जनकल्याण की प्रार्थना कर रहे हैं। इस आयोजन में ग्रामीणों का सक्रिय सहयोग मिल रहा है। इस अवसर पर ग्रामीणों ने मां काली के लिए एक भव्य मंदिर के निर्माण की मांग उठाई है। उनका तर्क है कि वर्षों पुरानी आस्था के इस स्थल पर मंदिर बनने से श्रद्धालुओं को बेहतर सुविधाएं मिलेंगी और धार्मिक गतिविधियों को प्रोत्साहन मिलेगा। पूजा के सफल आयोजन में पूरन महतो, रामकिशुन तांती, रंजीत तांती और सुधीर झा सहित कई ग्रामीण सक्रिय भूमिका निभा रहे हैं।

Jul 13, 2026 - 22:05
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चांदपुरा वार्ड-1 में 150 वर्षों से हो रही मां काली:आषाढ़ बैरागन पर शुरू हुई अर्चना, ग्रामीणों ने की मंदिर निर्माण की मांग
बेगूसराय सदर प्रखंड की चांदपुरा पंचायत के वार्ड संख्या-1 में सोमवार को मां काली की पूजा शुरू हुई। यह पूजा आषाढ़ माह के बैरागन के अवसर पर 150 वर्षों से अधिक पुरानी परंपरा के तहत की जा रही है। पूजा से पहले वैदिक मंत्रोच्चार के साथ ध्वजा फहराया गया, जिसके बाद विधि-विधान से अर्चना प्रारंभ हुई। पूजा स्थल पर सुबह से ही श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़ रही है। मां काली के जयकारों, शंखध्वनि और घंटियों की गूंज से पूरा क्षेत्र भक्तिमय हो गया है। महिलाएं श्रद्धापूर्वक पूजा-अर्चना कर रही हैं, जिसमें युवा, बुजुर्ग और बच्चे भी उत्साह के साथ शामिल हैं। स्थानीय ग्रामीण अमित कुमार ने बताया कि यहां मां काली की प्रतिमा के बजाय पिंडी स्वरूप में पूजा की जाती है। श्रद्धालु झाप, फूल और पान-प्रसादी चढ़ाकर मां का आशीर्वाद ले रहे हैं। स्थानीय मान्यता है कि सच्चे मन से आराधना करने वाले भक्तों की मनोकामनाएं पूरी होती हैं। पूजा के दौरान आरती, भजन-कीर्तन, हवन और प्रसाद वितरण जैसे आयोजन किए जा रहे हैं। श्रद्धालु मां काली से क्षेत्र की सुख-समृद्धि, शांति और जनकल्याण की प्रार्थना कर रहे हैं। इस आयोजन में ग्रामीणों का सक्रिय सहयोग मिल रहा है। इस अवसर पर ग्रामीणों ने मां काली के लिए एक भव्य मंदिर के निर्माण की मांग उठाई है। उनका तर्क है कि वर्षों पुरानी आस्था के इस स्थल पर मंदिर बनने से श्रद्धालुओं को बेहतर सुविधाएं मिलेंगी और धार्मिक गतिविधियों को प्रोत्साहन मिलेगा। पूजा के सफल आयोजन में पूरन महतो, रामकिशुन तांती, रंजीत तांती और सुधीर झा सहित कई ग्रामीण सक्रिय भूमिका निभा रहे हैं।