US-Iran war impact : होर्मुज नाकेबंदी से बढ़ा खाद संकट, खतरे में फूड सिक्योरिटी, वर्ल्ड बैंक की रिपोर्ट में डराने वाला खुलासा, क्या भारत पर भी होगा असर
अमेरिका-ईरान युद्ध और होर्मुज स्ट्रेट में जारी नाकेबंदी का असर अब वैश्विक कृषि और खाद्य सुरक्षा पर साफ दिखाई दे रहा है। ऊर्जा कीमतों में तेज उछाल और निर्यात बाधित होने से दुनिया भर में 'फर्टिलाइजर संकट' गहराता जा रहा है। इससे किसानों की लागत वहन ...
अमेरिका-ईरान युद्ध और होर्मुज स्ट्रेट में जारी नाकेबंदी का असर अब वैश्विक कृषि और खाद्य सुरक्षा पर साफ दिखाई दे रहा है। ऊर्जा कीमतों में तेज उछाल और निर्यात बाधित होने से दुनिया भर में 'फर्टिलाइजर संकट' गहराता जा रहा है। इससे किसानों की लागत वहन क्षमता चार साल के निचले स्तर पर पहुंच गई है।
इसी बीच वर्ल्ड बैंक की ताजा रिपोर्ट आई है। इसके मुताबिक प्राकृतिक गैस की कीमतों में भारी बढ़ोतरी इस संकट की मुख्य वजह है, क्योंकि नाइट्रोजन आधारित उर्वरकों के उत्पादन में गैस प्रमुख कच्चा माल है। ऊर्जा लागत बढ़ने का सीधा असर खाद की कीमतों पर पड़ रहा है, जिससे खेती महंगी होती जा रही है।
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योरप के कृषि मंत्रियों ने की मांग
यूरोप के कृषि मंत्रियों ने संभावित खाद्य संकट को देखते हुए तत्काल हस्तक्षेप की मांग की है, ताकि अगले सीजन की फसल और अनाज उत्पादन सुरक्षित रखा जा सके। हालांकि Fertilisers Europe के अनुसार, फिलहाल यूरोप में खाद की आपूर्ति संकट नहीं है, लेकिन किसान कम मुनाफे और बढ़ती लागत के दबाव में काम कर रहे हैं।
फूड एंड एग्रीकल्चर ऑर्गेनाइजेशन की चेतावनी
फूड एंड एग्रीकल्चर ऑर्गेनाइजेशन (Food and Agriculture Organization) ने चेतावनी दी है कि एशिया और ग्लोबल साउथ के कई देशों में स्थिति ज्यादा गंभीर है। भारत, बांग्लादेश, श्रीलंका, मिस्र, सूडान और उप-सहारा अफ्रीका के कई हिस्सों में खाद की कमी, ऊंची कीमतें और खाद्य असुरक्षा का खतरा तेजी से बढ़ रहा है।
एक्सपर्ट्स का कहना है कि ईंधन और परिवहन लागत बढ़ने से खाद्य पदार्थों की कीमतें और बढ़ सकती हैं। इंटरनेशनल फूड पॉलिसी रिसर्च इंस्टिट्यूट (International Food Policy Research Institute) के मुताबिक अगर किसान महंगे इनपुट के कारण खाद का उपयोग कम करते हैं, तो आने वाले सीजन में उत्पादन में भारी गिरावट आ सकती है, जिससे वैश्विक अनाज भंडार प्रभावित होंगे।
रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि मौजूदा हालात में यदि ऊर्जा बाजार स्थिर नहीं हुए और उर्वरक आपूर्ति श्रृंखला बहाल नहीं हुई, तो ईरान युद्ध का असर लंबे समय तक वैश्विक खाद्य आपूर्ति पर बना रह सकता है। Edited by : Sudhir Sharma



