स्टेट ऑफ होर्मज में ईरान की तरफ से एक टैंकर पर गोलीबारी कर दी गई। ईरान की इस हरकत के चलते इस पूरे क्षेत्र में तनाव चरम पर आ गया। वहीं दो भारतीय जहाजों को भी बीच रास्ते से वापस लौटना पड़ा। इनमें से एक भारतीय झंडे वाला बड़ा टैंकर है जिसमें 20 लाख बैरल इराकी तेल भरा हुआ था। दरअसल ट्रंप की नाकेबंदी वाली धमकी के तुरंत बाद आज ईरान ने फिर से ऐलान किया कि वह हरमूस पर सख्त पाबंदियां लगा रहा है। आपको बता दें कल ऐसा ईरान की ओर से ऐलान किया गया था कि हुरमुस पूरी तरह से खोल दिया गया है। लेकिन आज ईरान ने कहा कि अमेरिका ने उनके बंदरगाहों और जहाजों पर नाकेबंदी कर रखी है। इसलिए यह कदम उठाया जा रहा है और होरमुस पर फिर से पाबंदी लगाई जा रही है और इसके कुछ ही देर बाद ईरान के रिवोल्यूशनरी गार्ड की दो गन बोट यानी हथियार बंद छोटी नावें एक टैंकर के पास आई और उन पर गोलियां चला दी। सरकार की तरफ से कहा गया है कि डायरेक्टर जनरल ऑफ शिपिंग पूरी स्थिति पर नजर बनाए हुए है और जहाज के कर्मचारियों की सुरक्षा सुनिश्चित की जा रही है। साथ ही बाकी भारतीय झंडे वाले जहाजों की सुरक्षा पर भी खास ध्यान दिया जा रहा है। इस घटना के बाद ईरानी राजदूत को भारत ने तलब किया है।
वहीं ब्रिटेन की मिलिट्री के यूके एमटीओ यानी यूके मेरिटाइन ट्रेड ऑपरेशन सेंटर ने बताया कि जिस टैंकर पर गोलियां चलाई गई वह और उसका क्रू यानी जहाज का स्टाफ फिलहाल सुरक्षित है। हालांकि उन्होंने उस जहाज का नाम या वो कहां जा रहा था यह नहीं बताया। वहीं टैंकर ट्रैकर्स नाम की एक वेबसाइट जो समुद्र में जहाजों की लोकेशन ट्रैक करती है। उसने बताया कि दो भारतीय जहाज हुरमुस की खाड़ी से गुजरने की कोशिश कर रहे हैं और गोलीबारी की खबर आते ही दोनों जहाजों ने अपना रास्ता बदला और वापस पलट गए।
इनमें से एक जहाज भारतीय झंडे वाला बहुत बड़ा टैंकर है। इसमें 20 लाख बैरल इराकी तेल भरा हुआ था। यह तेल इराक से खरीदा गया था और किसी और देश को पहुंचाया जाना था। लेकिन अब यह जहाज बीच रास्ते से वापस लौट गया। कुल मिलाकर खाड़ी में एक बार फिर तनाव चरम पर पहुंच गया। ईरान ने साफ कर दिया है कि बिना उसकी इजाजत के कोई भी जहाज हुरमुस से नहीं गुजर पाएगा। वहीं अमेरिका की तरफ से अभी तक कोई जवाब नहीं आया। 22 अप्रैल को दो हफ्ते का युद्ध विराम खत्म होने वाला है। और अगर इस तारीख तक अमेरिका और ईरान के बीच कोई समझौता नहीं हुआ तो हुरमुस का यह रास्ता पूरी तरह बंद हो जाएगा। और इसका नतीजा यह होगा कि वैश्विक बाजार में तेल की सप्लाई चेन टूट जाएगी और पूरी दुनिया में ऊर्जा संकट देखने को मिलेगा।