महंगाई का असर अब रोजमर्रा के सामान पर भी दिख सकता है। देश की बड़ी खाद्य कंपनी नेस्ले इंडिया ने संकेत दिए हैं कि अगर कच्चे माल की लागत इसी तरह बढ़ती रही तो आने वाले समय में उत्पादों के दाम बढ़ाए जा सकते हैं।
मौजूद जानकारी के अनुसार, कंपनी के अध्यक्ष और प्रबंध निदेशक मनीष तिवारी ने कहा है कि दूध और गेहूं जैसी जरूरी वस्तुओं की कीमतों में बढ़ोतरी देखी जा रही है, जबकि ईंधन की लागत ने स्थिति को और अनिश्चित बना दिया है। उन्होंने साफ किया कि फिलहाल कंपनी अधिक बिक्री के जरिए विकास पर ध्यान दे रही है, लेकिन अगर लागत दबाव बना रहता है तो कीमतों में बदलाव करना पड़ सकता है।
गौरतलब है कि कंपनी अब तक अपनी वृद्धि का आधार अधिक बिक्री यानी मात्रा पर रखती रही है। बता दें कि वित्त वर्ष 2026 की चौथी तिमाही में कंपनी का मुनाफा लगभग 27 प्रतिशत बढ़कर 1,110.9 करोड़ रुपये पहुंच गया है, जबकि कुल राजस्व 22.6 प्रतिशत बढ़कर 6,747.79 करोड़ रुपये रहा है। यह पिछले कई वर्षों में कंपनी के सबसे मजबूत प्रदर्शन में से एक माना जा रहा है।
कंपनी का कहना है कि वह लागत बढ़ने की स्थिति में पैकेट का आकार घटाने जैसे तरीकों से बचना चाहती है। इसके बजाय उपभोक्ताओं को साफ और पारदर्शी तरीके से कीमत और उत्पाद का विकल्प देने पर जोर दिया जाएगा। वहीं दूसरी ओर हिंदुस्तान यूनिलीवर जैसी कंपनियां पहले ही 2 से 5 प्रतिशत तक कीमतें बढ़ा चुकी हैं और पैकेट साइज में बदलाव कर रही हैं।
मौजूद हालात में कच्चे माल की कीमतों के साथ-साथ मौसम की अनिश्चितता भी एक बड़ी चुनौती बनकर सामने आ रही है। बताया जा रहा है कि कमजोर मानसून और अल नीनो जैसी स्थितियां कृषि उत्पादन को प्रभावित कर सकती हैं, जिससे गेहूं और खाद्य तेल जैसी वस्तुओं की कीमतें और बढ़ सकती हैं। वहीं कई राज्यों में दूध की कीमतों में भी बढ़ोतरी देखी जा रही है।
कंपनी अब अपने विस्तार के लिए ग्रामीण बाजार पर भी तेजी से ध्यान दे रही है। पहले जहां इसका कारोबार मुख्य रूप से शहरी क्षेत्रों तक सीमित था, वहीं अब छोटे शहरों और गांवों में इसकी पहुंच बढ़ाई जा रही है। मौजूद जानकारी के अनुसार, कंपनी अब दो लाख से ज्यादा गांवों तक पहुंच बना चुकी है और वितरण नेटवर्क को मजबूत कर रही है।
जानकारों का मानना है कि अगर महंगाई बहुत ज्यादा नहीं बढ़ती है तो आने वाले समय में कंपनियों के मुनाफे में सुधार हो सकता है। हालांकि फिलहाल स्थिति पूरी तरह कच्चे माल की कीमतों पर निर्भर है। ऐसे में आने वाले महीनों में उपभोक्ताओं को कुछ उत्पादों के दाम में बढ़ोतरी देखने को मिल सकती है।