India-US trade deal में क्या नया, व्हाइट हाउस के सुर क्यों पड़े नरम, फैक्टशीट में कौनसे बदलाव, दालों का जिक्र हटा, कितनी राहत
भारत और अमेरिका के बीच हाल ही में हुए ऐतिहासिक व्यापार समझौते (India US trade deal) को लेकर एक नया विवाद खड़ा हो गया है। अमेरिका ने इस सौदे से जुड़ी अपनी आधिकारिक 'फैक्टशीट' में गुपचुप तरीके से कई महत्वपूर्ण बदलाव किए हैं। व्हाइट हाउस द्वारा ...
भारत और अमेरिका के बीच हाल ही में हुए ऐतिहासिक व्यापार समझौते (India US trade deal) को लेकर एक नया विवाद खड़ा हो गया है। अमेरिका ने इस सौदे से जुड़ी अपनी आधिकारिक 'फैक्टशीट' में गुपचुप तरीके से कई महत्वपूर्ण बदलाव किए हैं। व्हाइट हाउस द्वारा संशोधित इस नए दस्तावेज में दालों (Pulses) के व्यापार का जिक्र हटा दिया गया है और 500 अरब डॉलर की खरीदारी के 'वादे' की भाषा भी बदल दी गई है।
मीडिया खबरों के मुताबिक सबसे बड़ा बदलाव दाल को लेकर है। पहले कहा गया था कि भारत अमेरिकी औद्योगिक और कृषि उत्पादों पर टैरिफ कम या खत्म करेगा, जिसमें दाल भी शामिल थी। अब नए दस्तावेज से दाल का जिक्र हटा लिया गया है।
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दालों और कृषि उत्पादों पर क्यों मारी पलटी
पिछले हफ्ते समझौते की घोषणा के बाद जारी शुरुआती दस्तावेज में वाशिंगटन ने कहा था कि भारत अमेरिकी औद्योगिक सामानों और कई कृषि उत्पादों पर टैरिफ (सीमा शुल्क) कम करेगा। इसमें विशेष रूप से दालों (Pulses), सोयाबीन तेल और ताजे फलों का जिक्र था। लेकिन, अपडेटेड फैक्टशीट से 'दालों' का नाम पूरी तरह गायब कर दिया गया है। इतना ही नहीं, भारत द्वारा भविष्य में खरीदे जाने वाले सामानों की सूची से भी 'कृषि उत्पादों' को हटा दिया गया है।
500 अरब डॉलर की खरीद को लेकर क्या नया अपडेट
500 अरब डॉलर की खरीद को लेकर भी भाषा बदली गई है। पहले लिखा था कि भारत, अमेरिका से 500 अरब डॉलर का सामान खरीदने के लिए 'कमिटेड' है। अब इसे बदलकर 'इरादा रखता है' कर दिया गया है।
पहले क्या कहा था : शुरुआती टेक्स्ट में लिखा था कि भारत अमेरिका से ऊर्जा, कोयला और संचार तकनीक जैसे क्षेत्रों में 500 अरब डॉलर का सामान खरीदने के लिए 'प्रतिबद्ध' (Committed) है।
संशोधन में क्या है
संशोधित वर्जन में 'प्रतिबद्ध' शब्द को हटाकर 'इरादा' (Intend) कर दिया गया है।
क्यों अहम है यह बदलाव?
राजनयिक गलियारों में इसे एक बड़े घटनाक्रम के रूप में देखा जा रहा है। 'प्रतिबद्धता' एक कानूनी या औपचारिक बाध्यता को दर्शाती है, जबकि 'इरादा' केवल एक संभावना मात्र है। जानकारों का मानना है कि दोनों देशों के बीच व्यापार की शर्तों को लेकर अभी भी कुछ बिंदुओं पर पेंच फंसा हुआ है, जिसके कारण व्हाइट हाउस को अपनी भाषा नरम करनी पड़ी।
रूस से तेल आयात पर टास्क फोर्स का गठन
ट्रेड डील को लेकर अंतरिम समझौते के ढांचे के मुताबिक भारत रूस से तेल का आयात दोबारा शुरू न करे, इस पर निगरानी रखने के लिए अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने तीन मंत्रियों की एक टास्क फोर्स का गठन किया है। इसमें वाणिज्य मंत्री, विदेश मंत्री और वित्त मंत्री शामिल हैं। यदि समिति को लगता है कि भारत ने रूस से तेल का इम्पोर्ट दोबारा शुरू कर दिया है, तो वह राष्ट्रपति ट्रम्प को दोबारा 25% पेनल्टी लगाने और अन्य कार्रवाई करने के लिए सिफारिश कर सकती है।
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डिजिटल सर्विस टैरिफ में क्या नया
मीडिया खबरों के मुताबिक नए दस्तावेज में सिर्फ एनर्जी, सूचना और संचार तकनीक, कोयला और कुछ अन्य सामान की बात कही गई है। डिजिटल सर्विस टैरिफ पर भी अमेरिका ने नरमी दिखाई है। पहले कहा गया था कि भारत यह टैरिफ हटाएगा। अब सिर्फ इतना लिखा है कि भारत डिजिटल ट्रेड के नियमों पर बातचीत के लिए तैयार है। अमेरिका ने भारत पर रूसी तेल इम्पोर्ट के कारण पेनल्टी के रूप में लगाए गए 25% टैरिफ को वापस करने का भी फैसला लिया है। Edited by : Sudhir Sharma



