सीवान में कैदी की मौत के बाद अस्पताल में हंगामा:परिजनों ने शव को बेड पर लावारिस हालत में देखा; जेल में मारपीट का लगाया आरोप
सीवान सदर अस्पताल में रविवार को उस समय अफरा-तफरी मच गई, जब मंडल कारा सीवान में बंद एक कैदी की मौत के बाद अस्पताल पहुंचे परिजनों ने उसका शव लावारिस हालत में बेड पर पड़ा देखा। शव के पास कोई पुलिसकर्मी या जेलकर्मी मौजूद नहीं था। इसको लेकर परिजनों ने सदर अस्पताल के इमरजेंसी वार्ड में जमकर हंगामा किया। सूचना मिलते ही नगर थाना प्रभारी अविनाश कुमार पुलिस बल के साथ मौके पर पहुंचे और आक्रोशित परिजनों को समझाने का प्रयास किया। 22 जुलाई को मारपीट के मामले में गया था जेल मृतक की पहचान मुफस्सिल थाना क्षेत्र के मर्दापुर निवासी विश्वनाथ चौहान के रूप में हुई है। परिजनों के अनुसार, 22 जुलाई को दो पट्टीदारों के बीच हुए मारपीट के मामले में पुलिस ने विश्वनाथ चौहान को गिरफ्तार कर जेल भेजा था। परिजनों का आरोप है कि जेल जाने के बाद से ही उन्हें विश्वनाथ से मिलने नहीं दिया गया। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि जेल में उसके साथ मारपीट की गई और तबीयत खराब होने के बावजूद उसे उचित इलाज नहीं कराया गया, जिससे उसकी मौत हो गई। मौत के बाद सदर अस्पताल लाया गया था बताया जा रहा है कि विश्वनाथ की मौत के बाद मंडल कारा से उसे सीवान सदर अस्पताल लाया गया था। यहां चिकित्सक ने जांच के बाद उसे मृत घोषित कर दिया। इसके बाद जेल से साथ आए पुलिस पदाधिकारी और जवानों ने परिजनों को मौत की सूचना दी और शव को अस्पताल के बेड पर छोड़कर चले गए। शव के पास कोई पुलिसकर्मी या जेलकर्मी नहीं था जब परिजन सदर अस्पताल पहुंचे तो उन्होंने देखा कि विश्वनाथ का शव बेड पर वैसे ही पड़ा हुआ था। शव के पास कोई जिम्मेदार कर्मी मौजूद नहीं था। परिजनों ने अस्पताल में मौजूद कर्मियों से इस संबंध में पूछताछ की, लेकिन संतोषजनक जवाब नहीं मिलने पर उनका आक्रोश बढ़ गया। इसके बाद उन्होंने इमरजेंसी वार्ड में हंगामा शुरू कर दिया। पुलिस ने समझाकर शांत कराया हंगामे की सूचना मिलते ही नगर थाना प्रभारी अविनाश कुमार पुलिस बल के साथ सदर अस्पताल पहुंचे। उन्होंने आक्रोशित परिजनों को समझाने का प्रयास किया। काफी देर तक समझाने और आश्वासन देने के बाद परिजन पोस्टमार्टम के लिए तैयार हुए। इसके बाद पुलिस ने शव को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम कराया। आवश्यक प्रक्रिया पूरी करने के बाद शव परिजनों को सौंप दिया गया। जेल प्रशासन का पक्ष नहीं मिल सका मामले में जेल प्रशासन का पक्ष जानने के लिए जेल अधीक्षक देवाशीष कुमार से संपर्क करने का प्रयास किया गया, लेकिन उनका सरकारी मोबाइल फोन स्विच ऑफ मिला। इस कारण उनका पक्ष नहीं मिल सका। फिलहाल पोस्टमार्टम रिपोर्ट और आगे की जांच के बाद ही विश्वनाथ की मौत के वास्तविक कारणों का स्पष्ट पता चल सकेगा।
सीवान सदर अस्पताल में रविवार को उस समय अफरा-तफरी मच गई, जब मंडल कारा सीवान में बंद एक कैदी की मौत के बाद अस्पताल पहुंचे परिजनों ने उसका शव लावारिस हालत में बेड पर पड़ा देखा। शव के पास कोई पुलिसकर्मी या जेलकर्मी मौजूद नहीं था। इसको लेकर परिजनों ने सदर अस्पताल के इमरजेंसी वार्ड में जमकर हंगामा किया। सूचना मिलते ही नगर थाना प्रभारी अविनाश कुमार पुलिस बल के साथ मौके पर पहुंचे और आक्रोशित परिजनों को समझाने का प्रयास किया। 22 जुलाई को मारपीट के मामले में गया था जेल मृतक की पहचान मुफस्सिल थाना क्षेत्र के मर्दापुर निवासी विश्वनाथ चौहान के रूप में हुई है। परिजनों के अनुसार, 22 जुलाई को दो पट्टीदारों के बीच हुए मारपीट के मामले में पुलिस ने विश्वनाथ चौहान को गिरफ्तार कर जेल भेजा था। परिजनों का आरोप है कि जेल जाने के बाद से ही उन्हें विश्वनाथ से मिलने नहीं दिया गया। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि जेल में उसके साथ मारपीट की गई और तबीयत खराब होने के बावजूद उसे उचित इलाज नहीं कराया गया, जिससे उसकी मौत हो गई। मौत के बाद सदर अस्पताल लाया गया था बताया जा रहा है कि विश्वनाथ की मौत के बाद मंडल कारा से उसे सीवान सदर अस्पताल लाया गया था। यहां चिकित्सक ने जांच के बाद उसे मृत घोषित कर दिया। इसके बाद जेल से साथ आए पुलिस पदाधिकारी और जवानों ने परिजनों को मौत की सूचना दी और शव को अस्पताल के बेड पर छोड़कर चले गए। शव के पास कोई पुलिसकर्मी या जेलकर्मी नहीं था जब परिजन सदर अस्पताल पहुंचे तो उन्होंने देखा कि विश्वनाथ का शव बेड पर वैसे ही पड़ा हुआ था। शव के पास कोई जिम्मेदार कर्मी मौजूद नहीं था। परिजनों ने अस्पताल में मौजूद कर्मियों से इस संबंध में पूछताछ की, लेकिन संतोषजनक जवाब नहीं मिलने पर उनका आक्रोश बढ़ गया। इसके बाद उन्होंने इमरजेंसी वार्ड में हंगामा शुरू कर दिया। पुलिस ने समझाकर शांत कराया हंगामे की सूचना मिलते ही नगर थाना प्रभारी अविनाश कुमार पुलिस बल के साथ सदर अस्पताल पहुंचे। उन्होंने आक्रोशित परिजनों को समझाने का प्रयास किया। काफी देर तक समझाने और आश्वासन देने के बाद परिजन पोस्टमार्टम के लिए तैयार हुए। इसके बाद पुलिस ने शव को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम कराया। आवश्यक प्रक्रिया पूरी करने के बाद शव परिजनों को सौंप दिया गया। जेल प्रशासन का पक्ष नहीं मिल सका मामले में जेल प्रशासन का पक्ष जानने के लिए जेल अधीक्षक देवाशीष कुमार से संपर्क करने का प्रयास किया गया, लेकिन उनका सरकारी मोबाइल फोन स्विच ऑफ मिला। इस कारण उनका पक्ष नहीं मिल सका। फिलहाल पोस्टमार्टम रिपोर्ट और आगे की जांच के बाद ही विश्वनाथ की मौत के वास्तविक कारणों का स्पष्ट पता चल सकेगा।