विदेश से MBBS करने वाले तीन और डॉक्टर गिरफ्तार:अब तक 30 आरोपी गिरफ्तार, 20-30 लाख में बिक रहे थे फर्जी सर्टिफिकेट

राजस्थान पुलिस के स्पेशल ऑपरेशन ग्रुप (SOG) ने विदेश से MBBS करने वाले तीन और डॉक्टरों को गिरफ्तार किया है। तीनों ने फर्जी FMGE (भारत में अनिवार्य राष्ट्रीय लाइसेंसिंग परीक्षा) सर्टिफिकेट के जरिए राजस्थान मेडिकल काउंसिल (RMC) में फर्जी पंजीकरण कराया था और मेडिकल इंटर्नशिप हासिल की थी। इस मामले में अब तक RMC के तत्कालीन रजिस्ट्रार, कर्मचारियों, दलालों और विदेशी मेडिकल ग्रेजुएट्स सहित कुल 30 आरोपियों की गिरफ्तारी हो चुकी है। जांच में अब तक 100 से अधिक संदिग्ध विदेशी MBBS डॉक्टरों की पहचान की जा चुकी है। 25 लाख रुपए में फर्जी सर्टिफिकेट बनवाया एडीजी (SOG) विशाल बंसल ने बताया- गिरफ्तार किए गए तीन डॉक्टरों में पहला आरोपी आशीष कुमार शर्मा (30) निवासी डीग है, जो कजाकिस्तान से MBBS कर 2021 में भारत लौटा था और तीन बार FMGE परीक्षा में फेल होने के बाद आरोपी शुभम गुर्जर के माध्यम से 25 लाख रुपए में फर्जी सर्टिफिकेट बनवाकर राजकीय मेडिकल कॉलेज करौली से इंटर्नशिप कर रहा था। दूसरा आरोपी राजेंद्र कुमार यादव (39) निवासी जयपुर है, जिसने चीन से MBBS किया और आठ बार परीक्षा देने के बाद भी पास नहीं होने पर 29 लाख रुपये देकर फर्जी प्रमाणपत्र बनवाया और वर्तमान में अपनी पत्नी के मुरलीपुरा स्थित श्री नारायण हॉस्पिटल में प्रबंधन का काम देख रहा था। वहीं, तीसरा आरोपी नरेश रोलानिया (26) निवासी कोटपूतली-बहरोड़ है, जिसने कजाकिस्तान से MBBS करने के बाद तीन बार असफल होने पर अपने रिश्तेदार के जरिए 26 लाख रुपए में फर्जी प्रमाणपत्र बनवाया और उदयपुर मेडिकल कॉलेज से इंटर्नशिप पूरी कर बिना वैध RMC पंजीकरण के कोटपूतली के पल्स हॉस्पिटल के इमरजेंसी वार्ड में मरीजों का इलाज कर रहा था; फिलहाल तीनों आरोपियों को अदालत में पेश कर 14 अगस्त तक पुलिस रिमांड पर लिया गया है। मास्टरमाइंड और 20 से 30 लाख रुपए का खेल SOG की जांच में सामने आया है कि इस पूरे रैकेट का मास्टरमाइंड भानाराम माली था, जो अपने साथियों शुभम गुर्जर और इंद्रराज गुर्जर के साथ मिलकर प्रत्येक अभ्यर्थी से 20 से 30 लाख रुपये लेकर फर्जी FMGE प्रमाणपत्र तैयार करवाता था। इसी फर्जी दस्तावेज के आधार पर ये आरोपी राजस्थान मेडिकल काउंसिल (RMC) में फर्जी पंजीकरण करवाते थे और विभिन्न मेडिकल कॉलेजों में इंटर्नशिप हासिल करते थे। SOG अब इस गिरोह से जुड़े अन्य दलालों और फर्जी डॉक्टरों की तलाश में जुटी है। RMC अधिकारियों की मिलीभगत भी जांच में सामने आई SOG की जांच में खुलासा हुआ कि फर्जी प्रमाणपत्रों के आधार पर राजस्थान मेडिकल काउंसिल में अस्थायी पंजीकरण कराने में कुछ कर्मचारियों और अधिकारियों की मिलीभगत भी रही। इसी आधार पर कई विदेशी MBBS धारक राजस्थान के विभिन्न मेडिकल कॉलेजों में इंटर्नशिप करते रहे। 100 से ज्यादा संदिग्ध डॉक्टरों की पहचान डीआईजी भुवन भूषण यादव के नेतृत्व में जांच अधिकारी डीएसपी जितेंद्र नावड़िया की टीम ने अब तक 100 से अधिक ऐसे विदेशी MBBS डॉक्टरों को चिन्हित किया है, जिन्होंने फर्जी FMGE प्रमाणपत्रों का इस्तेमाल किया। इनमें से 30 लोगों को गिरफ्तार किया जा चुका है, जबकि अन्य की भूमिका की जांच जारी है। पहले भी हो चुकी हैं कई गिरफ्तारियां इस मामले में इससे पहले 25 विदेशी MBBS डॉक्टर है। राजस्थान मेडिकल काउंसिल के तत्कालीन रजिस्ट्रार डॉ. राजेश शर्मा, तत्कालीन यूडीसी अखिलेश माथुर, एलडीसी फरहान हसन मास्टरमाइंड भानाराम माली और एक अन्य दलाल सहित कई आरोपियों को गिरफ्तार किया जा चुका है। SOG अब इस रैकेट से जुड़े अन्य डॉक्टरों, एजेंटों और वित्तीय लेन-देन की भी जांच कर रही है।

Aug 13, 2026 - 22:21
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विदेश से MBBS करने वाले तीन और डॉक्टर गिरफ्तार:अब तक 30 आरोपी गिरफ्तार, 20-30 लाख में बिक रहे थे फर्जी सर्टिफिकेट
राजस्थान पुलिस के स्पेशल ऑपरेशन ग्रुप (SOG) ने विदेश से MBBS करने वाले तीन और डॉक्टरों को गिरफ्तार किया है। तीनों ने फर्जी FMGE (भारत में अनिवार्य राष्ट्रीय लाइसेंसिंग परीक्षा) सर्टिफिकेट के जरिए राजस्थान मेडिकल काउंसिल (RMC) में फर्जी पंजीकरण कराया था और मेडिकल इंटर्नशिप हासिल की थी। इस मामले में अब तक RMC के तत्कालीन रजिस्ट्रार, कर्मचारियों, दलालों और विदेशी मेडिकल ग्रेजुएट्स सहित कुल 30 आरोपियों की गिरफ्तारी हो चुकी है। जांच में अब तक 100 से अधिक संदिग्ध विदेशी MBBS डॉक्टरों की पहचान की जा चुकी है। 25 लाख रुपए में फर्जी सर्टिफिकेट बनवाया एडीजी (SOG) विशाल बंसल ने बताया- गिरफ्तार किए गए तीन डॉक्टरों में पहला आरोपी आशीष कुमार शर्मा (30) निवासी डीग है, जो कजाकिस्तान से MBBS कर 2021 में भारत लौटा था और तीन बार FMGE परीक्षा में फेल होने के बाद आरोपी शुभम गुर्जर के माध्यम से 25 लाख रुपए में फर्जी सर्टिफिकेट बनवाकर राजकीय मेडिकल कॉलेज करौली से इंटर्नशिप कर रहा था। दूसरा आरोपी राजेंद्र कुमार यादव (39) निवासी जयपुर है, जिसने चीन से MBBS किया और आठ बार परीक्षा देने के बाद भी पास नहीं होने पर 29 लाख रुपये देकर फर्जी प्रमाणपत्र बनवाया और वर्तमान में अपनी पत्नी के मुरलीपुरा स्थित श्री नारायण हॉस्पिटल में प्रबंधन का काम देख रहा था। वहीं, तीसरा आरोपी नरेश रोलानिया (26) निवासी कोटपूतली-बहरोड़ है, जिसने कजाकिस्तान से MBBS करने के बाद तीन बार असफल होने पर अपने रिश्तेदार के जरिए 26 लाख रुपए में फर्जी प्रमाणपत्र बनवाया और उदयपुर मेडिकल कॉलेज से इंटर्नशिप पूरी कर बिना वैध RMC पंजीकरण के कोटपूतली के पल्स हॉस्पिटल के इमरजेंसी वार्ड में मरीजों का इलाज कर रहा था; फिलहाल तीनों आरोपियों को अदालत में पेश कर 14 अगस्त तक पुलिस रिमांड पर लिया गया है। मास्टरमाइंड और 20 से 30 लाख रुपए का खेल SOG की जांच में सामने आया है कि इस पूरे रैकेट का मास्टरमाइंड भानाराम माली था, जो अपने साथियों शुभम गुर्जर और इंद्रराज गुर्जर के साथ मिलकर प्रत्येक अभ्यर्थी से 20 से 30 लाख रुपये लेकर फर्जी FMGE प्रमाणपत्र तैयार करवाता था। इसी फर्जी दस्तावेज के आधार पर ये आरोपी राजस्थान मेडिकल काउंसिल (RMC) में फर्जी पंजीकरण करवाते थे और विभिन्न मेडिकल कॉलेजों में इंटर्नशिप हासिल करते थे। SOG अब इस गिरोह से जुड़े अन्य दलालों और फर्जी डॉक्टरों की तलाश में जुटी है। RMC अधिकारियों की मिलीभगत भी जांच में सामने आई SOG की जांच में खुलासा हुआ कि फर्जी प्रमाणपत्रों के आधार पर राजस्थान मेडिकल काउंसिल में अस्थायी पंजीकरण कराने में कुछ कर्मचारियों और अधिकारियों की मिलीभगत भी रही। इसी आधार पर कई विदेशी MBBS धारक राजस्थान के विभिन्न मेडिकल कॉलेजों में इंटर्नशिप करते रहे। 100 से ज्यादा संदिग्ध डॉक्टरों की पहचान डीआईजी भुवन भूषण यादव के नेतृत्व में जांच अधिकारी डीएसपी जितेंद्र नावड़िया की टीम ने अब तक 100 से अधिक ऐसे विदेशी MBBS डॉक्टरों को चिन्हित किया है, जिन्होंने फर्जी FMGE प्रमाणपत्रों का इस्तेमाल किया। इनमें से 30 लोगों को गिरफ्तार किया जा चुका है, जबकि अन्य की भूमिका की जांच जारी है। पहले भी हो चुकी हैं कई गिरफ्तारियां इस मामले में इससे पहले 25 विदेशी MBBS डॉक्टर है। राजस्थान मेडिकल काउंसिल के तत्कालीन रजिस्ट्रार डॉ. राजेश शर्मा, तत्कालीन यूडीसी अखिलेश माथुर, एलडीसी फरहान हसन मास्टरमाइंड भानाराम माली और एक अन्य दलाल सहित कई आरोपियों को गिरफ्तार किया जा चुका है। SOG अब इस रैकेट से जुड़े अन्य डॉक्टरों, एजेंटों और वित्तीय लेन-देन की भी जांच कर रही है।