बक्सर में चैत्र नवरात्रि पर 1008 कन्याओं का पूजन:इटाढ़ी धाम में 13 साल से जारी है यह परंपरा, 9 दिन व्रत करने वाले श्रद्धालु हुए शामिल

बक्सर जिले के इटाढ़ी पुलिस लाइन स्थित महाशक्ति कालरात्रि नवदुर्गा धाम में चैत्र नवरात्रि के अवसर पर कन्या पूजन कार्यक्रम आयोजित किया गया। चैत्र नवमी की रात तक चले इस आयोजन में 1008 कन्याओं का विधि-विधान से पूजन कर उन्हें भोजन कराया गया। इस कार्यक्रम में शामिल होने के लिए जिले सहित दूर-दराज के क्षेत्रों से हजारों श्रद्धालु पहुंचे। मंदिर के महंत और समिति के सदस्यों ने जिले के दर्जनों गांवों से कन्याओं को उनके परिजनों के साथ आमंत्रित किया था। सभी कन्याओं को कतारबद्ध बैठाकर पहले पूजा-अर्चना की गई। इसके बाद उन्हें लाल चुनरी ओढ़ाकर और विभिन्न प्रकार के पारंपरिक व्यंजनों से सत्कार किया गया। लगभग 5 वर्ष की आयु की इन 1008 कन्याओं का पूजन कर विधिवत विदाई दी गई। 1008 कन्याओं का हुआ पूजा यह कन्या पूजन परंपरा पिछले 13 वर्षों से लगातार जारी है। शुरुआत में यह कार्यक्रम महज 64 कन्याओं के पूजन से शुरू हुआ था, जो समय के साथ बढ़कर अब 1008 कन्याओं तक पहुंच गया है। श्रद्धालुओं का मानना है कि कन्या पूजन से मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं, जिसके कारण हर वर्ष यहां श्रद्धालुओं की संख्या बढ़ रही है। नवरात्रि के अंतिम दिन जिले के अन्य पूजा पंडालों और घरों में भी पूजा, हवन और कन्या भोज का आयोजन किया गया। हालांकि, इटाढ़ी स्थित इस धाम का आयोजन अपनी व्यवस्था और पैमाने के लिए विशेष रहा। यहां भंडारे और कन्या पूजन में केवल उन्हीं श्रद्धालुओं को शामिल किया गया, जिन्होंने नौ दिनों तक व्रत रखा था। कार्यक्रम के दौरान पांच प्रकार के पारंपरिक वाद्य यंत्रों की धुन से परिसर गूंज उठा। मंदिर के महंत द्वारिका दास जी महाराज ने बताया कि शास्त्रों में चैत्र नवरात्रि के दौरान कन्या पूजन को अत्यंत शुभ और फलदायी माना गया है। कन्याओं को देवी दुर्गा का स्वरूप मानकर उनकी पूजा की जाती है। पिछले साल 508 कन्याओं का हुआ था पूजन मंदिर के सेवक अमित माली ने बताया कि हर वर्ष इस आयोजन का विस्तार हो रहा है। पिछले साल 508 कन्याओं का पूजन हुआ था, जबकि इस वर्ष यह संख्या 1008 पहुंच गई है। उन्होंने कहा कि अगले वर्ष 2008 कन्याओं के पूजन की तैयारी अभी से शुरू कर दी गई है। यह आयोजन न केवल आस्था का प्रतीक बन चुका है, बल्कि सामाजिक एकता और धार्मिक परंपराओं को भी मजबूत कर रहा है।

Mar 28, 2026 - 11:22
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बक्सर में चैत्र नवरात्रि पर 1008 कन्याओं का पूजन:इटाढ़ी धाम में 13 साल से जारी है यह परंपरा, 9 दिन व्रत करने वाले श्रद्धालु हुए शामिल
बक्सर जिले के इटाढ़ी पुलिस लाइन स्थित महाशक्ति कालरात्रि नवदुर्गा धाम में चैत्र नवरात्रि के अवसर पर कन्या पूजन कार्यक्रम आयोजित किया गया। चैत्र नवमी की रात तक चले इस आयोजन में 1008 कन्याओं का विधि-विधान से पूजन कर उन्हें भोजन कराया गया। इस कार्यक्रम में शामिल होने के लिए जिले सहित दूर-दराज के क्षेत्रों से हजारों श्रद्धालु पहुंचे। मंदिर के महंत और समिति के सदस्यों ने जिले के दर्जनों गांवों से कन्याओं को उनके परिजनों के साथ आमंत्रित किया था। सभी कन्याओं को कतारबद्ध बैठाकर पहले पूजा-अर्चना की गई। इसके बाद उन्हें लाल चुनरी ओढ़ाकर और विभिन्न प्रकार के पारंपरिक व्यंजनों से सत्कार किया गया। लगभग 5 वर्ष की आयु की इन 1008 कन्याओं का पूजन कर विधिवत विदाई दी गई। 1008 कन्याओं का हुआ पूजा यह कन्या पूजन परंपरा पिछले 13 वर्षों से लगातार जारी है। शुरुआत में यह कार्यक्रम महज 64 कन्याओं के पूजन से शुरू हुआ था, जो समय के साथ बढ़कर अब 1008 कन्याओं तक पहुंच गया है। श्रद्धालुओं का मानना है कि कन्या पूजन से मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं, जिसके कारण हर वर्ष यहां श्रद्धालुओं की संख्या बढ़ रही है। नवरात्रि के अंतिम दिन जिले के अन्य पूजा पंडालों और घरों में भी पूजा, हवन और कन्या भोज का आयोजन किया गया। हालांकि, इटाढ़ी स्थित इस धाम का आयोजन अपनी व्यवस्था और पैमाने के लिए विशेष रहा। यहां भंडारे और कन्या पूजन में केवल उन्हीं श्रद्धालुओं को शामिल किया गया, जिन्होंने नौ दिनों तक व्रत रखा था। कार्यक्रम के दौरान पांच प्रकार के पारंपरिक वाद्य यंत्रों की धुन से परिसर गूंज उठा। मंदिर के महंत द्वारिका दास जी महाराज ने बताया कि शास्त्रों में चैत्र नवरात्रि के दौरान कन्या पूजन को अत्यंत शुभ और फलदायी माना गया है। कन्याओं को देवी दुर्गा का स्वरूप मानकर उनकी पूजा की जाती है। पिछले साल 508 कन्याओं का हुआ था पूजन मंदिर के सेवक अमित माली ने बताया कि हर वर्ष इस आयोजन का विस्तार हो रहा है। पिछले साल 508 कन्याओं का पूजन हुआ था, जबकि इस वर्ष यह संख्या 1008 पहुंच गई है। उन्होंने कहा कि अगले वर्ष 2008 कन्याओं के पूजन की तैयारी अभी से शुरू कर दी गई है। यह आयोजन न केवल आस्था का प्रतीक बन चुका है, बल्कि सामाजिक एकता और धार्मिक परंपराओं को भी मजबूत कर रहा है।