इजराइल के विपक्षी नेता येर लैपिड ने एक ऐसा बयान दिया है जो भारत की राजनीति को हिला कर रख देगा| इजराइल के विपक्षी नेता का बयान देखने के बाद आपको पता चल जाएगा कि इजराइल हारता क्यों नहीं है। जिस तरह से आजकल भारत में पीएम मोदी के खिलाफ विपक्षी नेता संसद में हंगामा कर रहे हैं। ठीक उसी तरह से इजराइल की संसद में नेतन्याहू के खिलाफ भी विरोध प्रदर्शन चल रहा है। लेकिन इन दोनों ही विरोध प्रदर्शनों का अंतर आपके होश उड़ा देगा। दोनों देशों के विपक्षी नेताओं का विरोध और विरोध करने की मंशा भी आपको हिला देगी। सत्ता में तो भारत और इजराइल दोनों का ही विपक्ष आना चाहता है। दरअसल इजराइल के विपक्षी नेता के एक बयान ने भारत के राजनैतिक सिस्टम की पोल खोल दी है। इजराइल के लीडर ऑफ अपोजिशन येर लेपिड ने प्रधानमंत्री नेतन्याहू का विरोध किया है। येर लेपिड ने कहा है कि प्रधानमंत्री नेतन्याहू ने एक टीवी को इंटरव्यू दिया। लेकिन इस इंटरव्यू में नेतन्याहू ने वह नहीं कहा जो कहना चाहिए था।
येर लैपिड का कहना है कि अमेरिका की देखरेख में सऊदी अरब और इजराइल के बीच शांति स्थापित करने की एक डील हो रही है। यह अच्छी बात है। लेकिन इस डील में इजराइल को झुकना नहीं चाहिए। येर लैपिड ने कहा कि डील के तहत सऊदी अरब औपचारिक रूप से इजराइल को मान्यता देगा। इसके बदले में अमेरिका सऊदी अरब को सुरक्षा गारंटी देगा। सऊदी अरब के नागरिक परमाणु कार्यक्रम में मदद करेगा। यहां तक तो हम भी इस बात से सहमत हैं। लेकिन नेतन्याहू को यह साफ-साफ बोल देना चाहिए कि सऊदी अरब को न्यूक्लियर पावर प्लांट से बिजली बनाने के लिए खुद यूरेनियम एनरच करने की इजाजत नहीं दी जाएगी। येर लैपिड ने कहा कि सऊदी अरब बार-बार अमेरिका से रिक्वेस्ट कर रहा है कि वह यूरेनियम खुद ही एनरिच करेगा। लेकिन इजराइल के प्रधानमंत्री के तौर पर नेतन्याहू को अड़ जाना चाहिए। किसे पता कि कल सऊदी अरब भी यूरेनियम का गलत इस्तेमाल कर ले। उस यूरेनियम से हथियार बनाकर इजराइल के खिलाफ ही और बड़ा खतरा बन जाए। इजराइल का विपक्ष नहीं चाहता कि नेतन्याहू से कोई गलती हो और उसका फायदा सऊदी अरब को मिले। यह है इजराइल का विपक्ष।
इसी विपक्षी नेता ने ईरान जंग के दौरान कहा था कि हम सरकार के साथ खड़े हैं। कुछ समय के लिए इजराइल में अब कोई विपक्ष नहीं है। सब देश हित में एक साथ काम करेंगे। अब आप इसकी तुलना भारत से कीजिए। ऑपरेशन सिंदूर के दौरान भारत का विपक्ष पीएम मोदी से सवाल कर रहा था कि हमें सबूत चाहिए। सबूत दीजिए कि हम जीते हैं। सबूत दीजिए कि हमारे विमान नहीं गिरे। सेना तत्व पर सवाल खड़े कर दिए गए। बीजेपी की मानें तो हमारे लीडर ऑफ अपोजिशन विदेशों में जाकर भारत के खिलाफ ही बयानबाजी करते हैं। सीक्रेट विदेश यात्राएं करते हैं। आप सोचिए कि नीट पेपर लीक के खिलाफ विपक्षी दलों ने पीएम मोदी के घर के बाहर धरना तक देना शुरू कर दिया। लेकिन जब सरकार पेपर लीक को रोकने के लिए संसद में एक बिल लाई तो भारत के ही विपक्षी दल उस बिल को पास नहीं होने दे रहे।