डूंगरपुर मेडिकल कॉलेज अस्पताल में डॉक्टरों की कमी:4 सुपर स्पेशलिटी की सुविधाएं शुरू नहीं होने से मरीज परेशान
डूंगरपुर में मेडिकल कॉलेज खुलने के बाद सुपर स्पेशलिटी की सुविधाएं देने की सरकार घोषणाएं कर रही है। लेकिन डॉक्टरों की कमी से ये सुविधाएं आज तक शुरू ही नहीं हो सकी है। डूंगरपुर मेडिकल कॉलेज अस्पताल में 4 सुपर स्पेशलिटी की सुविधाएं सालभर पहले शुरू करनी थी। डॉक्टरों के नहीं होने से मरीजों को गुजरात ओर उदयपुर ही जाना पड़ रहा है । डूंगरपुर में 8 साल पहले मेडिकल कॉलेज खुलने के बाद से सुविधाएं बढ़ी है। सरकार ने डूंगरपुर मेडिकल कॉलेज के श्रीहरिदेव जोशी जिला अस्पताल में सुपर स्पेशलिटी के लिए न्यूरोलॉजी, गेस्ट्रोलॉजी, नेफ्रोलॉजी ओर कार्डियोलॉजी डिपार्टमेंट की मंजूरी दे दी। डॉक्टर नहीं मिलने से सुपर स्पेशलिटी की सुविधा शुरू नहीं
चारो विभागों में स्पेशलिस्ट डॉक्टरों के पद भी स्वीकृत कर दिए है। राजमेश के माध्यम से पदों को भरने के लिए डॉक्टरों के इंटरव्यू कॉल लिए, लेकिन चारों विभागों में एक भी सुपर स्पेशलिस्ट डॉक्टर नहीं आया। ऐसे ही हाल डूंगरपुर समेत प्रदेश के 7 मेडिकल कॉलेज में सुपर स्पेशलिस्ट डिपार्टमेंट के है। जिनमें डॉक्टर नहीं मिलने से सुपर स्पेशलिटी की सुविधा शुरू नहीं हो सकी है। हार्ट, पेट, मस्तिष्क और किडनी के मरीजों को मिलेगी सुविधा
कार्डियोलॉजी, ग्रेस्ट्रोलॉज, न्यूरोलॉजी ओर नेफ्रोलॉजी के चारों सुपर स्पेशलिटी की सुविधा शुरू होने से कई मरीजों को राहत मिलेगी। खासकर हार्ट के मरीज, पेट की बीमारियों, किडनी और मस्तिष्क से जुड़ी बीमारियों के इलाज के लिए मरीजों को बाहर नहीं जाना पड़ता है। आदिवासी बहुल डूंगरपुर जिले में कई मरीज हार्ट, पेट और मस्तिष्क जैसी गंभीर बीमारियों से जूझ रहे है। ऐसे में डूंगरपुर अस्पताल में आने वाले इन गंभीर मरीजों को रेफर कर दिया जाता है। डूंगरपुर में डॉक्टर नहीं होने से ये मरीज अभी गुजरात ओर उदयपुर के अस्पतालों में जा रहे है। ऐसे में मरीजों को आर्थिक खर्च भी उठाना पड़ रहा है।
वही दूसरी ओर चारों सुपर स्पेशलिटी के डॉक्टरों की संख्या प्रदेश में काफी कम है। ऐसे में जो डॉक्टर है वे बड़े शहरों में ही बड़े अस्पताल में अपनी सेवाएं दे रहे है। जहां बड़े पैकेज के साथ ही उन्हें सुविधाएं मिलती है। डॉक्टरों के आदिवासी बहुल जिले में नहीं आने का पीछे ये भी बड़ी वजह बताई जा रही है। डॉक्टर आने के बाद शुरू हो जाएगी यूनिट
गेस्ट्रो, कार्डियो, नेफ्रो ओर न्यूरोलॉजी चारो विभागों की मंजूरी मिल गई है। लेकिन डॉक्टर नहीं होने से इन विभागों की शुरुआत नहीं हो सकी है।
मेडिकल कॉलेज अस्पताल के कार्यवाहक प्रिंसिपल डॉ रूपेश कुमार ने बताया कि चारों विभागों के डॉक्टर आने के बाद उनकी यूनिट शुरू हो जाएगी। मरीजों की जांच के लिए जरूरी महंगे उपकरण भी मंगवाए जाएंगे। इससे अस्पताल में सुपर स्पेशलिटी की सुविधाएं बढ़ेगी और लोगों को इलाज में राहत मिलेगी।
डूंगरपुर में मेडिकल कॉलेज खुलने के बाद सुपर स्पेशलिटी की सुविधाएं देने की सरकार घोषणाएं कर रही है। लेकिन डॉक्टरों की कमी से ये सुविधाएं आज तक शुरू ही नहीं हो सकी है। डूंगरपुर मेडिकल कॉलेज अस्पताल में 4 सुपर स्पेशलिटी की सुविधाएं सालभर पहले शुरू करनी थी। डॉक्टरों के नहीं होने से मरीजों को गुजरात ओर उदयपुर ही जाना पड़ रहा है । डूंगरपुर में 8 साल पहले मेडिकल कॉलेज खुलने के बाद से सुविधाएं बढ़ी है। सरकार ने डूंगरपुर मेडिकल कॉलेज के श्रीहरिदेव जोशी जिला अस्पताल में सुपर स्पेशलिटी के लिए न्यूरोलॉजी, गेस्ट्रोलॉजी, नेफ्रोलॉजी ओर कार्डियोलॉजी डिपार्टमेंट की मंजूरी दे दी। डॉक्टर नहीं मिलने से सुपर स्पेशलिटी की सुविधा शुरू नहीं
चारो विभागों में स्पेशलिस्ट डॉक्टरों के पद भी स्वीकृत कर दिए है। राजमेश के माध्यम से पदों को भरने के लिए डॉक्टरों के इंटरव्यू कॉल लिए, लेकिन चारों विभागों में एक भी सुपर स्पेशलिस्ट डॉक्टर नहीं आया। ऐसे ही हाल डूंगरपुर समेत प्रदेश के 7 मेडिकल कॉलेज में सुपर स्पेशलिस्ट डिपार्टमेंट के है। जिनमें डॉक्टर नहीं मिलने से सुपर स्पेशलिटी की सुविधा शुरू नहीं हो सकी है। हार्ट, पेट, मस्तिष्क और किडनी के मरीजों को मिलेगी सुविधा
कार्डियोलॉजी, ग्रेस्ट्रोलॉज, न्यूरोलॉजी ओर नेफ्रोलॉजी के चारों सुपर स्पेशलिटी की सुविधा शुरू होने से कई मरीजों को राहत मिलेगी। खासकर हार्ट के मरीज, पेट की बीमारियों, किडनी और मस्तिष्क से जुड़ी बीमारियों के इलाज के लिए मरीजों को बाहर नहीं जाना पड़ता है। आदिवासी बहुल डूंगरपुर जिले में कई मरीज हार्ट, पेट और मस्तिष्क जैसी गंभीर बीमारियों से जूझ रहे है। ऐसे में डूंगरपुर अस्पताल में आने वाले इन गंभीर मरीजों को रेफर कर दिया जाता है। डूंगरपुर में डॉक्टर नहीं होने से ये मरीज अभी गुजरात ओर उदयपुर के अस्पतालों में जा रहे है। ऐसे में मरीजों को आर्थिक खर्च भी उठाना पड़ रहा है।
वही दूसरी ओर चारों सुपर स्पेशलिटी के डॉक्टरों की संख्या प्रदेश में काफी कम है। ऐसे में जो डॉक्टर है वे बड़े शहरों में ही बड़े अस्पताल में अपनी सेवाएं दे रहे है। जहां बड़े पैकेज के साथ ही उन्हें सुविधाएं मिलती है। डॉक्टरों के आदिवासी बहुल जिले में नहीं आने का पीछे ये भी बड़ी वजह बताई जा रही है। डॉक्टर आने के बाद शुरू हो जाएगी यूनिट
गेस्ट्रो, कार्डियो, नेफ्रो ओर न्यूरोलॉजी चारो विभागों की मंजूरी मिल गई है। लेकिन डॉक्टर नहीं होने से इन विभागों की शुरुआत नहीं हो सकी है।
मेडिकल कॉलेज अस्पताल के कार्यवाहक प्रिंसिपल डॉ रूपेश कुमार ने बताया कि चारों विभागों के डॉक्टर आने के बाद उनकी यूनिट शुरू हो जाएगी। मरीजों की जांच के लिए जरूरी महंगे उपकरण भी मंगवाए जाएंगे। इससे अस्पताल में सुपर स्पेशलिटी की सुविधाएं बढ़ेगी और लोगों को इलाज में राहत मिलेगी।