अमरूद की बागवानी के लिए मिल रही सब्सिडी:उद्यान विभाग में करें आवेदन, तीन साल की होती है योजना

उद्यान विभाग अमरूद की बागवानी के लिए किसानों को सब्सिडी प्रदान कर रहा है। इस योजना के तहत किसान कहीं से भी अमरूद के पौधे खरीदकर बागवानी लगा सकते हैं और अपनी आय बढ़ा सकते हैं। जिला उद्यान अधिकारी संदीप गुप्ता ने बताया कि पूर्वांचल में अमरूद की बागवानी बड़े पैमाने पर होती रही है, खासकर मऊ के परदहां ब्लॉक में। किसानों को हर साल बागवानी विकास योजना और मुख्यमंत्री बागवानी विकास योजना के तहत सब्सिडी दी जाती है। अमरूद के पौधे आमतौर पर अप्रैल महीने में लगाए जाते हैं। पौधों को लगाने से पहले गड्ढों की खुदाई कर उनमें गोबर की खाद डाली जाती है। पर्याप्त तैयारी के बाद हल्की बारिश के मौसम में इन गड्ढों में पौधे लगाए जाते हैं। उद्यान विभाग लखनऊ 49, इलाहाबादी सफेदा सहित कई गुणवत्तापूर्ण किस्मों के पौधे और उर्वरक भी किसानों को उपलब्ध कराता है। बड़े पैमाने पर बागवानी लगाने वाले किसानों को, यदि वे 6 मीटर की दूरी पर पौधे लगाते हैं, तो 30,000 रुपये प्रति हेक्टेयर की सब्सिडी दी जाती है। वहीं, हाई डेंसिटी प्लांटिंग (नजदीक दूरी) के लिए प्रथम वर्ष में 48,000 रुपये प्रति हेक्टेयर का अनुदान मिलता है। यह योजना तीन साल की होती है, जिसमें दूसरे और तीसरे वर्ष में 24,000-24,000 रुपये का अनुदान दिया जाता है, ताकि किसानों को फसल की देखभाल में सहायता मिल सके और तीन वर्षों में बागवानी पूरी तरह तैयार हो जाए।

Feb 5, 2026 - 14:21
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अमरूद की बागवानी के लिए मिल रही सब्सिडी:उद्यान विभाग में करें आवेदन, तीन साल की होती है योजना
उद्यान विभाग अमरूद की बागवानी के लिए किसानों को सब्सिडी प्रदान कर रहा है। इस योजना के तहत किसान कहीं से भी अमरूद के पौधे खरीदकर बागवानी लगा सकते हैं और अपनी आय बढ़ा सकते हैं। जिला उद्यान अधिकारी संदीप गुप्ता ने बताया कि पूर्वांचल में अमरूद की बागवानी बड़े पैमाने पर होती रही है, खासकर मऊ के परदहां ब्लॉक में। किसानों को हर साल बागवानी विकास योजना और मुख्यमंत्री बागवानी विकास योजना के तहत सब्सिडी दी जाती है। अमरूद के पौधे आमतौर पर अप्रैल महीने में लगाए जाते हैं। पौधों को लगाने से पहले गड्ढों की खुदाई कर उनमें गोबर की खाद डाली जाती है। पर्याप्त तैयारी के बाद हल्की बारिश के मौसम में इन गड्ढों में पौधे लगाए जाते हैं। उद्यान विभाग लखनऊ 49, इलाहाबादी सफेदा सहित कई गुणवत्तापूर्ण किस्मों के पौधे और उर्वरक भी किसानों को उपलब्ध कराता है। बड़े पैमाने पर बागवानी लगाने वाले किसानों को, यदि वे 6 मीटर की दूरी पर पौधे लगाते हैं, तो 30,000 रुपये प्रति हेक्टेयर की सब्सिडी दी जाती है। वहीं, हाई डेंसिटी प्लांटिंग (नजदीक दूरी) के लिए प्रथम वर्ष में 48,000 रुपये प्रति हेक्टेयर का अनुदान मिलता है। यह योजना तीन साल की होती है, जिसमें दूसरे और तीसरे वर्ष में 24,000-24,000 रुपये का अनुदान दिया जाता है, ताकि किसानों को फसल की देखभाल में सहायता मिल सके और तीन वर्षों में बागवानी पूरी तरह तैयार हो जाए।