ट्रंप के 'फेवरेट' फील्ड मार्शल असीम मुनीर : क्या पाकिस्तान की 'हाई-स्टेक' कूटनीति रोक पाएगी मिडिल ईस्ट का महायुद्ध?

Field Marshal Asim Munir: मिडिल ईस्ट में बारूद की गंध और आसमान में गूंजते लड़ाकू विमानों के बीच, पूरी दुनिया की निगाहें एक ऐसे शख्स पर टिकी हैं जिसे अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप अपना 'पसंदीदा फील्ड मार्शल' कहते हैं। पाकिस्तान के सैन्य प्रमुख, ...

Apr 1, 2026 - 22:10
 0
ट्रंप के 'फेवरेट' फील्ड मार्शल असीम मुनीर : क्या पाकिस्तान की 'हाई-स्टेक' कूटनीति रोक पाएगी मिडिल ईस्ट का महायुद्ध?

Field Marshal Asim Munir
Field Marshal Asim Munir: मिडिल ईस्ट में बारूद की गंध और आसमान में गूंजते लड़ाकू विमानों के बीच, पूरी दुनिया की निगाहें एक ऐसे शख्स पर टिकी हैं जिसे अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप अपना 'पसंदीदा फील्ड मार्शल' कहते हैं। पाकिस्तान के सैन्य प्रमुख, फील्ड मार्शल असीम मुनीर, इस समय वैश्विक कूटनीति के केंद्र में हैं। सवाल यह है कि क्या मुनीर की ट्रंप से 'जुगलबंदी' दुनिया को तीसरे विश्व युद्ध की कगार से वापस ला पाएगी?

 

असीम मुनीर : जनरल से 'फील्ड मार्शल' और ट्रंप की पसंद तक

मई 2025 में भारत के साथ हुए संक्षिप्त लेकिन भीषण संघर्ष के बाद असीम मुनीर को 'फील्ड मार्शल' के पद पर पदोन्नत किया गया था। वह पाकिस्तान के इतिहास में यह पद पाने वाले दूसरे अधिकारी हैं।

 

अक्टूबर 2025 में गाजा शांति शिखर सम्मेलन के दौरान ट्रंप ने मुनीर की जमकर तारीफ की थी। ट्रंप का मानना है कि मुनीर न केवल एक सैन्य रणनीतिकार हैं, बल्कि वह ईरान के साथ पाकिस्तान की 900 किलोमीटर लंबी सीमा और सांस्कृतिक संबंधों के कारण तेहरान की नब्ज को दुनिया में सबसे बेहतर समझते हैं।

'हाई-स्टेक' डिप्लोमेसी : इनाम बड़ा, जोखिम उससे भी ज्यादा

बीबीसी की रिपोर्टर कैरोलिन डेविस के अनुसार, पाकिस्तान इस समय एक 'डाकिये' (Postman) की भूमिका निभा रहा है, जो वाशिंगटन और तेहरान के बीच गोपनीय संदेश पहुंचा रहा है।

पाकिस्तान का 'ट्रंप कार्ड' क्यों मजबूत है?

  • कोई अमेरिकी बेस नहीं : खाड़ी देशों के विपरीत, पाकिस्तान की ज़मीन पर कोई सक्रिय अमेरिकी सैन्य अड्डा नहीं है, जिससे ईरान उसे इज़राइल का "कट्टर पिछलग्गू" नहीं मानता।
  • आर्थिक मजबूरी : 'स्ट्रेट ऑफ हॉर्मुज' में तनाव के कारण पाकिस्तान में ईंधन की कीमतें 20% बढ़ चुकी हैं। शांति बहाली पाकिस्तान की अपनी अर्थव्यवस्था को बचाने के लिए अनिवार्य है।
  • सऊदी-पाक रक्षा समझौता 2025 : सितंबर 2025 में हुए सामरिक आपसी रक्षा समझौते (SMDA) के तहत पाकिस्तान सऊदी अरब की सुरक्षा के लिए प्रतिबद्ध है। यदि सऊदी अरब युद्ध में उतरा, तो पाकिस्तान को भी कूदना होगा—यह एक ऐसी स्थिति है जिससे मुनीर हर हाल में बचना चाहते हैं।

Asim Munir


भारत और अफगानिस्तान का 'एंगल'

विशेषज्ञ सवाल उठाते हैं कि जो देश खुद अपनी सीमाओं पर असुरक्षित है, वह दुनिया में शांति कैसे ला सकता है?
 

भारत फ्रंट : 2025 का मिसाइल युद्ध पाकिस्तान की कमर तोड़ चुका है।

तालिबान फ्रंट : अफगानिस्तान के साथ पाकिस्तान इस समय लगभग 'पूर्ण युद्ध' जैसी स्थिति में है।

 

अटलांटिक काउंसिल के माइकल कुगेलमैन का कहना है कि मुनीर इस समय "दो चट्टानों के बीच" फंसे हैं। एक तरफ ट्रंप का दबाव है और दूसरी तरफ ईरान की कट्टरपंथी सरकार।

 

क्या होगा अगर मध्यस्थता विफल हुई?

मलीहा लोधी, अमेरिका में पाकिस्तान की पूर्व राजदूत, चेतावनी देती हैं कि यदि यह वार्ता विफल होती है, तो पाकिस्तान पर "नादान" होने का ठप्पा लग सकता है। ईरान का अविश्वास: ईरान ने हालिया क्षेत्रीय बैठकों से दूरी बनाकर स्पष्ट कर दिया है कि उसकी प्राथमिकता केवल अपनी रक्षा है।

 

इज़राइल का हस्तक्षेप : पाकिस्तानी अधिकारियों को डर है कि इज़राइल किसी भी शांति वार्ता को 'स्पॉइलर' की भूमिका निभाकर पटरी से उतार सकता है।

 

कूटनीति का आखिरी जुआ

फील्ड मार्शल असीम मुनीर के लिए यह उनकी पेशेवर यात्रा का सबसे बड़ा इम्तिहान है। यदि वह सफल होते हैं, तो पाकिस्तान वैश्विक कूटनीति के शिखर पर होगा और संभवतः मुनीर का नाम नोबेल शांति पुरस्कार की रेस में आ जाए। लेकिन यदि विफल रहे, तो मिडिल ईस्ट की यह आग दक्षिण एशिया को अपनी चपेट में लेने में देर नहीं लगाएगी।

 

पाकिस्तान की वर्तमान स्थिति (2026)

  • ईंधन संकट : सरकारी कर्मचारियों के लिए हफ्ते में केवल 4 दिन काम।
  • रक्षा बजट : अर्थव्यवस्था संकट में होने के बावजूद जीडीपी का बड़ा हिस्सा सेना पर।
  • रणनीतिक स्थिति : चीन (CPEC) और अमेरिका (Diplomacy) के बीच संतुलन बनाने की कोशिश।