झुंझुनूं रेलवे स्टेशन:फुटओवर ब्रिज का ढांचा तैयार, लिफ्ट के लिए यात्रियों को करना होगा लंबा इंतजार
उत्तर-पश्चिम रेलवे के झुंझुनूं रेलवे स्टेशन पर यात्री सुविधाओं के विस्तार की गति फिलहाल धीमी पड़ती नजर आ रही है। 'अमृत भारत स्टेशन योजना' के तहत स्टेशन को आधुनिक रूप दिया जा रहा है, लेकिन महत्वपूर्ण 'लिफ्ट' परियोजना अभी भी फाइलों और फैक्ट्रियों के बीच अटकी हुई है। ढांचा खड़ा, काम ठप स्टेशन पर आवागमन को सुगम बनाने के लिए बनाए जा रहे नए 12 मीटर चौड़े फुटओवर ब्रिज (FOB) का बेसिक स्ट्रक्चर और पिलर तो खड़े कर दिए गए हैं, लेकिन पुल का ऊपरी हिस्सा और लिफ्ट लगाने का काम महीनों से आगे नहीं बढ़ पाया है। वर्तमान में यात्रियों को भारी सामान लेकर पुराने सीढ़ियों वाले पुल का उपयोग करना पड़ रहा है या मजबूरी में पटरियां पार करनी पड़ रही हैं। यात्रियों के लिए क्यों जरूरी है यह प्रोजेक्ट? योजना के अनुसार, स्टेशन पर दो अत्याधुनिक लिफ्ट लगाई जानी हैं। बुजुर्ग यात्री को सुविधाएं मिलेंगी। जिन्हें ऊंची सीढ़ियां चढ़ने में सांस फूलने की समस्या होती है। दिव्यांगजन जिनके लिए बिना लिफ्ट या रैंप के एक प्लेटफॉर्म से दूसरे प्लेटफॉर्म पर जाना लगभग असंभव है। भारी सामान लेकर आने वाले यात्रियों को परेशानी होती है।
फैक्ट्री में चल रहा निर्माण जब इस सुस्त रफ्तार के बारे में रेलवे अधिकारियों से संपर्क किया गया, तो उन्होंने काम बंद होने की खबरों को तकनीकी प्रक्रिया का हिस्सा बताया। अधिकारियों का कहना है कि लिफ्ट के केबिन और मुख्य लोहे के बीम का निर्माण ऑफ-साइट (फैक्ट्री में) किया जा रहा है। जैसे ही ये हिस्से तैयार होकर स्टेशन पहुंचेंगे, इन्हें सीधे असेंबल (जोड़ना) कर दिया जाएगा। इसी कारण स्टेशन परिसर में फिलहाल निर्माण गतिविधियां नजर नहीं आ रही हैं। कब तक पूरा होगा काम रेलवे ने इस पूरे प्रोजेक्ट को पूरा करने के लिए 31 अगस्त 2026 की समयसीमा (डेडलाइन) तय की है। हालांकि, जिस रफ्तार से काम चल रहा है, उसे देखते हुए इस समयसीमा में काम पूरा होना चुनौतीपूर्ण लग रहा है।
उत्तर-पश्चिम रेलवे के झुंझुनूं रेलवे स्टेशन पर यात्री सुविधाओं के विस्तार की गति फिलहाल धीमी पड़ती नजर आ रही है। 'अमृत भारत स्टेशन योजना' के तहत स्टेशन को आधुनिक रूप दिया जा रहा है, लेकिन महत्वपूर्ण 'लिफ्ट' परियोजना अभी भी फाइलों और फैक्ट्रियों के बीच अटकी हुई है। ढांचा खड़ा, काम ठप स्टेशन पर आवागमन को सुगम बनाने के लिए बनाए जा रहे नए 12 मीटर चौड़े फुटओवर ब्रिज (FOB) का बेसिक स्ट्रक्चर और पिलर तो खड़े कर दिए गए हैं, लेकिन पुल का ऊपरी हिस्सा और लिफ्ट लगाने का काम महीनों से आगे नहीं बढ़ पाया है। वर्तमान में यात्रियों को भारी सामान लेकर पुराने सीढ़ियों वाले पुल का उपयोग करना पड़ रहा है या मजबूरी में पटरियां पार करनी पड़ रही हैं। यात्रियों के लिए क्यों जरूरी है यह प्रोजेक्ट? योजना के अनुसार, स्टेशन पर दो अत्याधुनिक लिफ्ट लगाई जानी हैं। बुजुर्ग यात्री को सुविधाएं मिलेंगी। जिन्हें ऊंची सीढ़ियां चढ़ने में सांस फूलने की समस्या होती है। दिव्यांगजन जिनके लिए बिना लिफ्ट या रैंप के एक प्लेटफॉर्म से दूसरे प्लेटफॉर्म पर जाना लगभग असंभव है। भारी सामान लेकर आने वाले यात्रियों को परेशानी होती है।
फैक्ट्री में चल रहा निर्माण जब इस सुस्त रफ्तार के बारे में रेलवे अधिकारियों से संपर्क किया गया, तो उन्होंने काम बंद होने की खबरों को तकनीकी प्रक्रिया का हिस्सा बताया। अधिकारियों का कहना है कि लिफ्ट के केबिन और मुख्य लोहे के बीम का निर्माण ऑफ-साइट (फैक्ट्री में) किया जा रहा है। जैसे ही ये हिस्से तैयार होकर स्टेशन पहुंचेंगे, इन्हें सीधे असेंबल (जोड़ना) कर दिया जाएगा। इसी कारण स्टेशन परिसर में फिलहाल निर्माण गतिविधियां नजर नहीं आ रही हैं। कब तक पूरा होगा काम रेलवे ने इस पूरे प्रोजेक्ट को पूरा करने के लिए 31 अगस्त 2026 की समयसीमा (डेडलाइन) तय की है। हालांकि, जिस रफ्तार से काम चल रहा है, उसे देखते हुए इस समयसीमा में काम पूरा होना चुनौतीपूर्ण लग रहा है।