कलेक्टर मैडम याद रखेंगी नेम और 'नेम-प्लेट':धाम को मिला 'हनुमान' का सहारा; राजस्थान से बाहर 'डीग जिला'!

नमस्कार अलवर में नेमप्लेट के चक्कर में जिला प्रमुखजी को कमरे से बाहर जाना पड़ा। जयपुर के भैराणा धाम को 'हनुमान' का सहारा मिल गया। जयपुर के हॉस्पिटल में डीग वालों से बेगानों सा व्यवहार किया गया और स्वीडन के 'डॉन' को पसंद है राजस्थानी बोली। राजनीति और ब्यूरोक्रेसी की ऐसी ही खरी-खरी बातें पढ़िए, आज के इस एपिसोड में.. 1. अब नेम और नेमप्लेट याद रखेंगी कलेक्टर मैडम ! अंग्रेजी के प्रसिद्ध नाटककार विलियम शेक्सपियर ने अपने नाटक रोमियो एंड जूलियट में कहा-नाम में क्या रखा है? उक्ति काफी प्रसिद्ध हुई। शेक्सपियर महोदय को नाम का महत्व तब पता चलता जब वे किसी बड़ी मीटिंग में जाते और कमरे में टेबल पर उनके नाम की नेम-प्लेट तक नहीं मिलती। अलवर के मिनी सचिवालय में एक मीटिंग हुई। मीटिंग में बड़ी-बड़ी हस्तियां पहुंचीं। केंद्रीय मंत्री आए। मुख्य सचिव आए। विधायक आए। तीन जिलों के कलेक्टर-एसपी आए। मीटिंग हॉल में सबकी टेबल पर नेम-प्लेट लगाकर रखी थी। इसी मीटिंग में जिला प्रमुख छिल्लर साहब भी पहुंच गए। कमरे में अपने नाम की नेम-प्लेट ढूंढ रहे थे। नेम-प्लेट थी नहीं। कलेक्टर साहिबा ने आकर फरमान सुनाया- जिनकी नेम-प्लेट नहीं लगी है वे बाहर आ जाएं। मुंह लटकाकर छिल्लर साहब बाहर चल दिए। कहीं से दबी हुई हंसी उठी। घनघोर बेइज्जती। जिला प्रमुख की कोई बिसात ही नहीं? मीटिंग हॉल के बाहर जिला प्रमुख मन ही मन कुढ़ रहे थे कि केंद्रीय मंत्री भूपेंद्र यादव पधारे। हॉल में जाने लगे। छिल्लर साहब को बाहर खड़े देखा तो अंदर ले गए। साहब पीछे-पीछे हॉल में आ गए। केंद्रीय मंत्रीजी ने गैर-हाजिर विधायक की कुर्सी की तरफ इशारा किया-वहां बैठिए। छिल्लर साहब बैठ गए। चर्चा है कि कलेक्टर साहिबा और छिल्लर साहब की अनबन चल रही है। एक दिन साधारण सभा की बैठक में कलेक्टर महोदया की गैरहाजिरी पर छिल्लरजी नाराज हुए थे। मैडम ने भी दांव चला। लेकिन मामला उल्टा पड़ गया। अब मैडम को नेम भी याद रखना पड़ेगा और नेम-प्लेट भी। 2. भैराणा धाम को ‘हनुमान’ का सहारा और अब संतों को हनुमान का सहारा मिल गया है। रात्रि चौपाल में डिप्टी सीएम साहब पर खूब तोहमतें लगीं थीं। एक तरफ धाम और दूसरी तरफ विकास का काम। दोनों जरूरी। डिप्टी सीएम साहब क्या करें? चाय पीकर चौपाल वाली रात्रि को भुलाने की कोशिश कर रहे हैं। उधर, सूचना मिली कि भैराणा धाम की राह पर धूल का गुबार उठा। सैकड़ों गाड़ियां, हजारों लोग पीले झंडे उठाए चले आ रहे हैं। एक ने पूछा-कौन आ रहा है? दूसरा उत्साह से बोला-हनुमान। कुल मिलाकर बेनीवालजी ने संतों को समर्थन दे दिया। हालांकि, इस समर्थन से न सरकार बनेगी, न बिगड़ेगी। लेकिन संतों को खूब सहारा मिला। धाम पर बेनीवाल का स्वागत किया गया। बेनीवाल ने संतों-गुरुओं का आशीर्वाद लिया। फिर माइक थाम कर अभयदान सा दिया। बोले- संत सड़क पर हैं। मुझे यह मौका मिल रहा है कि संतों की जीत करवाऊं। इससे बड़ा सौभाग्य क्या होगा? अब समझो हो गई जीत। वैसे नागौर सांसद बेनीवालजी गलत भी नहीं कह रहे। अब तो ट्रेंड ही चल गया कि सरकार-प्रशासन के खिलाफ कहीं भी विरोध-प्रदर्शन में अच्छी गैदरिंग हो जाए तो वहां पहुंच जाते हैं। फिर कूच का ऐलान करते हैं। फिर काफिला और हुजूम लेकर कूच कर देते हैं। फिर कूच को रोका जाता है। फिर प्रशासन रोकने वाले स्थान पर पहुंचता है। फिर मांगों पर मोल-भाव होता है। और आखिर बात किसी न किसी मुकाम पर पहुंच ही जाती है। लगता है कि संतों की कंडों वाली तपस्या सफल रही। अब उम्मीद लगाकर बैठे हैं। 3. डीग वालों, राजस्थान का मैप लेकर चलो.. विधायक मैडम ने तर्जनी उठाकर ऐलान जैसा किया- किसी गरीब के साथ, किसी मजलूम के साथ ज्यादती नहीं होने दूंगी। कहकर जा रही हूं। सामने डीग की जनता थी। मैडम ने एक और बात कही- सरकार की हर योजना का लाभ अंतिम व्यक्ति तक पहुंचे, ये मेरी गारंटी है। इधर मैडम ने गारंटी दी और उधर डीग राजस्थान के नक्शे से ही बाहर हो गया। हालांकि, यह निर्वासन राजनीतिक या प्रशासनिक स्तर पर नहीं हुआ। बल्कि राजधानी में प्रदेश के सबसे बड़े SMS हॉस्पिटल में हुआ। यहां डीग से इलाज कराने आए मरीज से जांच करने वाले ने रकम ऐंठ ली। बोला-डीग तो राजस्थान से बाहर है। बेचारा गरीब आदमी अपने बचाव में कोई तर्क नहीं दे पाया। कुछ पर्चियां और दस्तावेज आगे कर दिए। समझदार होता तो कहता- भरतपुर से बाहर होने का मतलब राजस्थान से बाहर होना नहीं है महाराज। 4. चलते-चलते.. नाइजीरिया के एलेमा रॉयल फैमिली से ताल्लुक रखने वाले प्रिंस डॉन एलेमा स्वीडन में रहते हैं। लेकिन डॉन के दिल में है राजस्थान और राजस्थानी गीत। उन्होंने अपनी अनूठी गायन शैली में हरियाला बन्ना, बेगा आओ नी मजीसा और केसरिया बालम गाकर दिल जीत लिया। बाबा रामदेव के भजन भी खूब गाते हैं। उदयपुर के लोकगायक धनराज जोशी के निधन पर उन्होंने दुख जताया। जोशीजी से काफी कुछ सीखा था। साथ मंच साझा किया था। मायड़ बोली से इतना लगाव कि अपना परिचय भी वे राजस्थानी में ही देते हैं। उनके मारवाड़ी गीतों को काफी पसंद किया जा रहा है। राजस्थान की मिट्‌टी, इतिहास और संस्कृति का आकर्षण ही ऐसा है, जो इसे जानता है, समझता है, अपनाता है, वह इसी का हो जाता है। इनपुट सहयोग- धर्मेंद्र यादव (अलवर), दिनेश पालीवाल (जयपुर), मुकेश जांगिड़ (डीग)। वीडियो देखने के लिए सबसे ऊपर फोटो पर क्लिक करें। अब कल सुबह 7 बजे मुलाकात होगी।

May 13, 2026 - 07:26
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कलेक्टर मैडम याद रखेंगी नेम और 'नेम-प्लेट':धाम को मिला 'हनुमान' का सहारा; राजस्थान से बाहर 'डीग जिला'!
नमस्कार अलवर में नेमप्लेट के चक्कर में जिला प्रमुखजी को कमरे से बाहर जाना पड़ा। जयपुर के भैराणा धाम को 'हनुमान' का सहारा मिल गया। जयपुर के हॉस्पिटल में डीग वालों से बेगानों सा व्यवहार किया गया और स्वीडन के 'डॉन' को पसंद है राजस्थानी बोली। राजनीति और ब्यूरोक्रेसी की ऐसी ही खरी-खरी बातें पढ़िए, आज के इस एपिसोड में.. 1. अब नेम और नेमप्लेट याद रखेंगी कलेक्टर मैडम ! अंग्रेजी के प्रसिद्ध नाटककार विलियम शेक्सपियर ने अपने नाटक रोमियो एंड जूलियट में कहा-नाम में क्या रखा है? उक्ति काफी प्रसिद्ध हुई। शेक्सपियर महोदय को नाम का महत्व तब पता चलता जब वे किसी बड़ी मीटिंग में जाते और कमरे में टेबल पर उनके नाम की नेम-प्लेट तक नहीं मिलती। अलवर के मिनी सचिवालय में एक मीटिंग हुई। मीटिंग में बड़ी-बड़ी हस्तियां पहुंचीं। केंद्रीय मंत्री आए। मुख्य सचिव आए। विधायक आए। तीन जिलों के कलेक्टर-एसपी आए। मीटिंग हॉल में सबकी टेबल पर नेम-प्लेट लगाकर रखी थी। इसी मीटिंग में जिला प्रमुख छिल्लर साहब भी पहुंच गए। कमरे में अपने नाम की नेम-प्लेट ढूंढ रहे थे। नेम-प्लेट थी नहीं। कलेक्टर साहिबा ने आकर फरमान सुनाया- जिनकी नेम-प्लेट नहीं लगी है वे बाहर आ जाएं। मुंह लटकाकर छिल्लर साहब बाहर चल दिए। कहीं से दबी हुई हंसी उठी। घनघोर बेइज्जती। जिला प्रमुख की कोई बिसात ही नहीं? मीटिंग हॉल के बाहर जिला प्रमुख मन ही मन कुढ़ रहे थे कि केंद्रीय मंत्री भूपेंद्र यादव पधारे। हॉल में जाने लगे। छिल्लर साहब को बाहर खड़े देखा तो अंदर ले गए। साहब पीछे-पीछे हॉल में आ गए। केंद्रीय मंत्रीजी ने गैर-हाजिर विधायक की कुर्सी की तरफ इशारा किया-वहां बैठिए। छिल्लर साहब बैठ गए। चर्चा है कि कलेक्टर साहिबा और छिल्लर साहब की अनबन चल रही है। एक दिन साधारण सभा की बैठक में कलेक्टर महोदया की गैरहाजिरी पर छिल्लरजी नाराज हुए थे। मैडम ने भी दांव चला। लेकिन मामला उल्टा पड़ गया। अब मैडम को नेम भी याद रखना पड़ेगा और नेम-प्लेट भी। 2. भैराणा धाम को ‘हनुमान’ का सहारा और अब संतों को हनुमान का सहारा मिल गया है। रात्रि चौपाल में डिप्टी सीएम साहब पर खूब तोहमतें लगीं थीं। एक तरफ धाम और दूसरी तरफ विकास का काम। दोनों जरूरी। डिप्टी सीएम साहब क्या करें? चाय पीकर चौपाल वाली रात्रि को भुलाने की कोशिश कर रहे हैं। उधर, सूचना मिली कि भैराणा धाम की राह पर धूल का गुबार उठा। सैकड़ों गाड़ियां, हजारों लोग पीले झंडे उठाए चले आ रहे हैं। एक ने पूछा-कौन आ रहा है? दूसरा उत्साह से बोला-हनुमान। कुल मिलाकर बेनीवालजी ने संतों को समर्थन दे दिया। हालांकि, इस समर्थन से न सरकार बनेगी, न बिगड़ेगी। लेकिन संतों को खूब सहारा मिला। धाम पर बेनीवाल का स्वागत किया गया। बेनीवाल ने संतों-गुरुओं का आशीर्वाद लिया। फिर माइक थाम कर अभयदान सा दिया। बोले- संत सड़क पर हैं। मुझे यह मौका मिल रहा है कि संतों की जीत करवाऊं। इससे बड़ा सौभाग्य क्या होगा? अब समझो हो गई जीत। वैसे नागौर सांसद बेनीवालजी गलत भी नहीं कह रहे। अब तो ट्रेंड ही चल गया कि सरकार-प्रशासन के खिलाफ कहीं भी विरोध-प्रदर्शन में अच्छी गैदरिंग हो जाए तो वहां पहुंच जाते हैं। फिर कूच का ऐलान करते हैं। फिर काफिला और हुजूम लेकर कूच कर देते हैं। फिर कूच को रोका जाता है। फिर प्रशासन रोकने वाले स्थान पर पहुंचता है। फिर मांगों पर मोल-भाव होता है। और आखिर बात किसी न किसी मुकाम पर पहुंच ही जाती है। लगता है कि संतों की कंडों वाली तपस्या सफल रही। अब उम्मीद लगाकर बैठे हैं। 3. डीग वालों, राजस्थान का मैप लेकर चलो.. विधायक मैडम ने तर्जनी उठाकर ऐलान जैसा किया- किसी गरीब के साथ, किसी मजलूम के साथ ज्यादती नहीं होने दूंगी। कहकर जा रही हूं। सामने डीग की जनता थी। मैडम ने एक और बात कही- सरकार की हर योजना का लाभ अंतिम व्यक्ति तक पहुंचे, ये मेरी गारंटी है। इधर मैडम ने गारंटी दी और उधर डीग राजस्थान के नक्शे से ही बाहर हो गया। हालांकि, यह निर्वासन राजनीतिक या प्रशासनिक स्तर पर नहीं हुआ। बल्कि राजधानी में प्रदेश के सबसे बड़े SMS हॉस्पिटल में हुआ। यहां डीग से इलाज कराने आए मरीज से जांच करने वाले ने रकम ऐंठ ली। बोला-डीग तो राजस्थान से बाहर है। बेचारा गरीब आदमी अपने बचाव में कोई तर्क नहीं दे पाया। कुछ पर्चियां और दस्तावेज आगे कर दिए। समझदार होता तो कहता- भरतपुर से बाहर होने का मतलब राजस्थान से बाहर होना नहीं है महाराज। 4. चलते-चलते.. नाइजीरिया के एलेमा रॉयल फैमिली से ताल्लुक रखने वाले प्रिंस डॉन एलेमा स्वीडन में रहते हैं। लेकिन डॉन के दिल में है राजस्थान और राजस्थानी गीत। उन्होंने अपनी अनूठी गायन शैली में हरियाला बन्ना, बेगा आओ नी मजीसा और केसरिया बालम गाकर दिल जीत लिया। बाबा रामदेव के भजन भी खूब गाते हैं। उदयपुर के लोकगायक धनराज जोशी के निधन पर उन्होंने दुख जताया। जोशीजी से काफी कुछ सीखा था। साथ मंच साझा किया था। मायड़ बोली से इतना लगाव कि अपना परिचय भी वे राजस्थानी में ही देते हैं। उनके मारवाड़ी गीतों को काफी पसंद किया जा रहा है। राजस्थान की मिट्‌टी, इतिहास और संस्कृति का आकर्षण ही ऐसा है, जो इसे जानता है, समझता है, अपनाता है, वह इसी का हो जाता है। इनपुट सहयोग- धर्मेंद्र यादव (अलवर), दिनेश पालीवाल (जयपुर), मुकेश जांगिड़ (डीग)। वीडियो देखने के लिए सबसे ऊपर फोटो पर क्लिक करें। अब कल सुबह 7 बजे मुलाकात होगी।