रिहा युवक बोला-'पुलिस ने अपराधियों जैसा सलूक किया':NEET प्रोटेस्ट हिंसा-जेल के अंदर मैं लगातार मानसिक तनाव में रहा

नीट पेपरलीक विरोध प्रदर्शन के बाद गिरफ्तार किए गए दिवाकर कुशवाहा ने रिहा होने के बाद पुलिस की कार्रवाई पर गंभीर सवाल उठाए हैं। लगभग एक सप्ताह जेल में बिताने के बाद बाहर आए दिवाकर ने दावा किया कि वह छात्र प्रदर्शन में शामिल नहीं था, फिर भी उसे गिरफ्तार कर जेल भेज दिया गया। दिवाकर कुशवाहा के अनुसार, पुलिस ने उन्हें 26 जुलाई को सेंट्रल कोऑपरेटिव बैंक के सामने से पकड़ा था। उन्होंने आरोप लगाया कि गिरफ्तारी के दौरान पुलिस ने उनके साथ मारपीट की, अपराधियों जैसा व्यवहार किया और हाजत में रखने के बाद न्यायिक हिरासत में जेल भेज दिया। दिवाकर ने जेल में बिताए समय को 'बेहद कठिन' बताया। उन्होंने कहा, "जेल के अंदर मैं लगातार मानसिक तनाव में रहा। वहां कई खूंखार अपराधियों के बीच रहना पड़ा, जिससे मैं काफी डरा और असहज महसूस कर रहा था। मैं निर्दोष था, फिर भी मुझे उन परिस्थितियों का सामना करना पड़ा।" पुलिस ने उपद्रवियों की तस्वीरें सार्वजनिक की थीं उन्होंने पुलिस की कार्रवाई पर सवाल उठाते हुए कहा कि प्रदर्शन के दौरान पुलिस ने ड्रोन कैमरों से निगरानी की थी। मीडिया ने भी घटना की रिकॉर्डिंग की थी और सीतामढ़ी पुलिस ने उपद्रवियों की तस्वीरें सार्वजनिक की थीं। दिवाकर का दावा है कि इन तस्वीरों, ड्रोन फुटेज या किसी भी वीडियो में उनकी मौजूदगी नहीं थी, इसके बावजूद उन्हें गिरफ्तार कर एफआईआर में नामजद किया गया और जेल भेज दिया गया। दिवाकर ने बताया कि उन्हें बाद में सुप्रीम कोर्ट के आदेश के आलोक में रिहा किया गया।

Aug 1, 2026 - 22:14
 0
रिहा युवक बोला-'पुलिस ने अपराधियों जैसा सलूक किया':NEET प्रोटेस्ट हिंसा-जेल के अंदर मैं लगातार मानसिक तनाव में रहा
नीट पेपरलीक विरोध प्रदर्शन के बाद गिरफ्तार किए गए दिवाकर कुशवाहा ने रिहा होने के बाद पुलिस की कार्रवाई पर गंभीर सवाल उठाए हैं। लगभग एक सप्ताह जेल में बिताने के बाद बाहर आए दिवाकर ने दावा किया कि वह छात्र प्रदर्शन में शामिल नहीं था, फिर भी उसे गिरफ्तार कर जेल भेज दिया गया। दिवाकर कुशवाहा के अनुसार, पुलिस ने उन्हें 26 जुलाई को सेंट्रल कोऑपरेटिव बैंक के सामने से पकड़ा था। उन्होंने आरोप लगाया कि गिरफ्तारी के दौरान पुलिस ने उनके साथ मारपीट की, अपराधियों जैसा व्यवहार किया और हाजत में रखने के बाद न्यायिक हिरासत में जेल भेज दिया। दिवाकर ने जेल में बिताए समय को 'बेहद कठिन' बताया। उन्होंने कहा, "जेल के अंदर मैं लगातार मानसिक तनाव में रहा। वहां कई खूंखार अपराधियों के बीच रहना पड़ा, जिससे मैं काफी डरा और असहज महसूस कर रहा था। मैं निर्दोष था, फिर भी मुझे उन परिस्थितियों का सामना करना पड़ा।" पुलिस ने उपद्रवियों की तस्वीरें सार्वजनिक की थीं उन्होंने पुलिस की कार्रवाई पर सवाल उठाते हुए कहा कि प्रदर्शन के दौरान पुलिस ने ड्रोन कैमरों से निगरानी की थी। मीडिया ने भी घटना की रिकॉर्डिंग की थी और सीतामढ़ी पुलिस ने उपद्रवियों की तस्वीरें सार्वजनिक की थीं। दिवाकर का दावा है कि इन तस्वीरों, ड्रोन फुटेज या किसी भी वीडियो में उनकी मौजूदगी नहीं थी, इसके बावजूद उन्हें गिरफ्तार कर एफआईआर में नामजद किया गया और जेल भेज दिया गया। दिवाकर ने बताया कि उन्हें बाद में सुप्रीम कोर्ट के आदेश के आलोक में रिहा किया गया।