मधेपुरा में PM मोदी-CM सम्राट का पुतला फूंका:छात्रों पर लाठीचार्ज और स्कूल नाम बदलने के विरोध में प्रदर्शन; कहा-'सरकार तानाशाह'

मधेपुरा में रासबिहारी मंडल हाई स्कूल समेत अन्य ऐतिहासिक विद्यालयों का नाम बदले जाने और दिल्ली के जंतर-मंतर पर शांतिपूर्ण प्रदर्शन कर रहे छात्रों पर पुलिस लाठीचार्ज के खिलाफ बुधवार को महागठबंधन के बैनर तले जोरदार विरोध प्रदर्शन किया गया। महागठबंधन कार्यकर्ताओं ने निकाला आक्रोश मार्च केंद्र और राज्य सरकार की नीतियों के खिलाफ कार्यकर्ताओं ने शहर में आक्रोश मार्च निकाला। इसके बाद भूपेंद्र चौक पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी तथा बिहार के मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी का पुतला दहन किया। कार्यक्रम का संचालन राजद जिलाध्यक्ष सह महागठबंधन के संयोजक जयकांत यादव ने किया। कार्यकर्ताओं को संबोधित करते हुए जयकांत यादव ने सरकार पर हमला बोला। उन्होंने कहा कि सरकार एक सोची-समझी साजिश के तहत क्षेत्र की ऐतिहासिक धरोहरों को मिटाने का प्रयास कर रही है। रासबिहारी उच्च विद्यालय (मधेपुरा), भुवनेश्वरी उच्च विद्यालय (मुरलीगंज), रामहंस उच्च विद्यालय (चतरा) और महर्षि मेंही उच्च विद्यालय (कुमारखंड) जैसे ऐतिहासिक संस्थानों का नाम के आगे सरस्वती विद्या निकेतन जोड़ दिया गया है। निहत्थे छात्रों पर पुलिस का लाठीचार्ज करना गलत ई. प्रभाष यादव ने कहा कि यह हमारी शिक्षा व्यवस्था, इतिहास और स्थानीय अस्मिता पर सीधा हमला है। प्रदर्शन में शामिल पूर्व विधायक चंद्रहास चौपाल ने दिल्ली में हुई घटना पर रोष जताते हुए कहा कि जंतर मंतर पर अपने अधिकारों की मांग कर रहे निहत्थे छात्रों पर पुलिस द्वारा बर्बरतापूर्वक लाठीचार्ज करना बेहद दुखद और चिंताजनक है। उन्होंने मांग की कि इस दमनकारी कार्रवाई की उच्चस्तरीय जांच कराई जाए और दोषी पुलिस अधिकारियों पर सख्त से सख्त कार्रवाई की जाए। आक्रोश मार्च के दौरान नेताओं ने स्पष्ट शब्दों में सरकार के सामने अपनी मांगें रखते हुए कहा कि सभी ऐतिहासिक विद्यालयों के पुराने नामों को यथाशीघ्र पुनः बहाल किया जाए। छात्रों पर हुए लाठीचार्ज की निष्पक्ष जांच कर दोषियों को सजा दी जाए। महागठबंधन के नेताओं ने चेतावनी दी कि यदि सरकार ने जल्द ही इन नामों को वापस नहीं लिया और अपनी नीतियां नहीं बदलीं, तो आने वाले दिनों में उग्र और चरणबद्ध आंदोलन चलाया जाएगा। कार्यक्रम में महागठबंधन के सभी घटक दलों के कार्यकर्ताओं और नेताओं ने बड़ी संख्या में भाग लिया।

Jul 22, 2026 - 20:11
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मधेपुरा में PM मोदी-CM सम्राट का पुतला फूंका:छात्रों पर लाठीचार्ज और स्कूल नाम बदलने के विरोध में प्रदर्शन; कहा-'सरकार तानाशाह'
मधेपुरा में रासबिहारी मंडल हाई स्कूल समेत अन्य ऐतिहासिक विद्यालयों का नाम बदले जाने और दिल्ली के जंतर-मंतर पर शांतिपूर्ण प्रदर्शन कर रहे छात्रों पर पुलिस लाठीचार्ज के खिलाफ बुधवार को महागठबंधन के बैनर तले जोरदार विरोध प्रदर्शन किया गया। महागठबंधन कार्यकर्ताओं ने निकाला आक्रोश मार्च केंद्र और राज्य सरकार की नीतियों के खिलाफ कार्यकर्ताओं ने शहर में आक्रोश मार्च निकाला। इसके बाद भूपेंद्र चौक पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी तथा बिहार के मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी का पुतला दहन किया। कार्यक्रम का संचालन राजद जिलाध्यक्ष सह महागठबंधन के संयोजक जयकांत यादव ने किया। कार्यकर्ताओं को संबोधित करते हुए जयकांत यादव ने सरकार पर हमला बोला। उन्होंने कहा कि सरकार एक सोची-समझी साजिश के तहत क्षेत्र की ऐतिहासिक धरोहरों को मिटाने का प्रयास कर रही है। रासबिहारी उच्च विद्यालय (मधेपुरा), भुवनेश्वरी उच्च विद्यालय (मुरलीगंज), रामहंस उच्च विद्यालय (चतरा) और महर्षि मेंही उच्च विद्यालय (कुमारखंड) जैसे ऐतिहासिक संस्थानों का नाम के आगे सरस्वती विद्या निकेतन जोड़ दिया गया है। निहत्थे छात्रों पर पुलिस का लाठीचार्ज करना गलत ई. प्रभाष यादव ने कहा कि यह हमारी शिक्षा व्यवस्था, इतिहास और स्थानीय अस्मिता पर सीधा हमला है। प्रदर्शन में शामिल पूर्व विधायक चंद्रहास चौपाल ने दिल्ली में हुई घटना पर रोष जताते हुए कहा कि जंतर मंतर पर अपने अधिकारों की मांग कर रहे निहत्थे छात्रों पर पुलिस द्वारा बर्बरतापूर्वक लाठीचार्ज करना बेहद दुखद और चिंताजनक है। उन्होंने मांग की कि इस दमनकारी कार्रवाई की उच्चस्तरीय जांच कराई जाए और दोषी पुलिस अधिकारियों पर सख्त से सख्त कार्रवाई की जाए। आक्रोश मार्च के दौरान नेताओं ने स्पष्ट शब्दों में सरकार के सामने अपनी मांगें रखते हुए कहा कि सभी ऐतिहासिक विद्यालयों के पुराने नामों को यथाशीघ्र पुनः बहाल किया जाए। छात्रों पर हुए लाठीचार्ज की निष्पक्ष जांच कर दोषियों को सजा दी जाए। महागठबंधन के नेताओं ने चेतावनी दी कि यदि सरकार ने जल्द ही इन नामों को वापस नहीं लिया और अपनी नीतियां नहीं बदलीं, तो आने वाले दिनों में उग्र और चरणबद्ध आंदोलन चलाया जाएगा। कार्यक्रम में महागठबंधन के सभी घटक दलों के कार्यकर्ताओं और नेताओं ने बड़ी संख्या में भाग लिया।