महज 10 दिनों के भीतर तीन भयानक हमले और पांच भारतीय नाविकों की दर्दनाक मौत। सहनशीलता की हर सीमा पार हो चुकी है। भारत ने यूक्रेन के राजदूत को तलब कर यह साफ कर दिया है कि निर्दोष नाविकों की जान से खेलना अब और बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। दरअसल बता दें कि 18 जुलाई को जब मार्शल आइलैंड के झंडे वाले मालवाहक जहाज एमवी ओमोफ्री पर ब्लैक सी में अचानक हमला बोल दिया गया तो भारतीय नाविकों की यूनियनों ने सीधे तौर पर इस खूनी हमले के लिए यूक्रेनी ड्रोन को जिम्मेदार ठहराया। इस हमले में भारत के होनहार चीफ ऑफिसर सागर गुप्ता की जान चली गई। भारत ने बिना एक पल गवाए यूक्रेन के राजदूत को साउथ ब्लॉक तलब किया। भारत ने दो टूक शब्दों में चेतावनी दी। व्यापारिक जहाजों और बेकसूर क्रू मेंबर की जान को खतरे में डालना पूरी तरह अस्वीकार्य है।
समुद्री यातायात की आजादी और वैश्विक व्यापार पर हमला किसी भी कीमत पर माफ नहीं किया जाएगा। रूस यूक्रेन युद्ध की आग अब सीधे तौर पर भारतीयों को लील रही है। इन 10 दिनों का खौफनाक सच चीख-चीख कर यह बयां कर रहा है कि ब्लैक सी अब नाविकों के लिए एक खुला श्मशान बन चुका है। पहला हादसा होता है 18 जुलाई को। जहाज एमवी ओमोफ्री पर ब्लैक सी में हमला होता है। यूक्रेनी ड्रोन और इस वार में भारत के होनहार नाविक सागर गुप्ता शहीद हो गए। दूसरा हादसा 19 जुलाई को ओसा पोर्ट के पास गोल्डन लियो जहाज पर होता है यह हमला जिसमें चार भारतीय नाविकों की मौत हो जाती है।
तीसरा हादसा 25 जुलाई को एक बार फिर गोल्डन लियो को निशाना बनाया गया जिसमें दो और भारतीय नाविक अपनी जान गवा बैठे। लगातार हो रहे इन हमलों ने पूरी दुनिया के शिपिंग उद्योग को हिलाकर रख दिया है। भारत दुनिया का सबसे बड़ा नाविक सप्लायर देश है। लेकिन यूक्रेन और रूस की इस जंग में हमारे नागरिकों को मोहरा बनाया जा रहा है। भारत सरकार ने अब देश के सभी नाविकों और शिपिंग कंपनियों के लिए हाई अलर्ट एडवाइज़री जारी कर दी है। ब्लैक सी के इन खूनी इलाकों में कदम रखने से पहले अपनी सुरक्षा पुख्ता करें। भारत की सर्वोच्च प्राथमिकता अपने नागरिकों की रक्षा करना है। नई दिल्ली ने यह साफ कर दिया है कि खून की एक-एक बूंद का हिसाब लिया जाएगा और इस अंधी हिंसा को अब हर हाल में रोकना ही होगा।