थारू जनजाति संवाद कार्यक्रम में मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने सुनी जनजाति समाज की समस्याएं, विकास और सांस्कृतिक संरक्षण को बताया सरकार की प्राथमिकता

थारू जनजाति संवाद कार्यक्रम में मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने सुनी जनजाति समाज की समस्याएं, विकास और सांस्कृतिक संरक्षण को बताया सरकार की प्राथमिकता

Aug 1, 2026 - 21:35
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थारू जनजाति संवाद कार्यक्रम में मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने सुनी जनजाति समाज की समस्याएं, विकास और सांस्कृतिक संरक्षण को बताया सरकार की प्राथमिकता

*थारू जनजाति संवाद कार्यक्रम में मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने सुनी जनजाति समाज की समस्याएं, विकास और सांस्कृतिक संरक्षण को बताया सरकार की प्राथमिकता*

खटीमा, 01 अगस्त। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी शनिवार को खटीमा में आयोजित थारू जनजाति संवाद कार्यक्रम में शामिल हुए। कार्यक्रम का शुभारंभ दीप प्रज्वलन एवं वंदे मातरम् के सामूहिक गायन के साथ हुआ। इस अवसर पर थारू जनजाति समाज के प्रतिनिधियों ने पुष्पगुच्छ भेंट कर मुख्यमंत्री का स्वागत किया।

कार्यक्रम के प्रारंभ में मुख्यमंत्री ने बीएसएफ के एवरेस्ट विजेता मोहन सिंह राणा तथा आईटीबीपी के एवरेस्ट विजेता टीला सेन को सम्मानित करते हुए कहा कि दोनों ने न केवल उत्तराखंड बल्कि पूरे देश का नाम गौरवान्वित किया है।

संवाद के दौरान थारू समाज के प्रतिनिधियों ने मुख्यमंत्री का आभार व्यक्त करते हुए उन्हें उत्तराखंड का मसीहा बताया। प्रतिनिधियों ने कहा कि मुख्यमंत्री हमेशा समाज के सुख-दुख से जुड़े रहे हैं तथा थारू संस्कृति और परंपराओं के संरक्षण के लिए किए गए कार्य ऐतिहासिक हैं। उन्होंने धर्मांतरण विरोधी कानून की सराहना करते हुए कहा कि इससे अनेक लोगों की अपने मूल धर्म में वापसी का मार्ग प्रशस्त हुआ है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रदेश में योजनाबद्ध तरीके से धर्मांतरण का प्रयास किया गया, जिसे रोकना आवश्यक था। इसी उद्देश्य से सख्त धर्मांतरण विरोधी कानून लागू किया गया। उन्होंने कहा कि अनुसूचित जनजाति का लाभ लेकर धर्मांतरण करने वालों को मिलने वाली सुविधाओं पर भी सरकार गंभीरता से विचार कर रही है। उन्होंने समाज से इस कुप्रथा को समाप्त करने में सक्रिय सहयोग का आह्वान किया।

संवाद के दौरान जनप्रतिनिधियों ने बताया कि उत्तराखंड गठन से पूर्व उत्तर प्रदेश में थारू जनजाति का आरक्षण रोस्टर में पांचवां स्थान था, जबकि वर्तमान में यह 24वें स्थान पर है। उन्होंने इसे पुनः पांचवें स्थान पर लाने का अनुरोध किया ताकि युवाओं को रोजगार में बेहतर अवसर मिल सकें। साथ ही आश्रम पद्धति विद्यालय को हाईस्कूल से इंटरमीडिएट तक उच्चीकृत करने की मांग भी रखी। मुख्यमंत्री ने आश्वस्त किया कि गदरपुर की तर्ज पर इस दिशा में सकारात्मक कार्रवाई की जाएगी।

प्रतिनिधियों ने वर्ष 1962 में नानक सागर बांध से विस्थापित किसानों की भूमि संबंधी समस्या का भी मुद्दा उठाया। मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार लोगों को बसाने के लिए काम करती है, उजाड़ने के लिए नहीं। उन्होंने कहा कि यह मामला सरकार के संज्ञान में है और इसके समाधान के लिए आवश्यक कार्रवाई की जाएगी।

जनप्रतिनिधियों ने मुख्यमंत्री के बीच बैठकर संवाद करने की शैली की सराहना करते हुए कहा कि यह उनके लिए गौरव का विषय है। उन्होंने कहा कि वर्ष 2022 में भ्रम और अफवाहों के कारण जो राजनीतिक भूल हुई, उसका प्रायश्चित समाज भविष्य में करेगा। इस पर मुख्यमंत्री ने कहा कि चुनाव में हार-जीत होती रहती है, लेकिन उन्होंने कभी खटीमा और यहां के लोगों का साथ नहीं छोड़ा।

थारू समाज के प्रतिनिधियों ने उत्तराखंड में केंद्र सरकार की तर्ज पर पृथक जनजातीय कार्य मंत्रालय गठित करने तथा खटीमा में उच्च शिक्षा एवं प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी के लिए कोचिंग सेंटर स्थापित करने का सुझाव दिया। मुख्यमंत्री ने इन सुझावों का स्वागत करते हुए कहा कि सरकार इस दिशा में गंभीरता से कार्य करेगी।

अवैध नशे के बढ़ते प्रभाव पर चिंता व्यक्त करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि केंद्र और राज्य सरकार संयुक्त रूप से इसके खिलाफ अभियान चला रही हैं। उन्होंने कहा कि नशा केवल व्यक्ति ही नहीं, पूरे परिवार को बर्बाद कर देता है। इससे बचाव के लिए समाज और प्रशासन को मिलकर व्यापक जनजागरूकता अभियान चलाना होगा।

शिक्षा के विषय पर मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार गुणवत्तापूर्ण शिक्षा उपलब्ध कराने के लिए निरंतर कार्य कर रही है। उन्होंने प्रधानमंत्री के प्रति आपत्तिजनक टिप्पणी की निंदा करते हुए कहा कि ऐसे कृत्यों से बचने के लिए संस्कारयुक्त एवं गुणवत्तापूर्ण शिक्षा अत्यंत आवश्यक है। उन्होंने प्रधानमंत्री द्वारा बच्चों से संवाद स्थापित करने के प्रयासों वह उन्हें क्षमा करने की भी सराहना की।

मुख्यमंत्री ने कहा कि आज का यह संवाद केवल औपचारिक कार्यक्रम नहीं, बल्कि सरकार और थारू समाज के बीच विश्वास एवं विकास की साझेदारी को मजबूत करने का माध्यम है। उन्होंने कहा कि उनका थारू समाज से जुड़ाव आज का नहीं, बल्कि वर्षों पुराना है और खटीमा से उनका आत्मीय संबंध हमेशा बना रहेगा। उन्होंने कहा कि वे यहां समाज की समस्याएं, सुझाव और अपेक्षाएं सुनने आए हैं ताकि योजनाओं को और अधिक प्रभावी ढंग से लागू किया जा सके।

मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री के नेतृत्व में आजादी के बाद पहली बार जनजातीय समाज के सशक्तिकरण के लिए अभूतपूर्व कार्य हुए हैं। उन्होंने कहा कि देश की राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु का जनजातीय समाज से होना इस सोच का सबसे बड़ा उदाहरण है।

माननीय मुख्यमंत्री ने कहा कि आज एक बार फिर आप सभी के बीच आकर अपने परिवार से मिलने जैसा सुखद अनुभव हो रहा है। उन्होंने कहा कि हमारी डबल इंजन की सरकार आदरणीय प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी जी के सशक्त नेतृत्व में जनजातीय समाज के सर्वांगीण विकास के लिए निरंतर प्रतिबद्धता के साथ कार्य कर रही है। हमारा प्रयास है कि जनजातीय समुदाय को शिक्षा, स्वास्थ्य, रोजगार और आधारभूत सुविधाओं से जोड़कर उन्हें सशक्त और आत्मनिर्भर बनाया जाए। उन्होंने कहा कि इसी दिशा में कार्य करते हुए जहां एक ओर अटल आवास योजना में हमने आय सीमा को व्यावहारिक बनाया है, वहीं घर निर्माण की लागत में भी बढ़ोतरी की है, ताकि अधिक से अधिक परिवारों को इसका लाभ मिल सके। उन्होंने कहा कि हमारी सरकार ने उधम सिंह नगर में ही इस योजना के तहत लगभग 3 करोड़ रुपये से अधिक की सहायता प्रदान की है। प्रधानमंत्री आवास योजना (ग्रामीण) में भी बड़ी संख्या में जनजातीय परिवारों को लाभ मिला है। उन्होंने कहा कि इस योजना के अंतर्गत घर पाने के लिए इस वर्ष जो आवेदन आए हैं, उनमें लगभग 28 प्रतिशत आवेदन जनजातीय परिवारों के हैं।

माननीय मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री जनमन आवास योजना के तहत इस जनपद में पहले चरण में 824 और दूसरे चरण में 101 घरों का निर्माण किया गया है। शिक्षा के क्षेत्र में भी हमारी सरकार जनजातीय समाज को सशक्त बनाने के लिए लगातार काम कर रही है। उन्होंने कहा कि जनजाति कल्याण विभाग के माध्यम से आश्रम पद्धति विद्यालयों, छात्रावासों और आईटीआई संस्थानों के विकास के लिए करोड़ों रुपये की धनराशि दी गई है, जिससे बच्चों को और बेहतर सुविधाएं मिल सकें। उन्होंने कहा कि इन आश्रम पद्धति विद्यालयों को कक्षा 12 तक अपग्रेड करने का काम भी किया जा रहा है। इसके अलावा एकलव्य मॉडल आवासीय विद्यालयों के माध्यम से भी जनजातीय बच्चों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा प्रदान की जा रही है। उन्होंने कहा कि हमने खटीमा में बालिका छात्रावास के लिए 4 करोड़ रुपये स्वीकृत किए हैं, जबकि बाजपुर में 16 करोड़ रुपये से अधिक की लागत से विद्यालय और छात्रावास का निर्माण किया जा रहा है।

माननीय मुख्यमंत्री ने कहा कि गदरपुर में 100 बेड का बालक छात्रावास भी बनाया जा रहा है। वहीं, थारू राजकीय इंटर कॉलेज में 2 करोड़ रुपये से अधिक की लागत से खेल मैदान का सौंदर्गीकरण, ऑडिटोरियम का आधुनिकीकरण और भवन की मरम्मत का कार्य भी किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि हमारी सरकार जनजातीय समाज की माताओं और बहनों को आत्मनिर्भर बनाने के लिए भी पूरी प्रतिबद्धता के साथ कार्य कर रही है। आज राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन के माध्यम से उन्हें रोजगार, प्रशिक्षण और आत्मनिर्भरता के अवसर प्रदान किए जा रहे हैं। साथ ही वन धन केंद्रों के माध्यम से तैयार उत्पादों को बाजार से जोड़कर उनकी आय बढ़ाने का कार्य भी किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि हम जनजातीय समाज की महिलाओं को 1 करोड़ रुपये से अधिक की चक्रीय निधि और 8 करोड़ रुपये से अधिक की निवेश सहायता देकर उनके छोटे-छोटे रोजगारों को आगे बढ़ाने का प्रयास कर रहे हैं। 

माननीय मुख्यमंत्री ने संतोष व्यक्त करते हुए कहा कि मुख्यमंत्री सीमांत क्षेत्र विकास कार्यक्रम के तहत वर्ष 2020 से 2025 तक 10 करोड़ रुपये से अधिक की विभिन्न योजनाएं सफलतापूर्वक पूरी की गई हैं। इसके अलावा हजारों परिवारों को पेयजल, बिजली और गैस कनेक्शन उपलब्ध कराए गए हैं। उन्होंने कहा कि आज जहां एक ओर विधानसभा सितारगंज में थारू विकास भवन का निर्माण किया जा रहा है। वहीं समाज कल्याण विभाग के अंतर्गत जनजातीय क्षेत्रों में अवस्थापना सुविधाओं के लिए 2 करोड़ रुपये से अधिक की धनराशि स्वीकृत की गई है। साथ ही हमारी सरकार जनजातीय परिवारों को बेटी की शादी के लिए 50 हजार रुपये तक की आर्थिक सहायता भी प्रदान की जा रही है। उन्होंने कहा कि हमने उधम सिंह नगर, देहरादून, पिथौरागढ़ और चमोली में जनजातीय क्षेत्रों के विकास को और गति देने के लिए अलग-अलग जनजाति कल्याण अधिकारियों की नियुक्ति भी की है। उन्होंने कहा कि हम केवल योजनाओं की घोषणा नहीं करते, बल्कि उन्हें धरातल पर उतारकर वास्तविक बदलाव लाने का कार्य भी करते हैं।

माननीय मुख्यमंत्री ने कहा कि वर्ष 2014 के बाद आदरणीय प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी जी ने जनजातीय समाज के गौरव को राष्ट्रीय पहचान दिलाने का ऐतिहासिक कार्य प्रारंभ किया। भगवान बिरसा मुंडा जी की जयंती को "जनजातीय गौरव दिवस" के रूप में मनाने का निर्णय लेकर उन्होंने पूरे देश को जनजातीय समाज के साहस, संघर्ष और बलिदान से परिचित कराया। उन्होंने कहा कि हमारी डबल इंजन सरकार का संकल्प है कि थारू समाज का प्रत्येक परिवार विकास की मुख्यधारा से जुड़े, प्रत्येक युवा आत्मनिर्भर बने और प्रत्येक बेटी शिक्षित और सशक्त बने। उन्होंने कहा कि थारू समाज कि हर समस्या, हर सुझाव और हर अपेक्षा हमारी सरकार की प्राथमिकता है। हम थारू समाज के सर्वांगीण विकास के लिए पूरी निष्ठा और प्रतिबद्धता के साथ इसी प्रकार कार्य करते रहेंगे।

इस अवसर पर ब्लॉक प्रमुख सरिता राणा, अध्यक्ष थारू राणा परिषद दान सिंह राणा, सांसद प्रतिनिधि रविंद्र राणा, वरिष्ठ समाजसेवी रमेश राणा, ग्राम प्रधान संघ अध्यक्ष मंजीत सिंह राणा, सभासद दौलत राणा, ग्राम प्रधान शोभा देवी, जिला पंचायत सदस्य मनोज राणा, क्षेत्र पंचायत सदस्य कमलदीप राणा, ग्राम प्रधान मनोज राणा, अध्यक्ष बार ऐशोशिएशन प्रकाश सिंह राणा रमेश सिंह राणा हरीश राणा, आकाश राणा, मंजीत सिंह राणा, गोपाल सिंह राणा, नगर पालिका अध्यक्ष रमेश चंद्र जोशी, दर्जा मंत्री अनिल डब्बू, गंभीर सिंह धामी, किशन सिंह किन्ना, रंदीप पोखरिया, भवानी भण्डारी, जिलाधिकारी नितिन सिंह भदौरिया, वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक अजय गणपति, उपाध्यक्ष जिला विकास प्राधिकरण जय किशन, मुख्य विकास अधिकारी दिवेश शाशनी, एडीएम कौशतुभ मिश्र सहित जनप्रतिनिधि एवं थारू समाज के जनता उपस्थित थी।