अररिया का सम्राट अशोक भवन बना नगर परिषद का गैरेज:लाखों की लागत से बना जनसुविधा केंद्र अब वाहनों का अड्डा
अररिया नगर परिषद द्वारा वर्ष 2019 में लाखों रुपये की लागत से निर्मित सम्राट अशोक भवन अपने मूल उद्देश्य से भटक गया है। नगरवासियों को जनसुविधा उपलब्ध कराने, विवाह, सामाजिक कार्यक्रमों और सामुदायिक आयोजनों के लिए तैयार किया गया। यह भवन वर्तमान में नगर परिषद के वाहनों और सामानों के भंडारण स्थल के रूप में उपयोग किया जा रहा है। इस स्थिति को लेकर शहर में चर्चा है और स्थानीय लोग नगर परिषद की कार्यशैली पर सवाल उठा रहे हैं। स्थानीय लोगों का आरोप है कि सम्राट अशोक भवन को विवाह भवन और बहुउद्देशीय सामुदायिक केंद्र के रूप में विकसित किया गया था। इसका उद्देश्य था कि आम लोग कम खर्च में इसे किराये पर लेकर शादी-विवाह, पार्टी, सेमिनार, बैठक, जागरूकता शिविर और अन्य सामाजिक कार्यक्रम आयोजित कर सकें। हालांकि, वर्तमान में भवन में नगर परिषद के शव वाहन, चलंत शौचालय, कचरा उठाने वाले वाहन और अन्य विभागीय सामान रखे हुए हैं, जिससे इसका मूल स्वरूप और उद्देश्य प्रभावित हो रहा है। सक्रिय सामाजिक कार्यकर्ता नंद मोहन मिश्रा ने बताया कि सम्राट अशोक भवन का निर्माण एक दूरदर्शी सोच के तहत किया गया था। उन्होंने कहा कि भवन के समीप विश्व प्रसिद्ध मां खरगेश्वरी मंदिर और सार्वजनिक ठाकुरवाड़ी स्थित है। जहां जिले के विभिन्न प्रखंडों के अलावा पूर्णिया, कटिहार, किशनगंज, सुपौल, सहरसा तथा पड़ोसी देश नेपाल से भी बड़ी संख्या में लोग विवाह समारोह के लिए पहुंचते हैं। ऐसे लोगों के ठहरने और अन्य आवश्यक सुविधाओं को ध्यान में रखते हुए इस भवन का निर्माण कराया गया था। मिश्रा का आरोप है कि भवन को अब "कबाड़खाना" बना दिया गया है, जिससे शादी-विवाह के लिए आने वाले लोगों को काफी परेशानी होती है। वर्ष 2019 में नगर परिषद के मुख्य पार्षद रहे रितेश राय ने जानकारी दी कि उनके कार्यकाल में सम्राट अशोक भवन का विधिवत उद्घाटन किया गया था। उन्होंने स्पष्ट किया कि भवन का निर्माण आम जनता को किफायती दर पर सुविधाएं उपलब्ध कराने के उद्देश्य से किया गया था। नगर परिषद की योजना थी कि न्यूनतम शुल्क लेकर शहरी क्षेत्र के लोगों को विवाह भवन और सामुदायिक केंद्र की सुविधा उपलब्ध कराई जाए। हालांकि वर्ष 2022 में आदर्श आचार संहिता लागू हो जाने के कारण भवन को पूरी तरह जनता को समर्पित नहीं किया जा सका। रितेश राय ने कहा कि इसके बाद बने नगर परिषद बोर्ड को इस भवन को आम लोगों के उपयोग के लिए खोल देना चाहिए था, ताकि नगरवासी न्यूनतम शुल्क देकर इसका लाभ उठा सकें। लेकिन अब तक ऐसा नहीं हो सका है। उन्होंने सवाल उठाते हुए कहा कि आखिर किन कारणों से लाखों रुपये की लागत से बने इस भवन को जनता के लिए समर्पित नहीं किया गया।
सम्राट अशोक भवन की वर्तमान स्थिति को लेकर स्थानीय लोगों में नाराजगी है। लोगों का मानना है कि यदि भवन को उसके मूल उद्देश्य के अनुरूप संचालित किया जाए तो यह न केवल नगरवासियों के लिए उपयोगी साबित होगा, बल्कि नगर परिषद के लिए राजस्व का भी एक महत्वपूर्ण स्रोत बन सकता है। अब देखना यह होगा कि नगर परिषद इस मुद्दे पर क्या कदम उठाती है और कब तक यह भवन वास्तव में जनता के उपयोग में लाया जाता है।
अररिया नगर परिषद द्वारा वर्ष 2019 में लाखों रुपये की लागत से निर्मित सम्राट अशोक भवन अपने मूल उद्देश्य से भटक गया है। नगरवासियों को जनसुविधा उपलब्ध कराने, विवाह, सामाजिक कार्यक्रमों और सामुदायिक आयोजनों के लिए तैयार किया गया। यह भवन वर्तमान में नगर परिषद के वाहनों और सामानों के भंडारण स्थल के रूप में उपयोग किया जा रहा है। इस स्थिति को लेकर शहर में चर्चा है और स्थानीय लोग नगर परिषद की कार्यशैली पर सवाल उठा रहे हैं। स्थानीय लोगों का आरोप है कि सम्राट अशोक भवन को विवाह भवन और बहुउद्देशीय सामुदायिक केंद्र के रूप में विकसित किया गया था। इसका उद्देश्य था कि आम लोग कम खर्च में इसे किराये पर लेकर शादी-विवाह, पार्टी, सेमिनार, बैठक, जागरूकता शिविर और अन्य सामाजिक कार्यक्रम आयोजित कर सकें। हालांकि, वर्तमान में भवन में नगर परिषद के शव वाहन, चलंत शौचालय, कचरा उठाने वाले वाहन और अन्य विभागीय सामान रखे हुए हैं, जिससे इसका मूल स्वरूप और उद्देश्य प्रभावित हो रहा है। सक्रिय सामाजिक कार्यकर्ता नंद मोहन मिश्रा ने बताया कि सम्राट अशोक भवन का निर्माण एक दूरदर्शी सोच के तहत किया गया था। उन्होंने कहा कि भवन के समीप विश्व प्रसिद्ध मां खरगेश्वरी मंदिर और सार्वजनिक ठाकुरवाड़ी स्थित है। जहां जिले के विभिन्न प्रखंडों के अलावा पूर्णिया, कटिहार, किशनगंज, सुपौल, सहरसा तथा पड़ोसी देश नेपाल से भी बड़ी संख्या में लोग विवाह समारोह के लिए पहुंचते हैं। ऐसे लोगों के ठहरने और अन्य आवश्यक सुविधाओं को ध्यान में रखते हुए इस भवन का निर्माण कराया गया था। मिश्रा का आरोप है कि भवन को अब "कबाड़खाना" बना दिया गया है, जिससे शादी-विवाह के लिए आने वाले लोगों को काफी परेशानी होती है। वर्ष 2019 में नगर परिषद के मुख्य पार्षद रहे रितेश राय ने जानकारी दी कि उनके कार्यकाल में सम्राट अशोक भवन का विधिवत उद्घाटन किया गया था। उन्होंने स्पष्ट किया कि भवन का निर्माण आम जनता को किफायती दर पर सुविधाएं उपलब्ध कराने के उद्देश्य से किया गया था। नगर परिषद की योजना थी कि न्यूनतम शुल्क लेकर शहरी क्षेत्र के लोगों को विवाह भवन और सामुदायिक केंद्र की सुविधा उपलब्ध कराई जाए। हालांकि वर्ष 2022 में आदर्श आचार संहिता लागू हो जाने के कारण भवन को पूरी तरह जनता को समर्पित नहीं किया जा सका। रितेश राय ने कहा कि इसके बाद बने नगर परिषद बोर्ड को इस भवन को आम लोगों के उपयोग के लिए खोल देना चाहिए था, ताकि नगरवासी न्यूनतम शुल्क देकर इसका लाभ उठा सकें। लेकिन अब तक ऐसा नहीं हो सका है। उन्होंने सवाल उठाते हुए कहा कि आखिर किन कारणों से लाखों रुपये की लागत से बने इस भवन को जनता के लिए समर्पित नहीं किया गया।
सम्राट अशोक भवन की वर्तमान स्थिति को लेकर स्थानीय लोगों में नाराजगी है। लोगों का मानना है कि यदि भवन को उसके मूल उद्देश्य के अनुरूप संचालित किया जाए तो यह न केवल नगरवासियों के लिए उपयोगी साबित होगा, बल्कि नगर परिषद के लिए राजस्व का भी एक महत्वपूर्ण स्रोत बन सकता है। अब देखना यह होगा कि नगर परिषद इस मुद्दे पर क्या कदम उठाती है और कब तक यह भवन वास्तव में जनता के उपयोग में लाया जाता है।