अटल यूनिवर्सिटी में वेतन में गड़बड़ी के मामले ने पकड़ा:शासन ने लेटर भेजकर मांगा अपडेट, अब शुरू हुई जांच
लखनऊ के अटल बिहारी बाजपेयी मेडिकल यूनिवर्सिटी में डॉक्टरों के वेतन निर्धारण में गड़बड़ियों के गंभीर आरोप लगे हैं। अटल मेडिकल यूनिवर्सिटी में प्रतिनियुक्ति पर तैनात डॉक्टरों को उनके मूल मेडिकल संस्थान की तुलना में लगभग दोगुना वेतन दिए जाने का मामला अब तूल पकड़ता जा रहा है। शासन ने यूनिवर्सिटी प्रशासन को दोबारा पत्र भेजकर जल्द रिपोर्ट तलब की है। जिन डॉक्टरों को उनके मूल संस्थानों में करीब 2.5 लाख प्रतिमाह वेतन मिल रहा था। उन्हें अटल यूनिवर्सिटी में तैनाती के बाद 4.5 लाख तक भुगतान किया जा रहा है। जबकि यूनिवर्सिटी में मुख्य रूप से प्रवेश परीक्षा, परिणाम और संबद्धता जैसे प्रशासनिक काम ही होते हैं। इसके बावजूद डॉक्टरों को सुपर स्पेशियलिटी स्तर का वेतन दिया जा रहा है। मामले को लेकर समाजसेवी राज मोहन सक्सेना ने मुख्यमंत्री और डिप्टी सीएम ब्रजेश पाठक को पत्र लिखकर शिकायत दर्ज कराई थी। शिकायत में यह भी आरोप लगाया गया है कि अन्य मेडिकल संस्थानों से आए डॉक्टरों को अलग-अलग विभागों में डीन जैसे अहम पदों पर बैठाकर अनियमित वेतन दिया जा रह है। इतना ही नहीं, परीक्षा और परिणाम सफलतापूर्वक घोषित करने के नाम पर दो से पांच लाख तक की अतिरिक्त प्रोत्साहन राशि भी दी जा रही है। शासन ने सात जनवरी को जांच के आदेश दिए थे। लेकिन दो महीने से अधिक समय बीतने के बावजूद रिपोर्ट सामने नहीं आई। शासन ने दोबारा भेजा लेटर अब शासन ने सख्त रुख अपनाते हुए सात अप्रैल को संयुक्त सचिव चन्द्रशेखर मिश्र ने यूनिवर्सिटी प्रशासन से तत्काल प्रगति रिपोर्ट तलब की है। शासन का पत्र पहुंचते ही यूनिवर्सिटी में हड़कंप मच गया है। लंबे समय से दबाई गई फाइलें अब तेजी से खंगाली जा रही हैं। जल्द शासन को भेजी जाएगी रिपोर्ट प्रकरण में कुलपति डॉ. अमित देवगन का कहना है कि डीन समेत सभी पदों पर तैनात डॉक्टरों के वेतन संबंधी मामलों की समीक्षा की जा रही है। कुलसचिव जल्द ही रिपोर्ट तैयार कर शासन को अवगत कराएंगे। जल्द ही पूरी रिपोर्ट शासन को सौंप दी जाएगी। प्रदेश के मेडिकल, डेंटल, पैरामेडिकल और नर्सिंग कॉलेजों को संबद्धता प्रदान करने के लिए अटल बिहारी वाजपेई मेडिकल यूनिवर्सिटी की स्थापना की गई। अभी तक 279 नर्सिंग, 65 मेडिकल कॉलेज, 16 डेंटल और 47 पैरामेडिकल कॉलेज संबद्ध हैं।
लखनऊ के अटल बिहारी बाजपेयी मेडिकल यूनिवर्सिटी में डॉक्टरों के वेतन निर्धारण में गड़बड़ियों के गंभीर आरोप लगे हैं। अटल मेडिकल यूनिवर्सिटी में प्रतिनियुक्ति पर तैनात डॉक्टरों को उनके मूल मेडिकल संस्थान की तुलना में लगभग दोगुना वेतन दिए जाने का मामला अब तूल पकड़ता जा रहा है। शासन ने यूनिवर्सिटी प्रशासन को दोबारा पत्र भेजकर जल्द रिपोर्ट तलब की है। जिन डॉक्टरों को उनके मूल संस्थानों में करीब 2.5 लाख प्रतिमाह वेतन मिल रहा था। उन्हें अटल यूनिवर्सिटी में तैनाती के बाद 4.5 लाख तक भुगतान किया जा रहा है। जबकि यूनिवर्सिटी में मुख्य रूप से प्रवेश परीक्षा, परिणाम और संबद्धता जैसे प्रशासनिक काम ही होते हैं। इसके बावजूद डॉक्टरों को सुपर स्पेशियलिटी स्तर का वेतन दिया जा रहा है। मामले को लेकर समाजसेवी राज मोहन सक्सेना ने मुख्यमंत्री और डिप्टी सीएम ब्रजेश पाठक को पत्र लिखकर शिकायत दर्ज कराई थी। शिकायत में यह भी आरोप लगाया गया है कि अन्य मेडिकल संस्थानों से आए डॉक्टरों को अलग-अलग विभागों में डीन जैसे अहम पदों पर बैठाकर अनियमित वेतन दिया जा रह है। इतना ही नहीं, परीक्षा और परिणाम सफलतापूर्वक घोषित करने के नाम पर दो से पांच लाख तक की अतिरिक्त प्रोत्साहन राशि भी दी जा रही है। शासन ने सात जनवरी को जांच के आदेश दिए थे। लेकिन दो महीने से अधिक समय बीतने के बावजूद रिपोर्ट सामने नहीं आई। शासन ने दोबारा भेजा लेटर अब शासन ने सख्त रुख अपनाते हुए सात अप्रैल को संयुक्त सचिव चन्द्रशेखर मिश्र ने यूनिवर्सिटी प्रशासन से तत्काल प्रगति रिपोर्ट तलब की है। शासन का पत्र पहुंचते ही यूनिवर्सिटी में हड़कंप मच गया है। लंबे समय से दबाई गई फाइलें अब तेजी से खंगाली जा रही हैं। जल्द शासन को भेजी जाएगी रिपोर्ट प्रकरण में कुलपति डॉ. अमित देवगन का कहना है कि डीन समेत सभी पदों पर तैनात डॉक्टरों के वेतन संबंधी मामलों की समीक्षा की जा रही है। कुलसचिव जल्द ही रिपोर्ट तैयार कर शासन को अवगत कराएंगे। जल्द ही पूरी रिपोर्ट शासन को सौंप दी जाएगी। प्रदेश के मेडिकल, डेंटल, पैरामेडिकल और नर्सिंग कॉलेजों को संबद्धता प्रदान करने के लिए अटल बिहारी वाजपेई मेडिकल यूनिवर्सिटी की स्थापना की गई। अभी तक 279 नर्सिंग, 65 मेडिकल कॉलेज, 16 डेंटल और 47 पैरामेडिकल कॉलेज संबद्ध हैं।