Tata Sons के लिए बढ़ी चुनौती: TCS से मिलने वाला Dividend घटा, Air India और नए Business का Loss दोगुना हुआ

टाटा समूह की प्रमुख कंपनी टाटा संस के लिए वित्त वर्ष 2025-26 कई मायनों में महत्वपूर्ण रहा है। एक ओर कंपनी का अपना लाभ बढ़ा है और उसकी वित्तीय स्थिति मजबूत बनी हुई है, वहीं दूसरी ओर समूह की सबसे बड़ी आय के स्रोतों में शामिल टाटा कंसल्टेंसी सर्विसेज से मिलने वाले लाभांश में गिरावट और नए कारोबारों में बढ़ते घाटे ने भविष्य की चुनौतियों की ओर संकेत किया है।मौजूद जानकारी के अनुसार वित्त वर्ष 2025-26 में टाटा संस को टाटा कंसल्टेंसी सर्विसेज से 28,291 करोड़ रुपये का लाभांश मिला है। यह पिछले वित्त वर्ष के 32,184 करोड़ रुपये की तुलना में लगभग 12 प्रतिशत कम है। गौरतलब है कि महामारी से प्रभावित वित्त वर्ष 2020-21 के बाद यह सबसे बड़ी वार्षिक गिरावट मानी जा रही है। लगातार कई वर्षों तक टाटा कंसल्टेंसी सर्विसेज से मिलने वाला लाभांश और शेयर पुनर्खरीद टाटा संस की नकदी का सबसे महत्वपूर्ण सोर्स   रहा है।बता दें कि वित्त वर्ष 2025-26 और 2024-25, दोनों वर्षों में टाटा कंसल्टेंसी सर्विसेज ने शेयर पुनर्खरीद की कोई योजना लागू नहीं की थी। यही वजह है कि कंपनी की ओर से मिलने वाली कुल नकद राशि में भी कमी देखने को मिली है। वित्त वर्ष 2020 से 2026 के बीच टाटा संस को टाटा कंसल्टेंसी सर्विसेज से लाभांश और शेयर पुनर्खरीद के माध्यम से कुल 1.81 लाख करोड़ रुपये प्राप्त हुए हैं, लेकिन इस अवधि में वृद्धि की रफ्तार सीमित रही है।विशेषज्ञों का मानना है कि सूचना प्रौद्योगिकी क्षेत्र इस समय बदलाव के दौर से गुजर रहा है। दुनिया भर में कंपनियां कृत्रिम बुद्धिमत्ता आधारित तकनीकों को तेजी से अपना रही हैं, जिसके कारण पारंपरिक तकनीकी सेवाओं पर होने वाला खर्च नए सिरे से तय किया जा रहा है। इसका असर टाटा कंसल्टेंसी सर्विसेज के कारोबार पर भी दिखाई दिया है। कंपनी का राजस्व बढ़कर 2.67 लाख करोड़ रुपये पहुंचा, लेकिन शुद्ध लाभ में केवल 1.34 प्रतिशत की बढ़ोतरी होकर यह 49,454 करोड़ रुपये रहा है।दूसरी ओर टाटा संस के नए कारोबारों का वित्तीय बोझ लगातार बढ़ा है। एयर इंडिया, टाटा डिजिटल और टाटा इलेक्ट्रॉनिक्स का संयुक्त घाटा वित्त वर्ष 2025-26 में बढ़कर 28,823 करोड़ रुपये पहुंच गया है। पिछले वर्ष यह घाटा 15,539 करोड़ रुपये था। इनमें सबसे अधिक नुकसान एयर इंडिया को हुआ, जिसका घाटा बढ़कर 22,238 करोड़ रुपये हो गया है। वहीं टाटा डिजिटल का घाटा 4,974 करोड़ रुपये और टाटा इलेक्ट्रॉनिक्स का घाटा बढ़कर 1,611 करोड़ रुपये दर्ज किया गया है। हालांकि टाटा इलेक्ट्रॉनिक्स का राजस्व लगभग दोगुना हुआ है और कंपनी परिचालन स्तर पर संतुलन हासिल करने में सफल रही है।इन चुनौतियों के बावजूद टाटा संस की अपनी वित्तीय स्थिति मजबूत बनी हुई है। कंपनी का स्वतंत्र शुद्ध लाभ 22 प्रतिशत बढ़कर 31,961 करोड़ रुपये पहुंच गया है। वित्त वर्ष के अंत तक कंपनी पर कोई उधारी नहीं थी और उसके पास 21,841 करोड़ रुपये की नकदी तथा नकदी समकक्ष उपलब्ध थे। इसके अलावा निवेशों की बिक्री से 6,531 करोड़ रुपये का लाभ भी कंपनी को प्राप्त हुआ है।गौरतलब है कि टाटा कंसल्टेंसी सर्विसेज से मिलने वाली कम राशि के कारण टाटा संस की कुल लाभांश आय भी 10 प्रतिशत घटकर 32,528 करोड़ रुपये रह गई, जबकि पिछले वर्ष यह 36,149 करोड़ रुपये थी। वित्त वर्ष 2025-26 में टाटा संस की कुल लाभांश आय में टाटा कंसल्टेंसी सर्विसेज की हिस्सेदारी लगभग 87 प्रतिशत रही है। ऐसे में यदि आने वाले समय में इस आय में लगातार कमी आती है और नए कारोबारों में निवेश की जरूरत बनी रहती है, तो टाटा संस के सामने पूंजी प्रबंधन और निवेश संतुलन बनाए रखना एक महत्वपूर्ण चुनौती साबित हो सकती है।

Jul 28, 2026 - 22:53
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Tata Sons के लिए बढ़ी चुनौती: TCS से मिलने वाला Dividend घटा, Air India और नए Business का Loss दोगुना हुआ
टाटा समूह की प्रमुख कंपनी टाटा संस के लिए वित्त वर्ष 2025-26 कई मायनों में महत्वपूर्ण रहा है। एक ओर कंपनी का अपना लाभ बढ़ा है और उसकी वित्तीय स्थिति मजबूत बनी हुई है, वहीं दूसरी ओर समूह की सबसे बड़ी आय के स्रोतों में शामिल टाटा कंसल्टेंसी सर्विसेज से मिलने वाले लाभांश में गिरावट और नए कारोबारों में बढ़ते घाटे ने भविष्य की चुनौतियों की ओर संकेत किया है।

मौजूद जानकारी के अनुसार वित्त वर्ष 2025-26 में टाटा संस को टाटा कंसल्टेंसी सर्विसेज से 28,291 करोड़ रुपये का लाभांश मिला है। यह पिछले वित्त वर्ष के 32,184 करोड़ रुपये की तुलना में लगभग 12 प्रतिशत कम है। गौरतलब है कि महामारी से प्रभावित वित्त वर्ष 2020-21 के बाद यह सबसे बड़ी वार्षिक गिरावट मानी जा रही है। लगातार कई वर्षों तक टाटा कंसल्टेंसी सर्विसेज से मिलने वाला लाभांश और शेयर पुनर्खरीद टाटा संस की नकदी का सबसे महत्वपूर्ण सोर्स   रहा है।

बता दें कि वित्त वर्ष 2025-26 और 2024-25, दोनों वर्षों में टाटा कंसल्टेंसी सर्विसेज ने शेयर पुनर्खरीद की कोई योजना लागू नहीं की थी। यही वजह है कि कंपनी की ओर से मिलने वाली कुल नकद राशि में भी कमी देखने को मिली है। वित्त वर्ष 2020 से 2026 के बीच टाटा संस को टाटा कंसल्टेंसी सर्विसेज से लाभांश और शेयर पुनर्खरीद के माध्यम से कुल 1.81 लाख करोड़ रुपये प्राप्त हुए हैं, लेकिन इस अवधि में वृद्धि की रफ्तार सीमित रही है।

विशेषज्ञों का मानना है कि सूचना प्रौद्योगिकी क्षेत्र इस समय बदलाव के दौर से गुजर रहा है। दुनिया भर में कंपनियां कृत्रिम बुद्धिमत्ता आधारित तकनीकों को तेजी से अपना रही हैं, जिसके कारण पारंपरिक तकनीकी सेवाओं पर होने वाला खर्च नए सिरे से तय किया जा रहा है। इसका असर टाटा कंसल्टेंसी सर्विसेज के कारोबार पर भी दिखाई दिया है। कंपनी का राजस्व बढ़कर 2.67 लाख करोड़ रुपये पहुंचा, लेकिन शुद्ध लाभ में केवल 1.34 प्रतिशत की बढ़ोतरी होकर यह 49,454 करोड़ रुपये रहा है।

दूसरी ओर टाटा संस के नए कारोबारों का वित्तीय बोझ लगातार बढ़ा है। एयर इंडिया, टाटा डिजिटल और टाटा इलेक्ट्रॉनिक्स का संयुक्त घाटा वित्त वर्ष 2025-26 में बढ़कर 28,823 करोड़ रुपये पहुंच गया है। पिछले वर्ष यह घाटा 15,539 करोड़ रुपये था। इनमें सबसे अधिक नुकसान एयर इंडिया को हुआ, जिसका घाटा बढ़कर 22,238 करोड़ रुपये हो गया है। वहीं टाटा डिजिटल का घाटा 4,974 करोड़ रुपये और टाटा इलेक्ट्रॉनिक्स का घाटा बढ़कर 1,611 करोड़ रुपये दर्ज किया गया है। हालांकि टाटा इलेक्ट्रॉनिक्स का राजस्व लगभग दोगुना हुआ है और कंपनी परिचालन स्तर पर संतुलन हासिल करने में सफल रही है।

इन चुनौतियों के बावजूद टाटा संस की अपनी वित्तीय स्थिति मजबूत बनी हुई है। कंपनी का स्वतंत्र शुद्ध लाभ 22 प्रतिशत बढ़कर 31,961 करोड़ रुपये पहुंच गया है। वित्त वर्ष के अंत तक कंपनी पर कोई उधारी नहीं थी और उसके पास 21,841 करोड़ रुपये की नकदी तथा नकदी समकक्ष उपलब्ध थे। इसके अलावा निवेशों की बिक्री से 6,531 करोड़ रुपये का लाभ भी कंपनी को प्राप्त हुआ है।

गौरतलब है कि टाटा कंसल्टेंसी सर्विसेज से मिलने वाली कम राशि के कारण टाटा संस की कुल लाभांश आय भी 10 प्रतिशत घटकर 32,528 करोड़ रुपये रह गई, जबकि पिछले वर्ष यह 36,149 करोड़ रुपये थी। वित्त वर्ष 2025-26 में टाटा संस की कुल लाभांश आय में टाटा कंसल्टेंसी सर्विसेज की हिस्सेदारी लगभग 87 प्रतिशत रही है। ऐसे में यदि आने वाले समय में इस आय में लगातार कमी आती है और नए कारोबारों में निवेश की जरूरत बनी रहती है, तो टाटा संस के सामने पूंजी प्रबंधन और निवेश संतुलन बनाए रखना एक महत्वपूर्ण चुनौती साबित हो सकती है।