Strait of Hormuz खुलने पर भी तुरंत नहीं घटेंगी तेल की कीमतें, क्या हैं चुनौतियां, दुनिया पर क्या पड़ेगा असर

अमेरिका और इजराइल द्वारा 28 फरवरी को ईरान पर हमले के बाद क्षेत्र में युद्ध जैसे हालात बन गए थे। इसके बाद अंतरराष्ट्रीय बाजार में तेल की कीमतों में तेज उछाल देखने को मिला। वेस्ट टेक्सास इंटरमीडिएट (WTI) कच्चे तेल की कीमत युद्ध से पहले 67 डॉलर प्रति ...

May 31, 2026 - 16:51
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Strait of Hormuz खुलने पर भी तुरंत नहीं घटेंगी तेल की कीमतें, क्या हैं चुनौतियां, दुनिया पर क्या पड़ेगा असर

अमेरिका और इजराइल द्वारा 28 फरवरी को ईरान पर हमले के बाद क्षेत्र में युद्ध जैसे हालात बन गए थे। इसके बाद अंतरराष्ट्रीय बाजार में तेल की कीमतों में तेज उछाल देखने को मिला। वेस्ट टेक्सास इंटरमीडिएट (WTI) कच्चे तेल की कीमत युद्ध से पहले 67 डॉलर प्रति बैरल थी, जो संघर्ष बढ़ने के बाद 110 डॉलर तक पहुंच गई।  एक्सपर्ट्‍स का कहना है कि युद्ध से पहले वाले स्तर पर लौटने में काफी समय लग सकता है।

 

तेल बाजार के सामने पांच बड़ी चुनौतियां

विशेषज्ञों के मुताबिक, यदि अमेरिका और ईरान 60 दिन के युद्धविराम के दौरान होर्मुज जलडमरूमध्य को खोल भी देते हैं, तब भी तेल आपूर्ति तुरंत सामान्य नहीं हो पाएगी। इसके पीछे 5  प्रमुख कारण बताए जा रहे हैं।

 

1. फंसे हुए जहाजों को निकालना आसान नहीं

होर्मुज जलडमरूमध्य में 1500 से अधिक तेल टैंकर फंसे हुए हैं। ऐसे में मार्ग खुलने के बाद भी इन जहाजों की आवाजाही सामान्य होने में समय लगेगा। आशंका है कि ईरान की रिवोल्यूशनरी गार्ड विभिन्न प्रक्रियाओं के जरिए जहाजों की जांच और अनुमति में देरी कर सकती है।

 

2. ऊर्जा ढांचे को भारी नुकसान

 

युद्ध के दौरान मध्य पूर्व के कई ऊर्जा प्रतिष्ठानों और तेल सुविधाओं को नुकसान पहुंचा है। विशेषज्ञों का कहना है कि इनकी मरम्मत और सप्लाई चेन को पहले जैसा करने में अगले साल तक का समय लग सकता है। कुछ रिपोर्टों में तो पूरी तरह सामान्य स्थिति लौटने में कई वर्षों की आशंका जताई गई है।

 

3. समुद्री मार्ग में नए खतरे

 

अमेरिकी अधिकारियों का दावा है कि ईरान समर्थित बल समुद्री मार्गों में नए माइंस (बारूदी सुरंगें) बिछा सकते हैं। इससे तेल टैंकरों की सुरक्षा को लेकर खतरा बना रहेगा और जहाजों की आवाजाही प्रभावित हो सकती है।

 

4. ईरान को लेकर अनिश्चितता

तेल निवेशकों को डर है कि ईरान किसी भी समय अपना रुख बदलकर दोबारा होर्मुज जलडमरूमध्य को बंद कर सकता है या जहाजों से अतिरिक्त शुल्क मांग सकता है। यही अनिश्चितता तेल कीमतों को ऊंचा बनाए रखने का एक बड़ा कारण है।

 

5. जलडमरूमध्य खुलने पर भी भरोसा नहीं

 

विशेषज्ञों का मानना है कि भले ही युद्धविराम लागू हो जाए, लेकिन यह गारंटी नहीं है कि होर्मुज मार्ग लंबे समय तक खुला रहेगा। ऐसे में तेल बाजार में अस्थिरता बनी रह सकती है।

 

अमेरिका में बढ़ी महंगाई और ट्रंप पर दबाव

विशेषज्ञों के अनुसार अमेरिका में इस गर्मी पेट्रोल की कीमत 4.8 डॉलर प्रति गैलन तक पहुंच सकती है, जो युद्ध से पहले के मुकाबले करीब 50 प्रतिशत ज्यादा है। इससे महंगाई बढ़ रही है और नवंबर में होने वाले मिडटर्म चुनावों से पहले राष्ट्रपति ट्रंप की लोकप्रियता पर असर पड़ सकता है।

 

व्हाइट हाउस के आर्थिक सलाहकार केविन हैसेट ने कहा कि यदि अमेरिका-ईरान वार्ता सफल रहती है तो अगले 1-2 महीनों में वैश्विक रिफाइनरियों को पर्याप्त तेल मिलने लगेगा और ऊर्जा कीमतों में तेज गिरावट आ सकती है। हालांकि कई विशेषज्ञ इस दावे से सहमत नहीं हैं।

 

ट्रंप के सामने बड़ी दुविधा

राष्ट्रपति ट्रंप तेल कीमतों को नियंत्रित करने के लिए कई कदम उठा चुके हैं। इनमें रणनीतिक पेट्रोलियम भंडार जारी करना, विदेशी जहाजों को अमेरिकी जलक्षेत्र में तेल परिवहन की अनुमति देना और कुछ देशों पर लगे प्रतिबंधों में राहत शामिल है। लेकिन इन उपायों का सीमित असर देखने को मिला है। कुछ अमेरिकी सांसद अब घरेलू तेल निर्यात कम करने या रोकने की मांग कर रहे हैं। हालांकि विशेषज्ञों का कहना है कि इससे वैश्विक ऊर्जा बाजार में और बड़ा संकट पैदा हो सकता है। विशेषज्ञों के मुताबिक, फिलहाल तेल कीमतों को स्थिर करने का सबसे प्रभावी तरीका होर्मुज जलडमरूमध्य को पूरी तरह खोलना ही है।  Edited by : Sudhir Sharma