Israel Gaza Conflict | गाजा में फिर बरसी मौत! इजराइली गोलीबारी में 24 फलस्तीनियों की मौत, बच्चों और महिलाओं ने भी गंवाई जान
गाजा पट्टी में शांति की उम्मीदें एक बार फिर धूमिल होती नजर आ रही हैं। बुधवार को हुई इजराइली गोलीबारी में कम से कम 24 फलस्तीनी मारे गए हैं। अस्पताल प्रशासन द्वारा जारी आंकड़ों के अनुसार, मृतकों में दो मासूम बच्चे और महिलाएं भी शामिल हैं। यह घटनाक्रम 10 अक्टूबर से लागू युद्धविराम (Ceasefire) के बीच हुआ है, जिसका पिछले कुछ समय से लगातार उल्लंघन देखा जा रहा है।इसे भी पढ़ें: Al Falah University Chairman Arrest | दिल्ली विस्फोट के बाद बड़ी कार्रवाई! अल फलाह यूनिवर्सिटी के चेयरमैन जवाद अहमद सिद्दीकी गिरफ्तार अस्पताल के अधिकारियों ने बुधवार को यह जानकारी दी। वहीं, इजराइल का कहना है कि आतंकियों की तरफ से की गई गोलीबारी में उसका एक सैनिक गंभीर रूप से घायल हो गया, जिसके बाद उसने जवाबी कार्रवाई की। साथ ही इजराइल ने कहा कि उसकी कार्रवाई में तीन शीर्ष चरमपंथी और कुछ ऐसे लोग मारे गए जो उसकी सेना के लिए खतरा पैदा कर रहे थे।इसे भी पढ़ें: Bharat Taxi Officially Launching | कैब सर्विस सेक्टर में क्रांति! 'भारत टैक्सी' का भव्य आगाज़, ओला-उबर को मिलेगी कड़ी टक्कर घातक इजराइली हमलों ने 10 अक्टूबर से लागू युद्धविराम का बार बार उल्लंघन किया है। फलस्तीनी नागरिकों की बढ़ती मौतों के बीच गाजा के लोगों का कहना है कि उन्हें ऐसा महसूस हो रहा है मानो युद्ध थमा ही नहीं है। अस्पताल से जुड़े सूत्रों के अनुसार, बुधवार को मारे गए फलस्तीनियों में कम से कम पांच बच्चे, सात महिलाएं और ड्यूटी पर तैनात एक पैरामेडिक शामिल है। गाज़ा सिटी के शिफ़ा अस्पताल के निदेशक डॉ. मोहम्मद अबू सलमिया ने फ़ेसबुक पर एक पोस्ट में कहा, ‘‘गाज़ा पट्टी में हमारे लोगों के खिलाफ़ जनसंहार जारी है।युद्धविराम (Ceasefire) की स्थितियह हमला 10 अक्टूबर 2025 से लागू युद्धविराम के बीच हुआ है, जो पहले से ही तनावपूर्ण बना हुआ है:उल्लंघन का सिलसिला: 10 अक्टूबर के बाद से अब तक इजराइली कार्रवाई में 550 से अधिक फलस्तीनी मारे जा चुके हैं। वहीं, इसी अवधि में इजराइल के 4 सैनिकों की भी जान गई है।अंतरराष्ट्रीय प्रतिक्रिया: कतर और मिस्र जैसे मध्यस्थ देशों ने इन हमलों की कड़ी निंदा की है और इन्हें शांति समझौते का बार-बार होने वाला उल्लंघन बताया है।राफाह बॉर्डर पर असर: हमलों के तुरंत बाद, राफाह सीमा पार से मरीजों की निकासी रोक दी गई, जिससे गंभीर रूप से घायल लोगों को इलाज के लिए मिस्र भेजने का काम ठप हो गया।
गाजा पट्टी में शांति की उम्मीदें एक बार फिर धूमिल होती नजर आ रही हैं। बुधवार को हुई इजराइली गोलीबारी में कम से कम 24 फलस्तीनी मारे गए हैं। अस्पताल प्रशासन द्वारा जारी आंकड़ों के अनुसार, मृतकों में दो मासूम बच्चे और महिलाएं भी शामिल हैं। यह घटनाक्रम 10 अक्टूबर से लागू युद्धविराम (Ceasefire) के बीच हुआ है, जिसका पिछले कुछ समय से लगातार उल्लंघन देखा जा रहा है।
इसे भी पढ़ें: Al Falah University Chairman Arrest | दिल्ली विस्फोट के बाद बड़ी कार्रवाई! अल फलाह यूनिवर्सिटी के चेयरमैन जवाद अहमद सिद्दीकी गिरफ्तार
अस्पताल के अधिकारियों ने बुधवार को यह जानकारी दी। वहीं, इजराइल का कहना है कि आतंकियों की तरफ से की गई गोलीबारी में उसका एक सैनिक गंभीर रूप से घायल हो गया, जिसके बाद उसने जवाबी कार्रवाई की। साथ ही इजराइल ने कहा कि उसकी कार्रवाई में तीन शीर्ष चरमपंथी और कुछ ऐसे लोग मारे गए जो उसकी सेना के लिए खतरा पैदा कर रहे थे।
इसे भी पढ़ें: Bharat Taxi Officially Launching | कैब सर्विस सेक्टर में क्रांति! 'भारत टैक्सी' का भव्य आगाज़, ओला-उबर को मिलेगी कड़ी टक्कर
घातक इजराइली हमलों ने 10 अक्टूबर से लागू युद्धविराम का बार बार उल्लंघन किया है। फलस्तीनी नागरिकों की बढ़ती मौतों के बीच गाजा के लोगों का कहना है कि उन्हें ऐसा महसूस हो रहा है मानो युद्ध थमा ही नहीं है। अस्पताल से जुड़े सूत्रों के अनुसार, बुधवार को मारे गए फलस्तीनियों में कम से कम पांच बच्चे, सात महिलाएं और ड्यूटी पर तैनात एक पैरामेडिक शामिल है। गाज़ा सिटी के शिफ़ा अस्पताल के निदेशक डॉ. मोहम्मद अबू सलमिया ने फ़ेसबुक पर एक पोस्ट में कहा, ‘‘गाज़ा पट्टी में हमारे लोगों के खिलाफ़ जनसंहार जारी है।
युद्धविराम (Ceasefire) की स्थिति
यह हमला 10 अक्टूबर 2025 से लागू युद्धविराम के बीच हुआ है, जो पहले से ही तनावपूर्ण बना हुआ है:
उल्लंघन का सिलसिला: 10 अक्टूबर के बाद से अब तक इजराइली कार्रवाई में 550 से अधिक फलस्तीनी मारे जा चुके हैं। वहीं, इसी अवधि में इजराइल के 4 सैनिकों की भी जान गई है।
अंतरराष्ट्रीय प्रतिक्रिया: कतर और मिस्र जैसे मध्यस्थ देशों ने इन हमलों की कड़ी निंदा की है और इन्हें शांति समझौते का बार-बार होने वाला उल्लंघन बताया है।
राफाह बॉर्डर पर असर: हमलों के तुरंत बाद, राफाह सीमा पार से मरीजों की निकासी रोक दी गई, जिससे गंभीर रूप से घायल लोगों को इलाज के लिए मिस्र भेजने का काम ठप हो गया।



