India China Trade: दोनों देशों का द्विपक्षीय व्यापार 127.7 अरब डॉलर पहुंचा

भारत यहां भारत मंडपम में 12 और 13 सितंबर को 18वें ब्रिक्स शिखर सम्मेलन की मेजबानी कर रहा है। चीन के राष्ट्रपति शी चिनफिंग सात साल के अंतराल के बाद अपनी पहली भारत यात्रा पर इस शिखर सम्मेलन में हिस्सा लेने के लिए नयी दिल्ली पहुंचे हैं। चिनफिंग के शिखर सम्मेलन से इतर प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के साथ बातचीत करने का कार्यक्रम है।चीन 2025-26 में भारत का दूसरा सबसे बड़ा व्यापारिक साझेदार था। भारत और चीन के बीच व्यापार की स्थिति पर एक नजर:- द्विपक्षीय व्यापार के लिहाज से दोनों देशों के बीच द्विपक्षीय व्यापार 2025-26 में 7.9 प्रतिशत बढ़कर 127.7 अरब डॉलर हो गया, जो 2024-25 में 118.39 अरब डॉलर था। व्यापार घाटा पिछले वित्त वर्ष में बढ़कर 99.19 अरब डॉलर हो गया, जो 2024-25 में 85 अरब डॉलर, 2023-24 में 83.2 अरब डॉलर, 2022-23 में 73.3 अरब डॉलर, 2021-22 में 44 अरब डॉलर, 2020-21 में 48.64 अरब डॉलर और 2019-20 में 53.56 अरब डॉलर था।चीन को भारत का निर्यात 2025-26 में 36.62 प्रतिशत बढ़कर 19.47 अरब डॉलर हो गया, जो 2024-25 में 14.25 अरब डॉलर था। दूसरी ओर, आयात पिछले वित्त वर्ष में 16 प्रतिशत बढ़कर 131.62 अरब डॉलर हो गया, जो 2024-25 में 113.44 अरब डॉलर था। वित्त वर्ष 2025-26 में भारत के कुल वस्तु आयात में चीन की हिस्सेदारी करीब 17 प्रतिशत थी, जो 2024-25 में 15.7 प्रतिशत थी।वहीं, निर्यात में चीन की हिस्सेदारी पिछले वित्त वर्ष में बढ़कर 4.4 प्रतिशत रही थी जो 2024-25 में 3.2 प्रतिशत थी। चीन पर निर्भरता की बात करें तो वर्ष 2025 में चीन से भारत के आयात में 98.5 प्रतिशत हिस्सा औद्योगिक उत्पादों का था, जबकि कृषि, ईंधन तथा रत्न एवं आभूषण का संयुक्त हिस्सा 1.5 प्रतिशत से कम था। चीन से भारत के करीब 66 प्रतिशत आयात, जिनका मूल्य 82.6 अरब डॉलर है, इलेक्ट्रॉनिक्स, मशीनरी, कंप्यूटर और कार्बनिक रसायनों तक सीमित हैं।भारत के इलेक्ट्रॉनिक्स आयात में चीन की हिस्सेदारी 43 प्रतिशत, मशीनरी और कंप्यूटर आयात में 40 प्रतिशत तथा कार्बनिक रसायनों में 44 प्रतिशत है। आर्थिक शोध संस्थान ‘ग्लोबल ट्रेड रिसर्च इनिशिएटिव’ (जीटीआरआई) ने कहा है कि ये ऐसे सामान नहीं हैं जिन्हें अपनी इच्छा के अनुसार खरीदा या टाला जा सकता है, बल्कि ये विनिर्माण क्षेत्र के लिए जरूरी कच्चे माल हैं, जो सीधे भारत के विनिर्माण परिवेश में इस्तेमाल होते हैं। भारतीय उद्योग चीनी कच्चे माल पर काफी निर्भर है।इनमें इलेक्ट्रॉनिक के कलपुर्जे, इलेक्ट्रिक वाहन (ईवी) बैटरी, सौर मॉड्यूल, एपीआई और विशेष रसायन शामिल हैं, जिन्हें बड़े पैमाने पर बदलना मुश्किल है। इसके परिणामस्वरूप, भारत निर्यात बढ़ाने की कोशिश कर रहा है, लेकिन उसकी आपूर्ति श्रृंखलाएं चीन से जुड़ी हुई हैं। वाणिज्य मंत्रालय के अनुसार, व्यापार घाटे का मुख्य कारण कच्चे माल, मध्यवर्ती सामान और पूंजीगत सामान का आयात है।इनमें वाहन कलपुर्जे, इलेक्ट्रॉनिक पुर्जे एवं ‘असेंबली’, मोबाइल फोन के उपकरण, मशीनरी और उसके उपकरण तथा सक्रिय औषधीय सामग्री (एपीआई) शामिल हैं। इनका इस्तेमाल तैयार उत्पाद बनाने में होता है, जिनका भारत से निर्यात भी किया जाता है। चीनी निवेश के संदर्भ में भारत को अप्रैल, 2000 से मार्च, 2026 के दौरान 2.51 अरब डॉलर का प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (एफडीआई) मिला है।मार्च में भारत ने उन देशों की कंपनियों के लिए एफडीआई नियमों में ढील दी, जो भारत के साथ जमीन की सीमा साझा नहीं करते हैं और जिनके लाभकारी स्वामियों का संबंध जमीन की सीमा साझा करने वाले देशों (एलबीसी) से है तथा उनकी हिस्सेदारी 10 प्रतिशत से कम और गैर-नियंत्रणकारी है। हालांकि, एफडीआई नियमों में यह ढील चीन, हांगकांग या भारत के साथ जमीन की सीमा साझा करने वाले अन्य देशों में पंजीकृत संस्थाओं पर लागू नहीं होगी। ब्रिक्स की बात करें तो यह एक प्रभावशाली समूह के रूप में उभरा है।इसमें दुनिया की 11 प्रमुख उभरती अर्थव्यवस्थाएं शामिल हैं, जिनकी हिस्सेदारी वैश्विक आबादी में करीब 49.5 प्रतिशत, वैश्विक सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) में करीब 40 प्रतिशत और वैश्विक व्यापार में करीब 26 प्रतिशत है।

Sep 12, 2026 - 21:48
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India China Trade: दोनों देशों का द्विपक्षीय व्यापार 127.7 अरब डॉलर पहुंचा

भारत यहां भारत मंडपम में 12 और 13 सितंबर को 18वें ब्रिक्स शिखर सम्मेलन की मेजबानी कर रहा है। चीन के राष्ट्रपति शी चिनफिंग सात साल के अंतराल के बाद अपनी पहली भारत यात्रा पर इस शिखर सम्मेलन में हिस्सा लेने के लिए नयी दिल्ली पहुंचे हैं। चिनफिंग के शिखर सम्मेलन से इतर प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के साथ बातचीत करने का कार्यक्रम है।

चीन 2025-26 में भारत का दूसरा सबसे बड़ा व्यापारिक साझेदार था। भारत और चीन के बीच व्यापार की स्थिति पर एक नजर:- द्विपक्षीय व्यापार के लिहाज से दोनों देशों के बीच द्विपक्षीय व्यापार 2025-26 में 7.9 प्रतिशत बढ़कर 127.7 अरब डॉलर हो गया, जो 2024-25 में 118.39 अरब डॉलर था। व्यापार घाटा पिछले वित्त वर्ष में बढ़कर 99.19 अरब डॉलर हो गया, जो 2024-25 में 85 अरब डॉलर, 2023-24 में 83.2 अरब डॉलर, 2022-23 में 73.3 अरब डॉलर, 2021-22 में 44 अरब डॉलर, 2020-21 में 48.64 अरब डॉलर और 2019-20 में 53.56 अरब डॉलर था।

चीन को भारत का निर्यात 2025-26 में 36.62 प्रतिशत बढ़कर 19.47 अरब डॉलर हो गया, जो 2024-25 में 14.25 अरब डॉलर था। दूसरी ओर, आयात पिछले वित्त वर्ष में 16 प्रतिशत बढ़कर 131.62 अरब डॉलर हो गया, जो 2024-25 में 113.44 अरब डॉलर था। वित्त वर्ष 2025-26 में भारत के कुल वस्तु आयात में चीन की हिस्सेदारी करीब 17 प्रतिशत थी, जो 2024-25 में 15.7 प्रतिशत थी।

वहीं, निर्यात में चीन की हिस्सेदारी पिछले वित्त वर्ष में बढ़कर 4.4 प्रतिशत रही थी जो 2024-25 में 3.2 प्रतिशत थी। चीन पर निर्भरता की बात करें तो वर्ष 2025 में चीन से भारत के आयात में 98.5 प्रतिशत हिस्सा औद्योगिक उत्पादों का था, जबकि कृषि, ईंधन तथा रत्न एवं आभूषण का संयुक्त हिस्सा 1.5 प्रतिशत से कम था। चीन से भारत के करीब 66 प्रतिशत आयात, जिनका मूल्य 82.6 अरब डॉलर है, इलेक्ट्रॉनिक्स, मशीनरी, कंप्यूटर और कार्बनिक रसायनों तक सीमित हैं।

भारत के इलेक्ट्रॉनिक्स आयात में चीन की हिस्सेदारी 43 प्रतिशत, मशीनरी और कंप्यूटर आयात में 40 प्रतिशत तथा कार्बनिक रसायनों में 44 प्रतिशत है। आर्थिक शोध संस्थान ‘ग्लोबल ट्रेड रिसर्च इनिशिएटिव’ (जीटीआरआई) ने कहा है कि ये ऐसे सामान नहीं हैं जिन्हें अपनी इच्छा के अनुसार खरीदा या टाला जा सकता है, बल्कि ये विनिर्माण क्षेत्र के लिए जरूरी कच्चे माल हैं, जो सीधे भारत के विनिर्माण परिवेश में इस्तेमाल होते हैं। भारतीय उद्योग चीनी कच्चे माल पर काफी निर्भर है।

इनमें इलेक्ट्रॉनिक के कलपुर्जे, इलेक्ट्रिक वाहन (ईवी) बैटरी, सौर मॉड्यूल, एपीआई और विशेष रसायन शामिल हैं, जिन्हें बड़े पैमाने पर बदलना मुश्किल है। इसके परिणामस्वरूप, भारत निर्यात बढ़ाने की कोशिश कर रहा है, लेकिन उसकी आपूर्ति श्रृंखलाएं चीन से जुड़ी हुई हैं। वाणिज्य मंत्रालय के अनुसार, व्यापार घाटे का मुख्य कारण कच्चे माल, मध्यवर्ती सामान और पूंजीगत सामान का आयात है।

इनमें वाहन कलपुर्जे, इलेक्ट्रॉनिक पुर्जे एवं ‘असेंबली’, मोबाइल फोन के उपकरण, मशीनरी और उसके उपकरण तथा सक्रिय औषधीय सामग्री (एपीआई) शामिल हैं। इनका इस्तेमाल तैयार उत्पाद बनाने में होता है, जिनका भारत से निर्यात भी किया जाता है। चीनी निवेश के संदर्भ में भारत को अप्रैल, 2000 से मार्च, 2026 के दौरान 2.51 अरब डॉलर का प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (एफडीआई) मिला है।

मार्च में भारत ने उन देशों की कंपनियों के लिए एफडीआई नियमों में ढील दी, जो भारत के साथ जमीन की सीमा साझा नहीं करते हैं और जिनके लाभकारी स्वामियों का संबंध जमीन की सीमा साझा करने वाले देशों (एलबीसी) से है तथा उनकी हिस्सेदारी 10 प्रतिशत से कम और गैर-नियंत्रणकारी है। हालांकि, एफडीआई नियमों में यह ढील चीन, हांगकांग या भारत के साथ जमीन की सीमा साझा करने वाले अन्य देशों में पंजीकृत संस्थाओं पर लागू नहीं होगी। ब्रिक्स की बात करें तो यह एक प्रभावशाली समूह के रूप में उभरा है।

इसमें दुनिया की 11 प्रमुख उभरती अर्थव्यवस्थाएं शामिल हैं, जिनकी हिस्सेदारी वैश्विक आबादी में करीब 49.5 प्रतिशत, वैश्विक सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) में करीब 40 प्रतिशत और वैश्विक व्यापार में करीब 26 प्रतिशत है।