Ceasefire : क्या लेबनान पर बढ़ते भ्रम के लिए Pakistan जिम्मेदार, अमेरिका, इजराइल और ईरान के बीच युद्धविराम के बीच विरोधाभासों का दौर

अमेरिका, इजराइल और ईरान के बीच युद्धविराम का समझौता कर शांतिदूत बने पाकिस्तान की की टेंशन अब बढ़ रही है। पिछले 24 घंटों से विरोधाभासों का दौर जारी है। समझौते की शर्तों, विशेषकर लेबनान की स्थिति को लेकर तीनों पक्ष एक-दूसरे के दावों को झुठला रहे हैं। ...

Apr 9, 2026 - 18:22
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Ceasefire : क्या लेबनान पर बढ़ते भ्रम के लिए Pakistan जिम्मेदार, अमेरिका, इजराइल और ईरान के बीच युद्धविराम के बीच विरोधाभासों का दौर

sharif_donald trump_ netanyahoo अमेरिका, इजराइल और ईरान के बीच युद्धविराम का समझौता कर शांतिदूत बने पाकिस्तान की की टेंशन अब बढ़ रही है। पिछले 24 घंटों से विरोधाभासों का दौर जारी है। समझौते की शर्तों, विशेषकर लेबनान की स्थिति को लेकर तीनों पक्ष एक-दूसरे के दावों को झुठला रहे हैं। इजराइल के प्रधानमंत्री नेतन्याहू ने चेतावनी दी है कि लेबलान पर हमले जारी रहेंगे। 

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मुंह ताकता Mediator पाकिस्तान 

इस पूरे विवाद के केंद्र में अब पाकिस्तान खड़ा है, जिसने इस डील में मध्यस्थता (Mediator) की थी।  8 अप्रैल, 2026 का दिन पाकिस्तान के लिए किसी उत्सव से कम नहीं था। सालों बाद पाकिस्तान ने अमेरिका और ईरान के बीच युद्धविराम कराकर अपनी सबसे बड़ी कूटनीतिक जीत दर्ज की थी। लेकिन यह खुशी चंद घंटों की ही मेहमान साबित हुई। समझौते के तुरंत बाद इजराइल ने ईरान के सहयोगी लेबनान पर अब तक का सबसे बड़ा हमला कर दिया, जिसमें सैकड़ों लोग मारे गए।

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शहबाज शरीफ का ऐलान बना गले की फांस 

विवाद की जड़ पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ का वह बयान है, जो उन्होंने बुधवार को युद्धविराम की घोषणा करते समय दिया था। पीएम शरीफ ने विशेष रूप से बड़े अक्षरों (Capital Letters) में उल्लेख किया था कि यह समझौता 'हर जगह' लागू होगा, जिसमें 'लेबनान' भी शामिल है।

 

अब अंतरराष्ट्रीय कूटनीतिक गलियारों में यह सवाल उठ रहा है कि क्या पाकिस्तान ने मध्यस्थता के दौरान दोनों पक्षों को अलग-अलग व्याख्याएं दीं, जिससे यह खूनी भ्रम पैदा हुआ? फिलहाल, इस कूटनीतिक जीत पर हार के बादल मंडराने लगे हैं।

 

क्या लेबनान समझौते का हिस्सा था

 

इस हमले के बाद सबसे बड़ा भ्रम यह पैदा हो गया कि क्या लेबनान इस युद्धविराम का हिस्सा था या नहीं? दोनों पक्षों को समझौते की शर्तें समझाने की जिम्मेदारी पाकिस्तान की थी, जो अब इस कूटनीतिक तूफान के बीच घिर गया है। वाशिंगटन और तेल अवीव का स्पष्ट कहना है कि लेबनान- जिस पर इजराइल 2 मार्च से लगातार हमले कर रहा है- कभी भी इस युद्धविराम समझौते का हिस्सा नहीं था।  ईरान का कहना है कि इजराइल ने युद्धविराम की शर्तों का उल्लंघन किया है। लेबनान ने उसका साथ दिया है और वह आगे भी साथ रहेगा। 

 

नेतन्याहू की चेतावनी- जारी रहेंगे हिज्बुल्लाह पर हमले

इजराइली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने अपनी पहली मीडिया ब्रीफिंग में कहा कि यह युद्धविराम अभी भी बेहद नाजुक है। उन्होंने साफ शब्दों में संकेत दिया कि यह 'अंत नहीं है' और अगर इजरायल के निर्धारित उद्देश्य पूरे नहीं हुए तो इजरायल किसी भी समय सैन्य कार्रवाई दोबारा शुरू कर सकता है। नेतन्याहू ने कहा कि हमारी उंगली ट्रिगर पर है और जरूरत पड़ने पर हम किसी भी क्षण युद्ध में लौटने के लिए पूरी तरह तैयार हैं।

 

उन्होंने यह भी जोर देकर कहा कि युद्धविराम समझौता इजरायल के पूर्ण सहयोग से ही हुआ था और उन्होंने इस बात से इनकार किया कि इजरायल को अंतिम समय में सूचित किया गया था। प्रधानमंत्री ने स्पष्ट किया कि ईरान के साथ हुआ यह अस्थायी समझौता हिज्बुल्लाह पर लागू नहीं होता। उन्होंने चेतावनी देते हुए कहा कि तेहरान के साथ शत्रुता में विराम के बावजूद इजरायली सेना हिज्बुल्लाह पर हमले जारी रखेगी। Edited by : Sudhir Sharma