अभिषेक बनर्जी पर हमले के मामले में 7 लोग हिरासत में, ममता बोलीं- हेलमेट नहीं होता तो जा सकती थी जान
पश्चिम बंगाल के दक्षिण 24 परगना जिले के सोनारपुर में तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) के राष्ट्रीय महासचिव और सांसद अभिषेक बनर्जी पर हुए कथित हमले के मामले में पुलिस ने सात लोगों को हिरासत में लिया है। पुलिस ने इस मामले में स्वतः संज्ञान (सुओ मोटू) लेते हुए ...
पश्चिम बंगाल के दक्षिण 24 परगना जिले के सोनारपुर में तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) के राष्ट्रीय महासचिव और सांसद अभिषेक बनर्जी पर हुए कथित हमले के मामले में पुलिस ने सात लोगों को हिरासत में लिया है। पुलिस ने इस मामले में स्वतः संज्ञान (सुओ मोटू) लेते हुए केस दर्ज किया है और जांच के लिए तीन विशेष टीमों का गठन किया है। सोशल मीडिया पर वायरल वीडियो के आधार पर संदिग्धों की पहचान कर पूरी रात छापेमारी अभियान चलाया गया।
वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों के अनुसार, पांच लोगों को औपचारिक रूप से गिरफ्तार किया गया है, जबकि दो अन्य से पूछताछ की जा रही है। पुलिस का कहना है कि मामले की जांच जारी है और उपलब्ध सभी वीडियो साक्ष्यों की बारीकी से जांच की जा रही है। गिरफ्तार लोगों में निर्मला सेनगुप्ता, देबाशीष दत्ता, काजोल दास और स्थानीय युवक आकाश गायेन के नाम सामने आए हैं। सभी आरोपियों को रविवार को बारुईपुर अदालत में पेश किया जाना है।
टीएमसी कार्यकर्ता के परिवार से मिलने गए थे अभिषेक
यह घटना शनिवार शाम की है, जब अभिषेक बनर्जी सोनारपुर पहुंचे थे। वे कथित तौर पर चुनाव बाद हुई हिंसा में मारे गए टीएमसी कार्यकर्ता संजू कर्मकार के परिजनों से मिलने गए थे। जैसे ही उनका काफिला इलाके के पास पहुंचा, वहां मौजूद लोगों ने काले झंडे दिखाए और "गो बैक" के नारे लगाए।
सड़क संकरी होने के कारण उनका वाहन आगे नहीं जा सका, जिसके बाद अभिषेक बनर्जी मोटरसाइकिल पर सवार होकर पीड़ित परिवार के घर की ओर बढ़े। इसी दौरान प्रदर्शनकारियों की भीड़ ने उन्हें घेर लिया। आरोप है कि भीड़ ने उन्हें मोटरसाइकिल से नीचे खींच लिया, "चोर-चोर" के नारे लगाए और उन पर ईंट, जूते तथा अंडे फेंके। प्रदर्शन में शामिल कुछ महिलाओं ने झाड़ू भी लहराए। स्थिति बिगड़ने पर राज्य पुलिस और केंद्रीय बलों ने हस्तक्षेप कर उन्हें भीड़ से सुरक्षित बाहर निकाला।
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ममता बनर्जी का बड़ा दावा
पश्चिम बंगाल की पूर्व मुख्यमंत्री और टीएमसी प्रमुख ममता बनर्जी ने दावा किया कि अगर अभिषेक बनर्जी ने हेलमेट नहीं पहना होता तो उनकी जान भी जा सकती थी। उन्होंने कहा कि हमले के दौरान उनके भतीजे को गंभीर चोट लग सकती थी और उनकी आंखों को नुकसान पहुंचाने की भी कोशिश की गई।
ममता बनर्जी ने भाजपा पर तीखा हमला बोलते हुए कहा कि इस तरह की बर्बरता पहले कभी नहीं देखी गई। उन्होंने कहा कि लोकतंत्र की हत्या की बात तो दूर, अब लोगों को इलाज तक नहीं मिल पा रहा है। उन्होंने यह भी दावा किया कि अभिषेक के सीने के आसपास रक्त के थक्के (ब्लड क्लॉट्स) बने हैं और उनकी चिकित्सकीय स्थिति पर लगातार नजर रखी जा रही है।
.@SuvenduWB has weaponised the “Bangladeshi” slur for years. Today, his supporters have taken it to such an absurd extent that they are hurling it at Shri @abhishekaitc - a SITTING MP OF THE INDIAN PARLIAMENT and Leader of the AITC Parliamentary Party in Lok Sabha.
Is this how… pic.twitter.com/GYNG2yyK0Q — All India Trinamool Congress (@AITCofficial) May 31, 2026
अस्पताल में भर्ती को लेकर विवाद
हमले के बाद अभिषेक बनर्जी को पहले ईएम बाइपास स्थित एक निजी अस्पताल ले जाया गया, जहां उनका प्राथमिक उपचार किया गया। बाद में उन्हें शहर के दूसरे निजी अस्पताल में स्थानांतरित किया गया। अस्पताल की प्रारंभिक मेडिकल रिपोर्ट में कहा गया कि उन्हें सतही चोटें आई हैं और अस्पताल में भर्ती करने की आवश्यकता नहीं है।
अस्पताल के एक वरिष्ठ अधिकारी के अनुसार, अभिषेक बनर्जी पूरी तरह होश में थे और उनके शरीर पर गंभीर चोट के संकेत नहीं मिले। केवल सीने पर कुछ चोटों के निशान पाए गए। डॉक्टरों ने कहा कि उनकी स्थिति स्थिर है और भर्ती की आवश्यकता नहीं है।
हालांकि, ममता बनर्जी ने आरोप लगाया कि अस्पतालों पर दबाव डाला जा रहा था और इसी कारण उनके भतीजे को उचित इलाज नहीं मिल पा रहा था। उन्होंने दावा किया कि कुछ अधिकारियों और राजनीतिक दबाव के चलते अस्पताल प्रशासन असहज था। ममता ने कहा कि अंततः पारिवारिक चिकित्सकों की सलाह पर अभिषेक को घर ले जाया गया, जहां उनका उपचार जारी रहेगा।
टीएमसी और भाजपा आमने-सामने
टीएमसी ने आरोप लगाया है कि अभिषेक बनर्जी पर हमला पूर्व नियोजित था और इसके पीछे भाजपा समर्थकों का हाथ है। पार्टी के वरिष्ठ नेताओं ने दावा किया कि यह हमला सुनियोजित तरीके से किया गया था। वहीं भाजपा ने इन आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि पार्टी का इस घटना से कोई संबंध नहीं है। भाजपा नेताओं का कहना है कि यह स्थानीय लोगों की स्वतःस्फूर्त प्रतिक्रिया थी।
भाजपा ने यह भी आरोप लगाया कि अभिषेक बनर्जी एक अन्य मामले में सीआईडी के समन से बचने के लिए अस्पताल में भर्ती होने की कोशिश कर रहे थे। फिलहाल पुलिस पूरे मामले की जांच कर रही है और घटना से जुड़े वीडियो फुटेज तथा अन्य साक्ष्यों के आधार पर आगे की कार्रवाई की जा रही है। Edited by : Sudhir Sharma



