BRICS घोषणा पत्र में दिखी 'त्रिशक्ति' की ताकत, PM मोदी बोले- दुनिया को पुराने संस्थानों से नहीं चलाया जा सकता
त्रिशक्ति यानी भारत, रूस और चीन ने ब्रिक्स समिट में अपना साझा घोषणापत्र जारी कर दिया है। इसमें ग्लोबल साउथ के लिए समान भागीदारी का आह्वान किया गया है। इसमें भविष्य की टेक्नोलॉजी और उन्हें नियंत्रित करने वाले नियमों के विकास में 'ग्लोबल साउथ' ...
त्रिशक्ति यानी भारत, रूस और चीन ने ब्रिक्स समिट में अपना साझा घोषणापत्र जारी कर दिया है। इसमें ग्लोबल साउथ के लिए समान भागीदारी का आह्वान किया गया है। इसमें भविष्य की टेक्नोलॉजी और उन्हें नियंत्रित करने वाले नियमों के विकास में 'ग्लोबल साउथ' (विकासशील देशों) की समान भागीदारी की मांग की गई।
बता दें कि भारत में आयोजित हो रहे BRICS summit 2026 में चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग, रूस के राष्ट्रपति पुतिन और भारत के पीएम नरेंद्र मोदी की उपस्थिति की पूरी दुनिया में चर्चा है। इस दौरान सभी देशों का एक साझा घोषणापत्र जारी किया गया।
भारत मंडपम में समिट के दौरान यह घोषणा करते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा कि बदलते वैश्विक ढांचे को पुराने पड़ चुके संस्थानों द्वारा नहीं चलाया जाना चाहिए। उन्होंने नियम बनाने की प्रक्रिया में सुधार और ज़रूरी प्रतिनिधित्व की वकालत की।
पहलगाम आतंकी हमले की निंदा : इस घोषणापत्र की खास बात है कि रूस और चीन समेत BRICS देशों ने पहलगाम आतंकी हमले की निंदा की है। देशों ने कहा कि आतंकियों को पनाह देने वालों के खिलाफ मिलकर कार्रवाई की जाएगी। साथ ही आतंकियों तक पहुंचने वाली फंडिंग रोकने और उन्हें सुरक्षित ठिकाने देने वालों पर कार्रवाई करने पर भी सहमति बनी है। बता दें कि BRICS देशों के बीच संयुक्त बयान जारी करने पर सहमति ऐसे समय में बनी है, जब पश्चिम एशिया में तनाव है और ईरान, सऊदी अरब और UAE के कई मुद्दों पर अलग-अलग रुख हैं।
दुनिया को पुराने संस्थानों से नहीं चलाया जा सकता : पीएम मोदी ने आगे कहा कि हमारी सोच में विविधता के साथ-साथ, ब्रिक्स सहयोग के प्रति हमारी साझा प्रतिबद्धता भी स्पष्ट रूप से सामने आई है। आज की चर्चा से यह साफ हो गया है कि बदलती दुनिया को पुराने पड़ चुके संस्थानों के ज़रिए नहीं चलाया जा सकता; प्रतिनिधित्व, जवाबदेही और नियम बनाने की प्रक्रिया में सुधार ज़रूरी हैं।
क्या है नई दिल्ली घोषणापत्र की खास बातें : घोषणापत्र में ब्रिक्स देशों ने एकतरफा टैरिफ और गैर-टैरिफ उपायों के बढ़ते इस्तेमाल पर गंभीर चिंता जताई, जो व्यापार को प्रभावित करते हैं और विश्व व्यापार संगठन (WTO) के नियमों के खिलाफ हैं। उन्होंने अंतरराष्ट्रीय कानून के खिलाफ एकतरफा दबाव डालने वाले उपायों की भी निंदा की। घोषणापत्र में संघर्षों को रोकने के लिए ज़्यादा जुड़ाव की मांग की गई, जिसमें संघर्षों की मूल वजहों को दूर करने के प्रयास भी शामिल हैं। समूह ने बातचीत, परामर्श और कूटनीति के ज़रिए अंतरराष्ट्रीय विवादों को शांतिपूर्ण ढंग से सुलझाने की अपनी प्रतिबद्धता को भी दोहराया। ब्रिक्स देशों ने एक ऐसे बहुपक्षीय दृष्टिकोण की वकालत की जो प्रमुख वैश्विक मुद्दों पर अलग-अलग देशों के नज़रिए को ध्यान में रखे, और अंतरराष्ट्रीय चुनौतियों से निपटने में बातचीत व सहयोग के महत्व पर ज़ोर दिया।
घोषणापत्र की 10 सबसे खास बातें
पहलगाम आतंकी हमले की निंदा: 22 अप्रैल 2025 के हमले की कड़ी निंदा, 26 लोगों की मौत का जिक्र।
आतंकवाद के खिलाफ सख्त रुख: आतंकवाद के हर रूप और हर वजह की निंदा की गई।
आतंकवाद को धर्म से न जोड़ें: आतंकवाद को किसी धर्म, राष्ट्रीयता या समुदाय से जोड़ने का विरोध।
सीमा पार आतंकवाद पर कार्रवाई: आतंकवाद, उसकी फंडिंग और आतंकियों को पनाह देने वालों के खिलाफ मिलकर कार्रवाई पर जोर।
आतंकियों की खिलाफ कार्रवाई: आतंकियों और आतंकी संगठनों के खिलाफ सामूहिक कार्रवाई की बात।
यूएन की आतंकरोधी संधि जल्द बने: अंतरराष्ट्रीय आतंकवाद पर प्रस्तावित संधि को जल्द अपनाने की मांग।
एकतरफा टैरिफ की निंदा: एकतरफा टैरिफ और व्यापारिक पाबंदियों पर चिंता दर्ज की। ऐसे कदम WTO के नियमों के अनुरूप होने चाहिए।
परमाणु खतरा: परमाणु हथियारों के इस्तेमाल के खतरे और बढ़ते वैश्विक तनाव पर चिंता जताई गई।
भारत की अध्यक्षता की सराहना: BRICS देशों ने भारत की अध्यक्षता में हुए BRICS प्लस और आउटरीच संवाद की सराहना की।



