Ajit Pawar Plane Crash : परिवार और बच्चों को बिलखता छोड़ गए विदीप जाधव, पड़ोसियों की आंखों में तैर रही वह आखिरी मुस्कान
बारामती विमान हादसे में महाराष्ट्र के उपमुख्यमंत्री अजित पवार के साथ उनके निजी सुरक्षा अधिकारी (PSO) विदीप जाधव का भी निधन हो गया। ठाणे के विटावा में रहने वाले विदिप अपने पीछे दो छोटे बच्चे और बुजुर्ग माता-पिता को छोड़ गए हैं। पढ़िए एक कर्तव्यनिष्ठ ...
vidip jadhav News : बारामती में बुधवार को हुए भीषण विमान हादसे ने न केवल महाराष्ट्र की राजनीति के एक बड़े स्तंभ को ढहाने का काम किया, बल्कि कई ऐसे घरों के चिराग भी बुझा दिए जिनकी दुनिया उनके अपनों के इर्द-गिर्द सिमटी थी। उपमुख्यमंत्री अजीत पवार के साथ इस हादसे में जान गंवाने वालों में उनके निजी सुरक्षा अधिकारी (Personal Security Officer)विदीप जाधव भी शामिल थे। विदीप उस अभागे 'लियरजेट 45' विमान में सवार थे, जो लैंडिंग के दूसरे प्रयास के दौरान दुर्घटनाग्रस्त हो गया। इस हादसे में उनके साथ अजीत पवार, अटेंडेंट पिंकी माली और दोनों पायलटों की भी मौत हो गई।
विटावा में छाया मातम, माता-पिता नहीं थे घर
जैसे ही विदीप जाधव के निधन की खबर ठाणे के कलवा स्थित उनके इलाके 'विटावा' पहुंची, पूरे मोहल्ले में सन्नाटा पसर गया। मीडिया खबरों के मुताबिक विदीप अपने पीछे बूढ़े माता-पिता, एक 14 साल की बेटी और सिर्फ 9 साल के मासूम बेटे को छोड़ गए हैं। जिस समय यह खबर आई, उनका घर बंद था क्योंकि उनके माता-पिता अपने पैतृक गांव गए हुए थे। मोहल्ले की गलियां, जो कभी विदीप की मौजूदगी से चहकती थीं, आज गमगीन हैं।
गलियों में फैला है सिर्फ सन्नाटा और खामोशी
कृष्णा विहार' की ओर जाने वाली लेन में आज सिर्फ खामोशी है। यह सन्नाटा उस दुख को बयां कर रहा है जो एक कर्तव्यनिष्ठ अधिकारी के जाने से उपजा है। विदीप जाधव को उनके इलाके में केवल एक सुरक्षा अधिकारी के तौर पर नहीं, बल्कि एक बेहद मिलनसार और सम्मान देने वाले इंसान के रूप में याद किया जा रहा है।
जिस सुरक्षाकर्मी ने अपना पूरा जीवन दूसरों की सुरक्षा के लिए समर्पित कर दिया, आज उसकी अपनी यादें उसके चाहने वालों को सुरक्षा का अहसास कराने के लिए काफी हैं, लेकिन उनके परिवार के लिए यह घाव कभी न भरने वाला है।
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नहीं थम रहे पड़ोसियों के आंसू
विदीप को याद करते हुए उनके पड़ोसियों के आंसू थमने का नाम नहीं ले रहे। उनकी एक पड़ोसी ने मीडिया से कहा कि मैं उन्हें 'दादा' कहकर बुलाती थी। वह बहुत ही सरल और मृदुभाषी थे। बुधवार सुबह 6.30 बजे मैंने उन्हें ड्यूटी पर जाते देखा था। सिर्फ दो घंटे बाद खबर आई कि वह अब नहीं रहे। यकीन ही नहीं हो रहा कि ऐसा कुछ हो जाएगा।
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क्या पता था आखिरी 'बाय' होगा
27 सालों से उनके पड़ोसी रहे एक अन्य व्यक्ति ने उस सुबह की एक डरावनी और भावुक याद मीडिया से कही। उसने बताया कि जब विदीप ड्यूटी के लिए निकल रहे थे, तो उन्होंने हमेशा की तरह हाथ हिलाकर इशारा किया। हमने अनगिनत बार उन्हें ऐसे जाते देखा था, पर ज़हन में एक बार भी नहीं आया कि यह उनका आखिरी 'बाय' होगा। हाथ हिलाने वाला वह पल बार-बार मेरी आंखों के सामने आ रहा है। Edited by : Sudhir Sharma



