सिरसा DC ने सभी सरपंचों से मांगा तलाबों का रिकॉर्ड:अवैध कब्जों पर होगी कार्रवाई, सटीक जानकारी ने देने पर होगा एक्शन
सिरसा जिले में तलाब-जोहड़ों की जमीन को लेकर सरकार के बाद अब प्रशासन भी हरकत में आ गया है। कारण है कि गांव में कई तलाब-जोहड़ की जमीन पर लोगों ने अवैध कब्जे किए हुए हैं। जैसे किसी ने पशु बांधने के नाम पर तो किसी ने लकड़ी व गोबर-कचरा डालने के नाम पर जोहड़ की जमीन पर कब्जा किया हुआ है। अब वे कब्जे हटाए जाएंगे। इसे लेकर जिला उपायुक्त (DC) ने सभी तहसीलदारों और उप-तहसीलदारों के माध्यम से जिले के सभी ग्राम पंचायतों से इस्तेमाल (इंतकाल) के समय छोड़े गए तालाब/जोहड़ों का पूरा रिकॉर्ड तलब किया है। ये लेटर सभी ग्राम पंचायतों को भेजा गया है और सरपंचों ने भी जानकारी जुटानी शुरू कर दी है। सूत्रों की मानें तो अगर किसी सरपंच ने जोहड़ की जमीन की सटीक जानकारी नहीं भेजी या किसी के साथ मिलीभगत की कोशिश की तो उनके खिलाफ कार्रवाई की जाएगी। गांव में इन जोहड़ों की जमीन चिन्हित करने बाद वहां से कब्जा हटाने को ड्यूटी मजिस्ट्रेट नियुक्त होंगे। यदि किसी ने अवैध निर्माण किया हुआ है तो उसे जेसीबी से ढहाया जाएगा। किसी ने अस्थायी तौर पर गोबर डालने या पशु बांधने के नाम पर अतिक्रमण किया है तो उसे हटाया जाएगा। इसी जून से जुलाई तक ये कब्जा हटाओ कार्रवाइ होनी है। कुछ गांव में तलाब-जोहड़ की जगह पर बने मकान कुछ गांव में तलाब या जोहड़ की बची जगह पर मकान बनाए हुए हैं। ये ज्यादातर आर्थिक रूप से कमजोर लोगों ने बनाए हुए हैं। ऐसे में उनके लिए मुसीबत हो सकती है। अगर यहां से कब्जे हटे या मकान तोड़कर जगह खाली कराई गई तो वे बेघर हो जाएंगे। कुछ लोगों ने तलाब की जगह पर गोबर व कचरा डाल रखा है और पानी सूख गया। उस जगह पर कब्जा कर लिया और जोहड़ की जगह नाममात्र रह गई। आज वहां पता भी नहीं चलता कि यहां कभी जोहड़ होता था। मगर ग्रामीणों की मांग है कि जोहड़ की जमीन पर कब्जा कर रोक लिए गए हैं, जिससे तलाब सूख गए। इस भयंकर गर्मी में पशु तलाब में नहीं जा सकते और न ही पानी पी सकते। ज्यादातर बेसहारा पशुओं के लिए समस्या है। ये आदेश हुए जारी डीसी की ओर से पंचायतों को जारी पत्र में निर्देश दिए हैं कि प्रत्येक गांव के जोहड़ों और तालाबों का खसरा नंबर, रकबा, राजस्व रिकॉर्ड तथा वर्तमान स्थिति की जानकारी निर्धारित प्रपत्र में 30 जून 2026 तक भेजी जाए। इसके बाद सरकार के स्तर पर रिकॉर्ड का मिलान कर आगे की कार्रवाई की जाएगी। इस आदेश के बाद उन लोगों में हलचल मच गई है, जिन्होंने वर्षों से पंचायत की जोहड़ भूमि पर कब्जा कर रखा है। रिकॉर्ड की जांच पूरी होते ही प्रशासन अवैध कब्जों को हटाने की दिशा में सख्त कदम उठा सकता है। इन दो तालाबों के हालात प्रशासन ने मांगी है जोहड़ों की डिटेल मामले में मौजूखेड़ा से सरपंच सुरेंद्र सिंह का कहना है कि डीसी की ओर से पत्र आया हुआ है, जिसमें गांव के तलाब यानी जोहड़ों की जानकारी मांगी गई है कि आपके यहां कितने जोहड़ है और उनकी कितनी जगह व खसरा नंबर क्या है। वहां मौजूदा समय में क्या स्थिति है। हमारे गांव में तो जोहड़ की जमीन पर कब्जा वाली बात नहीं है। फिर भी प्रशासन को रिपोर्ट भेजी जाएगी।
सिरसा जिले में तलाब-जोहड़ों की जमीन को लेकर सरकार के बाद अब प्रशासन भी हरकत में आ गया है। कारण है कि गांव में कई तलाब-जोहड़ की जमीन पर लोगों ने अवैध कब्जे किए हुए हैं। जैसे किसी ने पशु बांधने के नाम पर तो किसी ने लकड़ी व गोबर-कचरा डालने के नाम पर जोहड़ की जमीन पर कब्जा किया हुआ है। अब वे कब्जे हटाए जाएंगे। इसे लेकर जिला उपायुक्त (DC) ने सभी तहसीलदारों और उप-तहसीलदारों के माध्यम से जिले के सभी ग्राम पंचायतों से इस्तेमाल (इंतकाल) के समय छोड़े गए तालाब/जोहड़ों का पूरा रिकॉर्ड तलब किया है। ये लेटर सभी ग्राम पंचायतों को भेजा गया है और सरपंचों ने भी जानकारी जुटानी शुरू कर दी है। सूत्रों की मानें तो अगर किसी सरपंच ने जोहड़ की जमीन की सटीक जानकारी नहीं भेजी या किसी के साथ मिलीभगत की कोशिश की तो उनके खिलाफ कार्रवाई की जाएगी। गांव में इन जोहड़ों की जमीन चिन्हित करने बाद वहां से कब्जा हटाने को ड्यूटी मजिस्ट्रेट नियुक्त होंगे। यदि किसी ने अवैध निर्माण किया हुआ है तो उसे जेसीबी से ढहाया जाएगा। किसी ने अस्थायी तौर पर गोबर डालने या पशु बांधने के नाम पर अतिक्रमण किया है तो उसे हटाया जाएगा। इसी जून से जुलाई तक ये कब्जा हटाओ कार्रवाइ होनी है। कुछ गांव में तलाब-जोहड़ की जगह पर बने मकान कुछ गांव में तलाब या जोहड़ की बची जगह पर मकान बनाए हुए हैं। ये ज्यादातर आर्थिक रूप से कमजोर लोगों ने बनाए हुए हैं। ऐसे में उनके लिए मुसीबत हो सकती है। अगर यहां से कब्जे हटे या मकान तोड़कर जगह खाली कराई गई तो वे बेघर हो जाएंगे। कुछ लोगों ने तलाब की जगह पर गोबर व कचरा डाल रखा है और पानी सूख गया। उस जगह पर कब्जा कर लिया और जोहड़ की जगह नाममात्र रह गई। आज वहां पता भी नहीं चलता कि यहां कभी जोहड़ होता था। मगर ग्रामीणों की मांग है कि जोहड़ की जमीन पर कब्जा कर रोक लिए गए हैं, जिससे तलाब सूख गए। इस भयंकर गर्मी में पशु तलाब में नहीं जा सकते और न ही पानी पी सकते। ज्यादातर बेसहारा पशुओं के लिए समस्या है। ये आदेश हुए जारी डीसी की ओर से पंचायतों को जारी पत्र में निर्देश दिए हैं कि प्रत्येक गांव के जोहड़ों और तालाबों का खसरा नंबर, रकबा, राजस्व रिकॉर्ड तथा वर्तमान स्थिति की जानकारी निर्धारित प्रपत्र में 30 जून 2026 तक भेजी जाए। इसके बाद सरकार के स्तर पर रिकॉर्ड का मिलान कर आगे की कार्रवाई की जाएगी। इस आदेश के बाद उन लोगों में हलचल मच गई है, जिन्होंने वर्षों से पंचायत की जोहड़ भूमि पर कब्जा कर रखा है। रिकॉर्ड की जांच पूरी होते ही प्रशासन अवैध कब्जों को हटाने की दिशा में सख्त कदम उठा सकता है। इन दो तालाबों के हालात प्रशासन ने मांगी है जोहड़ों की डिटेल मामले में मौजूखेड़ा से सरपंच सुरेंद्र सिंह का कहना है कि डीसी की ओर से पत्र आया हुआ है, जिसमें गांव के तलाब यानी जोहड़ों की जानकारी मांगी गई है कि आपके यहां कितने जोहड़ है और उनकी कितनी जगह व खसरा नंबर क्या है। वहां मौजूदा समय में क्या स्थिति है। हमारे गांव में तो जोहड़ की जमीन पर कब्जा वाली बात नहीं है। फिर भी प्रशासन को रिपोर्ट भेजी जाएगी।