शौर्य चक्र विजेता को नहीं मिली पूरी सम्मान राशि:CRPF में सहायक कमांडेंट हैं गुरुग्राम के जिले सिंह, फाइल CM ऑफिस में अटकी

देश की रक्षा में जान की बाजी लगाने वाले वीरों को अपने हक के लिए सरकारी कामकाज में देरी का सामना करना पड़ रहा है। हरियाणा के गुरुग्राम निवासी सीआरपीएफ के सहायक कमांडेंट जिले सिंह शौर्य चक्र विजेता हैं, लेकिन उनकी सम्मान राशि की फाइल मुख्यमंत्री कार्यालय में लंबे समय से अटकी हुई है। जिले सिंह ने 30 और 31 दिसंबर 2017 की रात पुलवामा के लेथपुरा स्थित सीआरपीएफ कैंप पर हुए आतंकी हमले में असाधारण बहादुरी दिखाई थी। जैश-ए-मोहम्मद के आतंकवादियों ने कैंप पर हमला किया था। इस मुठभेड़ में जिले सिंह ने तीन आतंकियों को मार गिराया और अपने 12 साथियों की जान बचाई। उनकी इस वीरता के लिए भारत सरकार ने उन्हें शौर्य चक्र से सम्मानित किया। हरियाणा सरकार से केवल 7 लाख रुपए ही मिले हरियाणा सरकार की खेल व कल्याण नीति के तहत शौर्य चक्र विजेता को 31 लाख रुपए की सम्मान राशि देने का नियम है। हालांकि, जिले सिंह को 25 नवंबर 2020 को सिर्फ 7 लाख रुपए ही मिले। उनकी बची हुई सम्मान राशि की फाइल कई सालों से अटकी हुई है। जिले सिंह ने बताया कि वह अपनी बची हुई सम्मान राशि पाने के लिए कई जगह चक्कर लगा चुके हैं। उन्होंने केंद्रीय राज्य मंत्री राव इंद्रजीत सिंह, राज्यपाल बंडारू दत्तात्रेय और पूर्व मुख्यमंत्री मनोहर लाल खट्टर को इस बारे में जानकारी दी है। इसके साथ ही, उन्होंने मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी, कैबिनेट मंत्री राव नरबीर सिंह, पूर्व विधायक सत्यप्रकाश जरावता और पटौदी विधायक बिमला चौधरी से भी मुलाकात की है। इतनी कोशिशों के बाद भी अभी तक कोई समाधान नहीं निकल पाया है। मुद्दा: CAPF को सशस्त्र बल मानने से इनकार दिल्ली हाई0कोर्ट ने 11 जनवरी को दिए अपने फैसले में केंद्रीय अर्धसैनिक बलों (CAPF) को भारत संघ के सशस्त्र बल माना है, लेकिन हरियाणा सरकार ऐसा नहीं मानती। इसी वजह से सीआरपीएफ के शौर्य चक्र विजेता जिले सिंह को हरियाणा सरकार से तय सम्मान राशि नहीं मिल रही है। हरियाणा सरकार सेना के शौर्य चक्र विजेता को 31 लाख रुपए देती है, लेकिन CAPF में शौर्य चक्र मिलने पर केवल सात लाख रुपए दे देते हैं।

Sep 12, 2026 - 21:47
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शौर्य चक्र विजेता को नहीं मिली पूरी सम्मान राशि:CRPF में सहायक कमांडेंट हैं गुरुग्राम के जिले सिंह, फाइल CM ऑफिस में अटकी
देश की रक्षा में जान की बाजी लगाने वाले वीरों को अपने हक के लिए सरकारी कामकाज में देरी का सामना करना पड़ रहा है। हरियाणा के गुरुग्राम निवासी सीआरपीएफ के सहायक कमांडेंट जिले सिंह शौर्य चक्र विजेता हैं, लेकिन उनकी सम्मान राशि की फाइल मुख्यमंत्री कार्यालय में लंबे समय से अटकी हुई है। जिले सिंह ने 30 और 31 दिसंबर 2017 की रात पुलवामा के लेथपुरा स्थित सीआरपीएफ कैंप पर हुए आतंकी हमले में असाधारण बहादुरी दिखाई थी। जैश-ए-मोहम्मद के आतंकवादियों ने कैंप पर हमला किया था। इस मुठभेड़ में जिले सिंह ने तीन आतंकियों को मार गिराया और अपने 12 साथियों की जान बचाई। उनकी इस वीरता के लिए भारत सरकार ने उन्हें शौर्य चक्र से सम्मानित किया। हरियाणा सरकार से केवल 7 लाख रुपए ही मिले हरियाणा सरकार की खेल व कल्याण नीति के तहत शौर्य चक्र विजेता को 31 लाख रुपए की सम्मान राशि देने का नियम है। हालांकि, जिले सिंह को 25 नवंबर 2020 को सिर्फ 7 लाख रुपए ही मिले। उनकी बची हुई सम्मान राशि की फाइल कई सालों से अटकी हुई है। जिले सिंह ने बताया कि वह अपनी बची हुई सम्मान राशि पाने के लिए कई जगह चक्कर लगा चुके हैं। उन्होंने केंद्रीय राज्य मंत्री राव इंद्रजीत सिंह, राज्यपाल बंडारू दत्तात्रेय और पूर्व मुख्यमंत्री मनोहर लाल खट्टर को इस बारे में जानकारी दी है। इसके साथ ही, उन्होंने मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी, कैबिनेट मंत्री राव नरबीर सिंह, पूर्व विधायक सत्यप्रकाश जरावता और पटौदी विधायक बिमला चौधरी से भी मुलाकात की है। इतनी कोशिशों के बाद भी अभी तक कोई समाधान नहीं निकल पाया है। मुद्दा: CAPF को सशस्त्र बल मानने से इनकार दिल्ली हाई0कोर्ट ने 11 जनवरी को दिए अपने फैसले में केंद्रीय अर्धसैनिक बलों (CAPF) को भारत संघ के सशस्त्र बल माना है, लेकिन हरियाणा सरकार ऐसा नहीं मानती। इसी वजह से सीआरपीएफ के शौर्य चक्र विजेता जिले सिंह को हरियाणा सरकार से तय सम्मान राशि नहीं मिल रही है। हरियाणा सरकार सेना के शौर्य चक्र विजेता को 31 लाख रुपए देती है, लेकिन CAPF में शौर्य चक्र मिलने पर केवल सात लाख रुपए दे देते हैं।