पेड़ से दूध निकलने को चमत्कार मान रहे ग्रामीण:बक्सर में नीम के पेड़ से लगातार निकल रहा तरल प्रदार्थ, प्रसाद के रूप में सेवन कर रहे लोग

बक्सर जिले के डुमरी गांव में एक नीम के पेड़ से दूध जैसा सफेद तरल पदार्थ लगातार निकल रहा है। ग्रामीण इसे देवी का चमत्कार मान रहे हैं और इसे प्रसाद के रूप में इकट्ठा कर सेवन कर रहे हैं। मंदिर परिसर में स्थित इस पेड़ पर लाल कपड़े बांधकर पूजा-अर्चना भी शुरू कर दी गई है। इस अनोखी घटना को लेकर गांव में कौतूहल का माहौल है। स्थानीय लोग इसे दुनिया का आठवां अजूबा तक बता रहे हैं। ग्रामीणों के अनुसार, यह तरल पदार्थ देखने में बिल्कुल दूध जैसा है। कुछ लोगों ने इसका स्वाद भी चखा है, उनका कहना है कि इसमें दूध जैसी मिठास के साथ नीम की हल्की कड़वाहट भी महसूस होती है। इस घटना के बाद से मंदिर परिसर में दिन भर श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़ रही है। महिलाएं विशेष रूप से इसे दैवीय शक्ति का संकेत मान रही हैं। गांव की महिलाओं का मानना है कि महारानी स्वयं प्रकट हुई हैं और यह गांव पर उनकी कृपा का प्रतीक है। 24 घंटे में 15 लीटर तक गिर रहा दूधिया स्थानीय ज्योतिषी शिव विलास पांडेय ने दावा किया है कि यह तरल पिछले कई दिनों से लगातार निकल रहा है। उनके अनुसार, 24 घंटे में लगभग 10 से 15 लीटर तक दूधिया तरल पेड़ से गिर रहा है। बीते 10 दिनों में करीब 160 से 170 लीटर तरल पदार्थ निकल चुका है, जिसे लोग श्रद्धा के साथ संग्रह कर रहे हैं। गांव में इस घटना को लेकर तरह-तरह की चर्चाएं हो रही हैं और आस्था का माहौल बना हुआ है। दिन भर इस पेड़ के पास महिलाओं की भीड़ जुट रही है। महिलाएं गिलास और कटोरा लेकर इस तरल पदार्थ का सेवन करने पहुंच रही हैं। वे इस अजूबे के पीछे के वैज्ञानिक सिद्धांतों को मानने को तैयार नहीं हैं। घटना को लेकर वैज्ञानिक दृष्टिकोण भी सामने आया है। डुमरांव कृषि कॉलेज से जुड़े कृषि विज्ञानी डॉ विद्यानंद यादव, डॉ साकेत और डॉ प्रकाश गुप्ता बताते हैं कि नीम के पेड़ से निकलने वाला यह दूध जैसा सफेद तरल वास्तव में लेटेक्स या दूधी रस हो सकता है। उनके अनुसार, पेड़ की छाल में चोट लगने, टहनी कटने या छाल भेदक कीटों के हमले से ऐसा रस निकलना सामान्य जैविक प्रक्रिया है। यह पेड़ का प्राकृतिक रक्षा तंत्र होता है, जिससे वह खुद को रोग और कीटों से बचाता है। सुनिए क्या कुछ कहा ज्योतिषी और गांव की महिलाओं ने

Jan 30, 2026 - 15:18
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पेड़ से दूध निकलने को चमत्कार मान रहे ग्रामीण:बक्सर में नीम के पेड़ से लगातार निकल रहा तरल प्रदार्थ, प्रसाद के रूप में सेवन कर रहे लोग
बक्सर जिले के डुमरी गांव में एक नीम के पेड़ से दूध जैसा सफेद तरल पदार्थ लगातार निकल रहा है। ग्रामीण इसे देवी का चमत्कार मान रहे हैं और इसे प्रसाद के रूप में इकट्ठा कर सेवन कर रहे हैं। मंदिर परिसर में स्थित इस पेड़ पर लाल कपड़े बांधकर पूजा-अर्चना भी शुरू कर दी गई है। इस अनोखी घटना को लेकर गांव में कौतूहल का माहौल है। स्थानीय लोग इसे दुनिया का आठवां अजूबा तक बता रहे हैं। ग्रामीणों के अनुसार, यह तरल पदार्थ देखने में बिल्कुल दूध जैसा है। कुछ लोगों ने इसका स्वाद भी चखा है, उनका कहना है कि इसमें दूध जैसी मिठास के साथ नीम की हल्की कड़वाहट भी महसूस होती है। इस घटना के बाद से मंदिर परिसर में दिन भर श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़ रही है। महिलाएं विशेष रूप से इसे दैवीय शक्ति का संकेत मान रही हैं। गांव की महिलाओं का मानना है कि महारानी स्वयं प्रकट हुई हैं और यह गांव पर उनकी कृपा का प्रतीक है। 24 घंटे में 15 लीटर तक गिर रहा दूधिया स्थानीय ज्योतिषी शिव विलास पांडेय ने दावा किया है कि यह तरल पिछले कई दिनों से लगातार निकल रहा है। उनके अनुसार, 24 घंटे में लगभग 10 से 15 लीटर तक दूधिया तरल पेड़ से गिर रहा है। बीते 10 दिनों में करीब 160 से 170 लीटर तरल पदार्थ निकल चुका है, जिसे लोग श्रद्धा के साथ संग्रह कर रहे हैं। गांव में इस घटना को लेकर तरह-तरह की चर्चाएं हो रही हैं और आस्था का माहौल बना हुआ है। दिन भर इस पेड़ के पास महिलाओं की भीड़ जुट रही है। महिलाएं गिलास और कटोरा लेकर इस तरल पदार्थ का सेवन करने पहुंच रही हैं। वे इस अजूबे के पीछे के वैज्ञानिक सिद्धांतों को मानने को तैयार नहीं हैं। घटना को लेकर वैज्ञानिक दृष्टिकोण भी सामने आया है। डुमरांव कृषि कॉलेज से जुड़े कृषि विज्ञानी डॉ विद्यानंद यादव, डॉ साकेत और डॉ प्रकाश गुप्ता बताते हैं कि नीम के पेड़ से निकलने वाला यह दूध जैसा सफेद तरल वास्तव में लेटेक्स या दूधी रस हो सकता है। उनके अनुसार, पेड़ की छाल में चोट लगने, टहनी कटने या छाल भेदक कीटों के हमले से ऐसा रस निकलना सामान्य जैविक प्रक्रिया है। यह पेड़ का प्राकृतिक रक्षा तंत्र होता है, जिससे वह खुद को रोग और कीटों से बचाता है। सुनिए क्या कुछ कहा ज्योतिषी और गांव की महिलाओं ने