जोधपुर के मंडोर ओपन जेल में हुई कैदियों की शादी:उम्रकैद की सजा काट रहे बंदियों की जेल में हुई मुलाकात; 21 परिजनों की मौजूदगी में फेरे
जोधपुर मंडोर ओपन जेल में उम्रकैद की सजा काट रहे युवक-युवती ने बुधवार को फेरे लिए। इसके लिए हाईकोर्ट की खंडपीठ ने अनुमति दी थी। बताया जा रहा है कि यह पहला मौका था- जब किसी ओपन जेल (खुला बंदी शिविर) परिसर के भीतर दो दोषियों की शादी हुई। 21 परिजनों की मौजूदगी में मूलाराम भाटी (33) और सीमा (31) ने फेरे लिए। इस दौरान दोनों की शादी सभी रीति-रिवाज के साथ हुई। ढोल-थाली के साथ मंडप तक पहुंचे, परिजन भी रहे मौजूद दोनों की शादी पूरे रीति-रिवाज के साथ हुई। दूल्हे मूलाराम भाटी को ढोल-थाली के साथ मंडप तक लाया गया। दोनों परिवार की महिलाओं ने मंगल गीत गाए। इसके बाद वरमाला का कार्यक्रम हुआ। दोनों ने एक दूसरे को माला पहनाई। इसके बाद वैदिक मंत्रों के साथ अग्नि के सामने फेरे लिए। खेती करते-करते बढ़ीं नजदीकियां, जेल में ही हुआ प्यार जानकारी के अनुसार- नागौर जिले के अडसिंगा का रहने वाला मूलाराम करीब दो साल पहले अजमेर जेल से जोधपुर की मंडोर ओपन जेल में शिफ्ट हुआ था। मुंबई की रहने वाली सीमा को करीब डेढ़ साल पहले महिला जेल से इसी ओपन जेल में भेजा गया था। ओपन जेल के नियमों के तहत दोनों वहां खेती का काम करते थे। रोज काम के दौरान दोनों का संपर्क हुआ, बातचीत बढ़ी और धीरे-धीरे यह नजदीकियां प्यार में बदल गईं। हाल ही सीमा को 40 दिन की पैरोल (जमानत) मिली है। इसके बाद दोनों ने शादी करने का फैसला किया था। हाईकोर्ट ने कहा था- सजा का मकसद केवल दंड देना नहीं, सुधार भी सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ता मूलाराम की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता कालूराम भाटी और अधिवक्ता स्वप्न चौहान ने पैरवी की थी। राज्य सरकार की ओर से सरकारी वकील (लोक अभियोजक) सी.एस. ओझा और श्रवण सिंह राठौड़ कोर्ट में उपस्थित रहे थे। राज्य सरकार ने भी इस विवाह पर कोई आपत्ति नहीं जताई थी। हाईकोर्ट ने अपने ऐतिहासिक फैसले में साल 2022 के प्रसिद्ध 'नंदलाल बनाम राज्य' मामले के निर्णय का उल्लेख किया था। कोर्ट ने टिप्पणी करते हुए कहा था- जेल सुधार व्यवस्था का मुख्य उद्देश्य अपराधियों को केवल दंडित करना या समाज से अलग करना नहीं है, बल्कि उनका पुनर्वास करना और उन्हें समाज की मुख्यधारा से जोड़ने के अवसर प्रदान करना भी है। हाईकोर्ट ने कहा था- विवाह करना, परिवार बसाना और गरिमापूर्ण जीवन जीना भारतीय संविधा के मौकिल अधिकारियों का हिस्सा है।
जोधपुर मंडोर ओपन जेल में उम्रकैद की सजा काट रहे युवक-युवती ने बुधवार को फेरे लिए। इसके लिए हाईकोर्ट की खंडपीठ ने अनुमति दी थी। बताया जा रहा है कि यह पहला मौका था- जब किसी ओपन जेल (खुला बंदी शिविर) परिसर के भीतर दो दोषियों की शादी हुई। 21 परिजनों की मौजूदगी में मूलाराम भाटी (33) और सीमा (31) ने फेरे लिए। इस दौरान दोनों की शादी सभी रीति-रिवाज के साथ हुई। ढोल-थाली के साथ मंडप तक पहुंचे, परिजन भी रहे मौजूद दोनों की शादी पूरे रीति-रिवाज के साथ हुई। दूल्हे मूलाराम भाटी को ढोल-थाली के साथ मंडप तक लाया गया। दोनों परिवार की महिलाओं ने मंगल गीत गाए। इसके बाद वरमाला का कार्यक्रम हुआ। दोनों ने एक दूसरे को माला पहनाई। इसके बाद वैदिक मंत्रों के साथ अग्नि के सामने फेरे लिए। खेती करते-करते बढ़ीं नजदीकियां, जेल में ही हुआ प्यार जानकारी के अनुसार- नागौर जिले के अडसिंगा का रहने वाला मूलाराम करीब दो साल पहले अजमेर जेल से जोधपुर की मंडोर ओपन जेल में शिफ्ट हुआ था। मुंबई की रहने वाली सीमा को करीब डेढ़ साल पहले महिला जेल से इसी ओपन जेल में भेजा गया था। ओपन जेल के नियमों के तहत दोनों वहां खेती का काम करते थे। रोज काम के दौरान दोनों का संपर्क हुआ, बातचीत बढ़ी और धीरे-धीरे यह नजदीकियां प्यार में बदल गईं। हाल ही सीमा को 40 दिन की पैरोल (जमानत) मिली है। इसके बाद दोनों ने शादी करने का फैसला किया था। हाईकोर्ट ने कहा था- सजा का मकसद केवल दंड देना नहीं, सुधार भी सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ता मूलाराम की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता कालूराम भाटी और अधिवक्ता स्वप्न चौहान ने पैरवी की थी। राज्य सरकार की ओर से सरकारी वकील (लोक अभियोजक) सी.एस. ओझा और श्रवण सिंह राठौड़ कोर्ट में उपस्थित रहे थे। राज्य सरकार ने भी इस विवाह पर कोई आपत्ति नहीं जताई थी। हाईकोर्ट ने अपने ऐतिहासिक फैसले में साल 2022 के प्रसिद्ध 'नंदलाल बनाम राज्य' मामले के निर्णय का उल्लेख किया था। कोर्ट ने टिप्पणी करते हुए कहा था- जेल सुधार व्यवस्था का मुख्य उद्देश्य अपराधियों को केवल दंडित करना या समाज से अलग करना नहीं है, बल्कि उनका पुनर्वास करना और उन्हें समाज की मुख्यधारा से जोड़ने के अवसर प्रदान करना भी है। हाईकोर्ट ने कहा था- विवाह करना, परिवार बसाना और गरिमापूर्ण जीवन जीना भारतीय संविधा के मौकिल अधिकारियों का हिस्सा है।