सुप्रीम कोर्ट बोला-गलत फैसले पर जज को सजा नहीं:MP के न्यायिक अधिकारी निर्भय सिंह सुलिया की बर्खास्तगी रद्द की

सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को मध्य प्रदेश के न्यायिक अधिकारी निर्भय सिंह सुलिया की बर्खास्तगी रद्द कर दी। कोर्ट ने अहम टिप्पणी करते हुए कहा- सिर्फ गलत या त्रुटिपूर्ण न्यायिक आदेश पारित करने के आधार पर किसी न्यायिक अधिकारी के खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई नहीं की जा सकती। दरअसल सुलिया को वर्ष 2014 में सेवा से हटाया गया था। तब वे अतिरिक्त जिला एवं सत्र न्यायाधीश खरगोन के पद पर कार्यरत थे। सुलिया पर भ्रष्टाचार और आबकारी अधिनियम से जुड़े मामलों में जमानत याचिकाओं पर दोहरा मापदंड अपनाने का आरोप था। कहा गया था कि 50 बल्क लीटर से अधिक शराब की जब्ती वाले कुछ मामलों में उन्होंने जमानत दी, जबकि ऐसे अन्य मामलों में उसी आधार पर जमानत खारिज की। विभागीय जांच के बाद हाई कोर्ट ने उन्हें बर्खास्त कर दिया था। अब जस्टिस जेबी परदीवाला और जस्टिस केवी विश्वनाथन की पीठ ने आदेश दिया कि 27 साल तक बेदाग सेवा देने वाले जज को बिना ड्यू प्रोसेस अपनाए हटाया गया, जो न्यायसंगत नहीं है। कोर्ट ने कहा- जजमेंट एरर और भ्रष्टाचार को एक नहीं मान सकते ......................... सुप्रीम कोर्ट से जुड़ी ये खबर भी पढ़ें... दिल्ली दंगा केस में उमर खालिद-शरजील को जमानत नहीं मिली: सुप्रीम कोर्ट ने एक साल अपील करने पर रोक लगाई, 5 आरोपियों को बेल सुप्रीम कोर्ट ने 5 जनवरी को दिल्ली दंगों के आरोपी उमर खालिद और शरजील इमाम को जमानत देने से इनकार कर दिया। हालांकि 5 अन्य आरोपियों को 12 शर्तों के साथ जमानत दे दी है। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि उमर और शरजील एक साल तक इस मामले में जमानत याचिका दाखिल नहीं कर सकते हैं। पूरी खबर पढ़ें...

Jan 6, 2026 - 16:14
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सुप्रीम कोर्ट बोला-गलत फैसले पर जज को सजा नहीं:MP के न्यायिक अधिकारी निर्भय सिंह सुलिया की बर्खास्तगी रद्द की
सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को मध्य प्रदेश के न्यायिक अधिकारी निर्भय सिंह सुलिया की बर्खास्तगी रद्द कर दी। कोर्ट ने अहम टिप्पणी करते हुए कहा- सिर्फ गलत या त्रुटिपूर्ण न्यायिक आदेश पारित करने के आधार पर किसी न्यायिक अधिकारी के खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई नहीं की जा सकती। दरअसल सुलिया को वर्ष 2014 में सेवा से हटाया गया था। तब वे अतिरिक्त जिला एवं सत्र न्यायाधीश खरगोन के पद पर कार्यरत थे। सुलिया पर भ्रष्टाचार और आबकारी अधिनियम से जुड़े मामलों में जमानत याचिकाओं पर दोहरा मापदंड अपनाने का आरोप था। कहा गया था कि 50 बल्क लीटर से अधिक शराब की जब्ती वाले कुछ मामलों में उन्होंने जमानत दी, जबकि ऐसे अन्य मामलों में उसी आधार पर जमानत खारिज की। विभागीय जांच के बाद हाई कोर्ट ने उन्हें बर्खास्त कर दिया था। अब जस्टिस जेबी परदीवाला और जस्टिस केवी विश्वनाथन की पीठ ने आदेश दिया कि 27 साल तक बेदाग सेवा देने वाले जज को बिना ड्यू प्रोसेस अपनाए हटाया गया, जो न्यायसंगत नहीं है। कोर्ट ने कहा- जजमेंट एरर और भ्रष्टाचार को एक नहीं मान सकते ......................... सुप्रीम कोर्ट से जुड़ी ये खबर भी पढ़ें... दिल्ली दंगा केस में उमर खालिद-शरजील को जमानत नहीं मिली: सुप्रीम कोर्ट ने एक साल अपील करने पर रोक लगाई, 5 आरोपियों को बेल सुप्रीम कोर्ट ने 5 जनवरी को दिल्ली दंगों के आरोपी उमर खालिद और शरजील इमाम को जमानत देने से इनकार कर दिया। हालांकि 5 अन्य आरोपियों को 12 शर्तों के साथ जमानत दे दी है। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि उमर और शरजील एक साल तक इस मामले में जमानत याचिका दाखिल नहीं कर सकते हैं। पूरी खबर पढ़ें...