सरकार बोली-कई मंदिरों में प्रसाद में शराब दी जाती है:कोर्ट यह नहीं कह सकता वहां शराब मत दो; सबरीमाला केस में सुनवाई

केंद्र सरकार ने गुरुवार को सुप्रीम कोर्ट में सबरीमाला केस की सुनवाई के दौरान मंदिरों के रीति-रिवाजों का जिक्र किया। एएसजी नटराज ने कहा, दक्षिण भारतीय मंदिरों में प्रसाद के रूप में मदिरा दी जाती है। कल को आप इस पर आपत्ति नहीं उठा सकते कि मदिरा न दी जाए। एक उदाहरण देते हुए कहा, कई मंदिरों में शाकाहारी भोजन परोसा जाता है। अगर कोई व्यक्ति अपनी पसंद या अंतरात्मा की आवाज पर मांसाहारी भोजन चाहता है, तो वह किसी संप्रदाय से यह नहीं कह सकता कि यह उसका अधिकार है और उसे वही परोसा जाए। उसे श्रद्धालुओं के अधिकारों में दखल देने का अधिकार नहीं है। सुप्रीम कोर्ट की 9 जजों की बेंच ने गुरुवार को धार्मिक स्थलों पर महिलाओं के साथ भेदभाव से जुड़े मामलों में लगातार तीसरे दिन सुनवाई की। इसमें विभिन्न धर्मों में प्रचलित धार्मिक स्वतंत्रता की सीमा और दायरे पर भी विचार किया जा रहा है। तीसरे दिन की सुनवाई के 7 पॉइंट्स… सुप्रीम कोर्ट के 3 तर्क केंद्र सरकार के 4 तर्क सुप्रीम कोर्ट में 50 से ज्यादा रिव्यू पिटीशन धार्मिक स्थलों पर महिलाओं के साथ भेदभाव का मामला बीते 26 सालों से देश की अदालतों में हैं। 2018 में, 5 जजों की बेंच ने 4:1 के बहुमत से मंदिर में महिलाओं के प्रवेश पर लगी रोक हटा दी थी। इसके बाद कई पुनर्विचार याचिकाएं दायर की गईं। सुप्रीम कोर्ट की 9 जजों की संविधान बेंच 7 से 22 अप्रैल तक 50 से ज्यादा याचिकाओं पर सुनवाई करेगी। रिव्यू पिटीशनर और उनके समर्थक 7 से 9 अप्रैल तक, जबकि विरोधी 14 से 16 अप्रैल तक दलीलें देंगे। ये खबरें भी पढ़ें: सुप्रीम कोर्ट की सुनवाई की पल-पल की जानकारी के लिए नीचे के ब्लॉग से गुजर जाएं...

Apr 9, 2026 - 18:21
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सरकार बोली-कई मंदिरों में प्रसाद में शराब दी जाती है:कोर्ट यह नहीं कह सकता वहां शराब मत दो; सबरीमाला केस में सुनवाई
केंद्र सरकार ने गुरुवार को सुप्रीम कोर्ट में सबरीमाला केस की सुनवाई के दौरान मंदिरों के रीति-रिवाजों का जिक्र किया। एएसजी नटराज ने कहा, दक्षिण भारतीय मंदिरों में प्रसाद के रूप में मदिरा दी जाती है। कल को आप इस पर आपत्ति नहीं उठा सकते कि मदिरा न दी जाए। एक उदाहरण देते हुए कहा, कई मंदिरों में शाकाहारी भोजन परोसा जाता है। अगर कोई व्यक्ति अपनी पसंद या अंतरात्मा की आवाज पर मांसाहारी भोजन चाहता है, तो वह किसी संप्रदाय से यह नहीं कह सकता कि यह उसका अधिकार है और उसे वही परोसा जाए। उसे श्रद्धालुओं के अधिकारों में दखल देने का अधिकार नहीं है। सुप्रीम कोर्ट की 9 जजों की बेंच ने गुरुवार को धार्मिक स्थलों पर महिलाओं के साथ भेदभाव से जुड़े मामलों में लगातार तीसरे दिन सुनवाई की। इसमें विभिन्न धर्मों में प्रचलित धार्मिक स्वतंत्रता की सीमा और दायरे पर भी विचार किया जा रहा है। तीसरे दिन की सुनवाई के 7 पॉइंट्स… सुप्रीम कोर्ट के 3 तर्क केंद्र सरकार के 4 तर्क सुप्रीम कोर्ट में 50 से ज्यादा रिव्यू पिटीशन धार्मिक स्थलों पर महिलाओं के साथ भेदभाव का मामला बीते 26 सालों से देश की अदालतों में हैं। 2018 में, 5 जजों की बेंच ने 4:1 के बहुमत से मंदिर में महिलाओं के प्रवेश पर लगी रोक हटा दी थी। इसके बाद कई पुनर्विचार याचिकाएं दायर की गईं। सुप्रीम कोर्ट की 9 जजों की संविधान बेंच 7 से 22 अप्रैल तक 50 से ज्यादा याचिकाओं पर सुनवाई करेगी। रिव्यू पिटीशनर और उनके समर्थक 7 से 9 अप्रैल तक, जबकि विरोधी 14 से 16 अप्रैल तक दलीलें देंगे। ये खबरें भी पढ़ें: सुप्रीम कोर्ट की सुनवाई की पल-पल की जानकारी के लिए नीचे के ब्लॉग से गुजर जाएं...