लेह-लद्दाख में ड्यूटी के दौरान हादसे में जवान शहीद:जमुई के खरडीह गांव पहुंचा पार्थिव शरीर, राजकीय सम्मान के साथ दी अंतिम विदाई
जमुई के सिकंदरा प्रखंड के खरडीह गांव के जवान मनीर अंसारी ने देश की सेवा करते हुए अपनी जान गंवा दी। वे भारत सरकार के रक्षा मंत्रालय के अधीन जनरल रिजर्व इंजीनियर फोर्स (GREF) में स्टोर कीपर के पद पर लेह-लद्दाख में तैनात थे। ड्यूटी के दौरान हुए हादसे में वे शहीद हो गए। शनिवार देर रात उनका पार्थिव शरीर पैतृक गांव खरडीह पहुंचा, जिससे पूरे गांव में शोक छा गया। रविवार सुबह नमाज के बाद सिकंदरा पुलिस ने मनीर अंसारी को राजकीय सम्मान के साथ अंतिम विदाई दी। बीडीओ अतुल प्रसाद, पुलिस निरीक्षक स्वयं प्रभा और थानाध्यक्ष विकास कुमार सहित पुलिस अधिकारियों और जवानों ने पार्थिव शरीर पर पुष्प चढ़ाकर श्रद्धांजलि अर्पित की। जवानों ने सलामी देकर देश की सेवा में उनके योगदान को याद किया। इसके बाद उन्हें कर्बला में दफनाया गया। 2000 में सेना में हुए थे भर्ती परिजनों के मुताबिक, मनीर अंसारी साल 2000 में सेना में भर्ती हुए थे। वे वर्तमान में GREF में स्टोर कीपर के तौर पर लेह-लद्दाख में तैनात थे। उनके चचेरे भाई मु. जावेद ने बताया कि 3 सितंबर की शाम मनीर की पत्नी फरहीन सदफ के मोबाइल पर सेना के एक सूबेदार का फोन आया था। उन्हें बताया गया कि ड्यूटी के दौरान मनीर हादसे का शिकार हो गए हैं और उनका इलाज आर्मी अस्पताल में चल रहा है। रोड कटर मशीन पैर पर गिरने से हुए जख्मी सेना के सूबेदार ने बताया कि ड्यूटी के दौरान रोड कटर मशीन को एक फट्टे की मदद से वाहन से उतारा जा रहा था। इसी दौरान फट्टा अचानक खिसक गया और मशीन अनियंत्रित होकर पलट गई। मशीन मनीर के पैर पर गिर गई, जिससे उन्हें गंभीर चोटें आईं। हादसे के बाद उन्हें तुरंत आर्मी अस्पताल ले जाया गया, जहां डॉक्टरों ने ऑपरेशन किया। परिवार को उम्मीद थी कि इलाज के बाद मनीर ठीक होकर घर लौट आएंगे। लेकिन अगले दिन सुबह आए फोन ने परिवार की सारी उम्मीदें खत्म कर दीं। अत्यधिक ब्लड निकलने से गई जान 4 सितंबर की सुबह सेना के सूबेदार ने परिवार को मनीर की मौत की सूचना दी। परिजनों के मुताबिक उपचार के दौरान अत्यधिक ब्लड निकलने से उनकी मौत हो गई। मौत की खबर मिलते ही पत्नी फरहीन सदफ बेसुध हो गई। बेटी आलिया परवीन(19),बेटे मोहम्मद अरसलान अंसारी(15)का रो-रोकर बुरा हाल हो गया। मनीर के शहीद की खबर गांव में फैलते ही बड़ी संख्या में ग्रामीण उनके घर पहुंचने लगे। हर कोई परिवार को ढांढस बंधा रहा था, लेकिन किसी के पास परिजनों के इस असहनीय दुख को कम करने के लिए शब्द नहीं थे। मौके से आई तस्वीरें…. अंतिम विदाई में शामिल हुए सैकड़ो ग्रामीण रविवार की सुबह मनीर अंसारी के पार्थिव शरीर को अंतिम विदाई के लिए ले जाया गया तो सैकड़ों ग्रामीण अंतिम दर्शन के लिए उमड़ पड़े। आसपास के गांवों से भी लोग पहुंचे। जनप्रतिनिधियों, ग्रामीणों और पुलिस पदाधिकारियों ने उन्हें श्रद्धांजलि दी। कई स्थानीय नेता सहित बड़ी संख्या में ग्रामीण अंतिम यात्रा में शामिल हुए। मनीर अंसारी ने वर्ष 2000 में सेवा शुरू की थी और करीब 26 सालों तक देश की सेवा की। लेह-लद्दाख जैसे दुर्गम क्षेत्र में ड्यूटी निभाते हुए उनका जीवन समाप्त हो गया। परिवार ने अपना सहारा खो दिया, वहीं खरडीह गांव ने देश सेवा में समर्पित अपना एक बेटा खो दिया। अंतिम विदाई के दौरान मौजूद लोगों ने कहा कि मनीर अंसारी का बलिदान हमेशा याद रखा जाएगा।
जमुई के सिकंदरा प्रखंड के खरडीह गांव के जवान मनीर अंसारी ने देश की सेवा करते हुए अपनी जान गंवा दी। वे भारत सरकार के रक्षा मंत्रालय के अधीन जनरल रिजर्व इंजीनियर फोर्स (GREF) में स्टोर कीपर के पद पर लेह-लद्दाख में तैनात थे। ड्यूटी के दौरान हुए हादसे में वे शहीद हो गए। शनिवार देर रात उनका पार्थिव शरीर पैतृक गांव खरडीह पहुंचा, जिससे पूरे गांव में शोक छा गया। रविवार सुबह नमाज के बाद सिकंदरा पुलिस ने मनीर अंसारी को राजकीय सम्मान के साथ अंतिम विदाई दी। बीडीओ अतुल प्रसाद, पुलिस निरीक्षक स्वयं प्रभा और थानाध्यक्ष विकास कुमार सहित पुलिस अधिकारियों और जवानों ने पार्थिव शरीर पर पुष्प चढ़ाकर श्रद्धांजलि अर्पित की। जवानों ने सलामी देकर देश की सेवा में उनके योगदान को याद किया। इसके बाद उन्हें कर्बला में दफनाया गया। 2000 में सेना में हुए थे भर्ती परिजनों के मुताबिक, मनीर अंसारी साल 2000 में सेना में भर्ती हुए थे। वे वर्तमान में GREF में स्टोर कीपर के तौर पर लेह-लद्दाख में तैनात थे। उनके चचेरे भाई मु. जावेद ने बताया कि 3 सितंबर की शाम मनीर की पत्नी फरहीन सदफ के मोबाइल पर सेना के एक सूबेदार का फोन आया था। उन्हें बताया गया कि ड्यूटी के दौरान मनीर हादसे का शिकार हो गए हैं और उनका इलाज आर्मी अस्पताल में चल रहा है। रोड कटर मशीन पैर पर गिरने से हुए जख्मी सेना के सूबेदार ने बताया कि ड्यूटी के दौरान रोड कटर मशीन को एक फट्टे की मदद से वाहन से उतारा जा रहा था। इसी दौरान फट्टा अचानक खिसक गया और मशीन अनियंत्रित होकर पलट गई। मशीन मनीर के पैर पर गिर गई, जिससे उन्हें गंभीर चोटें आईं। हादसे के बाद उन्हें तुरंत आर्मी अस्पताल ले जाया गया, जहां डॉक्टरों ने ऑपरेशन किया। परिवार को उम्मीद थी कि इलाज के बाद मनीर ठीक होकर घर लौट आएंगे। लेकिन अगले दिन सुबह आए फोन ने परिवार की सारी उम्मीदें खत्म कर दीं। अत्यधिक ब्लड निकलने से गई जान 4 सितंबर की सुबह सेना के सूबेदार ने परिवार को मनीर की मौत की सूचना दी। परिजनों के मुताबिक उपचार के दौरान अत्यधिक ब्लड निकलने से उनकी मौत हो गई। मौत की खबर मिलते ही पत्नी फरहीन सदफ बेसुध हो गई। बेटी आलिया परवीन(19),बेटे मोहम्मद अरसलान अंसारी(15)का रो-रोकर बुरा हाल हो गया। मनीर के शहीद की खबर गांव में फैलते ही बड़ी संख्या में ग्रामीण उनके घर पहुंचने लगे। हर कोई परिवार को ढांढस बंधा रहा था, लेकिन किसी के पास परिजनों के इस असहनीय दुख को कम करने के लिए शब्द नहीं थे। मौके से आई तस्वीरें…. अंतिम विदाई में शामिल हुए सैकड़ो ग्रामीण रविवार की सुबह मनीर अंसारी के पार्थिव शरीर को अंतिम विदाई के लिए ले जाया गया तो सैकड़ों ग्रामीण अंतिम दर्शन के लिए उमड़ पड़े। आसपास के गांवों से भी लोग पहुंचे। जनप्रतिनिधियों, ग्रामीणों और पुलिस पदाधिकारियों ने उन्हें श्रद्धांजलि दी। कई स्थानीय नेता सहित बड़ी संख्या में ग्रामीण अंतिम यात्रा में शामिल हुए। मनीर अंसारी ने वर्ष 2000 में सेवा शुरू की थी और करीब 26 सालों तक देश की सेवा की। लेह-लद्दाख जैसे दुर्गम क्षेत्र में ड्यूटी निभाते हुए उनका जीवन समाप्त हो गया। परिवार ने अपना सहारा खो दिया, वहीं खरडीह गांव ने देश सेवा में समर्पित अपना एक बेटा खो दिया। अंतिम विदाई के दौरान मौजूद लोगों ने कहा कि मनीर अंसारी का बलिदान हमेशा याद रखा जाएगा।