चीन ने क्यों कहा भारत का एहसान कभी नहीं भूलेंगे.. दुनिया हैरान!

मजबूरियां बड़े-बड़े देशों से क्या-क्या करवा सकती हैं, उसका अंदाजा आपको लग जाएगा। अगर बात चीन की हो तो कहानी और भी ज्यादा दिलचस्प हो जाती है। कूटनीति में कई बार ऐसी चीज बोलनी पड़ती है जिन्हें सुनकर यकीन नहीं होता। भारत को समय-समय पर उकसाने वाला चीन अचानक भारत की ही तारीफ में हद से आगे निकल चुका है। दरअसल आपको बता दें कि नई दिल्ली में चीनी पीपल्स लिबरेशन आर्मी यानी कि पीएलए की 99 वर्षगांठ पर आयोजित समारोह में चीन के नए डिफेंस अटैची रियर एडमिरल यू जियान ने जो बोला जो बयान दिया उसने बीजिंग के हेकड़ी के परखच्चे समय उड़ा दिए। रेड आर्मी के इस बड़े अधिकारी ने खुले मंच से भारतीय सेना का आभार जताया और कहा है कि चीन भारत के इस एहसान को कभी नहीं भूलेगा। जरा याद कीजिए पिछले साल जून का वो महीना जब केरल तट के पास एक मालवाहक कारगो जहाज में भयंकर आग लग गई थी। उसमें बड़ा विस्फोट हुआ था। उस जहाज पर फंसे 12 चीनी चालक दल के सदस्यों को मौत के मुंह से बाहर निकालने वाला कोई और नहीं बल्कि भारतीय सेना और भारतीय नौसेना थी। इसे भी पढ़ें: Jaishankar-Wang Yi Meeting: सीमा पर शांति के बिना सामान्य नहीं होंगे रिश्ते, जिनपिंग के मंत्री को सामने बिठा जयशंकर ने दिया साफ संदेशचीन जो समंदर में अपनी दादागिरी दिखाता है। आज उसी भारत के सामने मजबूर है क्योंकि चीनी चालक दल के सदस्यों की जान भारतीय सेना ने बचाई थी। रियर एडमिरल यूजियान को मंच पर यह कबूल करना पड़ा कि भारत और चीन के साझा हित उनके आपसी मतभेदों से कहीं ज्यादा बड़े हैं। सिर्फ इतना ही नहीं ड्रैगन के इस अधिकारी ने यह भी कहा कि वह भारत के साथ राजनीतिक और सैन्य स्तर पर लगातार संवाद बनाए रखना चाहते हैं। आपसी विश्वास बढ़ाना चाहते हैं। जरा सोचिए जो चीन कल तक भारत को हर मोर्चे पर घेरने की साजिश रचता था। आज वहीं चीन कह रहा है कि भारत चीन ऐसे पड़ोसी देश हैं जिन्हें अलग नहीं किया जा सकता। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और राष्ट्रपति जिंगपिंग की मुलाकातों के बाद से ड्रैगन के तेवर अचानक पूरी तरह से बदल चुके हैं और इसे ही कहते हैं वक्त का पहिया। सरहद पर आंख दिखाने वाला चीन आज भारत की इंसानियत और ताकत के आगे झुकने पर मजबूर हो गया है। इसे भी पढ़ें: भारत में बना ऐसा चुंबक चीन भी हैरान, ऐसा क्या करेगा कि देश के लिए पैसा खींचकर लाएगा?विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने बुधवार को चीनी विदेश मंत्री वांग यी से कहा कि सामान्य राजनयिक बातचीत बहाल करने के लिए सीमावर्ती इलाकों में स्थिरता बनाए रखना एक "ज़रूरी शर्त" है। उन्होंने इस बात पर ज़ोर दिया कि दोनों देशों के संबंध आपसी सम्मान, हितों और संवेदनशीलता पर आधारित होने चाहिए। बातचीत के दौरान, जयशंकर ने अपने चीनी समकक्ष के सामने अहम आर्थिक चिंताएं रखीं। उन्होंने बाज़ार में प्रवेश की बाधाओं, बढ़ते व्यापार घाटे और अनिश्चित ग्लोबल सप्लाई नेटवर्क की ओर ध्यान दिलाया। दोनों राजनयिक प्रतिनिधि फिलीपींस की राजधानी में 'एसोसिएशन ऑफ़ साउथईस्ट एशियन नेशंस' (ASEAN) के तहत आयोजित अहम मंत्री-स्तरीय चर्चाओं में हिस्सा लेने के लिए इकट्ठा हुए थे। पूर्वी लद्दाख में चार साल पहले शुरू हुए लंबे सैन्य गतिरोध के कारण दोनों एशियाई देशों के बीच काफी तनाव रहा था, लेकिन हाल के समय में उनके संबंधों को सामान्य बनाने की दिशा में कदम उठाए गए हैं। इसे भी पढ़ें: भारत में बना ऐसा चुंबक चीन भी हैरान, ऐसा क्या करेगा कि देश के लिए पैसा खींचकर लाएगा?प्रतिनिधिमंडल को संबोधित करते हुए जयशंकर ने ज़ोर दिया कि एक स्थिर और सहयोगी साझेदारी के लिए साझा सिद्धांतों पर आधारित एक बुनियादी ढांचा ज़रूरी है। अपनी शुरुआती बात में उन्होंने कहा हमारा मानना ​​है कि आपसी सम्मान, आपसी हित और आपसी संवेदनशीलता के आधार पर ही एक स्थिर और सहयोगी संबंध को सबसे बेहतर ढंग से विकसित किया जा सकता है। उन्होंने आगे कहा इस तरह का संबंध बहु-ध्रुवीय एशिया और बहु-ध्रुवीय दुनिया में अहम योगदान दे सकता है। लाइन ऑफ़ एक्चुअल कंट्रोल (LAC) पर शांति बनाए रखने की बेहद ज़रूरत को दोहराते हुए, मंत्री ने कहा कि सीमा पर स्थिरता से कोई समझौता नहीं किया जा सकता। 

Jul 22, 2026 - 20:13
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चीन ने क्यों कहा भारत का एहसान कभी नहीं भूलेंगे.. दुनिया हैरान!
मजबूरियां बड़े-बड़े देशों से क्या-क्या करवा सकती हैं, उसका अंदाजा आपको लग जाएगा। अगर बात चीन की हो तो कहानी और भी ज्यादा दिलचस्प हो जाती है। कूटनीति में कई बार ऐसी चीज बोलनी पड़ती है जिन्हें सुनकर यकीन नहीं होता। भारत को समय-समय पर उकसाने वाला चीन अचानक भारत की ही तारीफ में हद से आगे निकल चुका है। दरअसल आपको बता दें कि नई दिल्ली में चीनी पीपल्स लिबरेशन आर्मी यानी कि पीएलए की 99 वर्षगांठ पर आयोजित समारोह में चीन के नए डिफेंस अटैची रियर एडमिरल यू जियान ने जो बोला जो बयान दिया उसने बीजिंग के हेकड़ी के परखच्चे समय उड़ा दिए। रेड आर्मी के इस बड़े अधिकारी ने खुले मंच से भारतीय सेना का आभार जताया और कहा है कि चीन भारत के इस एहसान को कभी नहीं भूलेगा। जरा याद कीजिए पिछले साल जून का वो महीना जब केरल तट के पास एक मालवाहक कारगो जहाज में भयंकर आग लग गई थी। उसमें बड़ा विस्फोट हुआ था। उस जहाज पर फंसे 12 चीनी चालक दल के सदस्यों को मौत के मुंह से बाहर निकालने वाला कोई और नहीं बल्कि भारतीय सेना और भारतीय नौसेना थी। 

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चीन जो समंदर में अपनी दादागिरी दिखाता है। आज उसी भारत के सामने मजबूर है क्योंकि चीनी चालक दल के सदस्यों की जान भारतीय सेना ने बचाई थी। रियर एडमिरल यूजियान को मंच पर यह कबूल करना पड़ा कि भारत और चीन के साझा हित उनके आपसी मतभेदों से कहीं ज्यादा बड़े हैं। सिर्फ इतना ही नहीं ड्रैगन के इस अधिकारी ने यह भी कहा कि वह भारत के साथ राजनीतिक और सैन्य स्तर पर लगातार संवाद बनाए रखना चाहते हैं। आपसी विश्वास बढ़ाना चाहते हैं। जरा सोचिए जो चीन कल तक भारत को हर मोर्चे पर घेरने की साजिश रचता था। आज वहीं चीन कह रहा है कि भारत चीन ऐसे पड़ोसी देश हैं जिन्हें अलग नहीं किया जा सकता। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और राष्ट्रपति जिंगपिंग की मुलाकातों के बाद से ड्रैगन के तेवर अचानक पूरी तरह से बदल चुके हैं और इसे ही कहते हैं वक्त का पहिया। सरहद पर आंख दिखाने वाला चीन आज भारत की इंसानियत और ताकत के आगे झुकने पर मजबूर हो गया है। 

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विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने बुधवार को चीनी विदेश मंत्री वांग यी से कहा कि सामान्य राजनयिक बातचीत बहाल करने के लिए सीमावर्ती इलाकों में स्थिरता बनाए रखना एक "ज़रूरी शर्त" है। उन्होंने इस बात पर ज़ोर दिया कि दोनों देशों के संबंध आपसी सम्मान, हितों और संवेदनशीलता पर आधारित होने चाहिए। बातचीत के दौरान, जयशंकर ने अपने चीनी समकक्ष के सामने अहम आर्थिक चिंताएं रखीं। उन्होंने बाज़ार में प्रवेश की बाधाओं, बढ़ते व्यापार घाटे और अनिश्चित ग्लोबल सप्लाई नेटवर्क की ओर ध्यान दिलाया। दोनों राजनयिक प्रतिनिधि फिलीपींस की राजधानी में 'एसोसिएशन ऑफ़ साउथईस्ट एशियन नेशंस' (ASEAN) के तहत आयोजित अहम मंत्री-स्तरीय चर्चाओं में हिस्सा लेने के लिए इकट्ठा हुए थे। पूर्वी लद्दाख में चार साल पहले शुरू हुए लंबे सैन्य गतिरोध के कारण दोनों एशियाई देशों के बीच काफी तनाव रहा था, लेकिन हाल के समय में उनके संबंधों को सामान्य बनाने की दिशा में कदम उठाए गए हैं। 

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प्रतिनिधिमंडल को संबोधित करते हुए जयशंकर ने ज़ोर दिया कि एक स्थिर और सहयोगी साझेदारी के लिए साझा सिद्धांतों पर आधारित एक बुनियादी ढांचा ज़रूरी है। अपनी शुरुआती बात में उन्होंने कहा हमारा मानना ​​है कि आपसी सम्मान, आपसी हित और आपसी संवेदनशीलता के आधार पर ही एक स्थिर और सहयोगी संबंध को सबसे बेहतर ढंग से विकसित किया जा सकता है। उन्होंने आगे कहा इस तरह का संबंध बहु-ध्रुवीय एशिया और बहु-ध्रुवीय दुनिया में अहम योगदान दे सकता है। लाइन ऑफ़ एक्चुअल कंट्रोल (LAC) पर शांति बनाए रखने की बेहद ज़रूरत को दोहराते हुए, मंत्री ने कहा कि सीमा पर स्थिरता से कोई समझौता नहीं किया जा सकता।