शेख हसीना का तख्ता पलट होने के बाद से ही बांग्लादेश किस तरह से भारत विरोधी रास्ते पर चल रहा है उसके लगातार सबूत सामने आ रहे हैं। पहले तो पाकिस्तान के इशारों पर मोहम्मद यूनुस ने भारत के खिलाफ खूब जहर उगला और फिर ऐसे फैसले लिए जिसने दोनों देशों के रिश्तों में खटास पैदा करने का काम किया। लेकिन अब तारिक रहमान भी पीएम बनने के बाद भारत विरोधी एजेंडे पर काम करते हुए दिखाई दे रहे हैं। तारिक रहमान अब भारत के दुश्मनों से हाथ मिलाकर भारत को कमजोर करने वाले फैसले ले रहे हैं। पीएम तारिक रहमान ने भारत के साथ चली आ रही परंपरा को तोड़ते हुए पहली विदेश यात्रा के तौर पर चीन का चयन किया और अब तारिक चीन को बॉर्डर इलाके में मजबूत करने के लिए जमीन मुहैया कराने में जुटे हैं। फिर चाहे वह तीस्ता प्रोजेक्ट हो या लाल मॉडरहाट एयरबेस को डेवलप करने की योजना हो जो कि भारतीय सीमा से 20 किमी से भी कम दूरी पर है और भारत के संवेदनशील चिकन नेक के काफी करीब पड़ता है।
ऐसे में यहां चीन की मौजूदगी रणनीतिक रूप से ना केवल खतरनाक बल्कि चिंताजनक भी है। यानी कि तारीख की ओर से चीन को बांग्लादेश को उस हर कोने में घुसाने की कोशिश हो रही है जो भारत के लिए खतरा बन सके। यह सब देखकर भारत भी अलर्ट पर है। बांग्लादेश में चीन की गतिविधियों पर पेन नजर बनाए हुए हैं और बॉर्डर पर हर साजिश का मुंहतोड़ जवाब देने की तैयारी शुरू हो गई है। चिकन नेक की सुरक्षा को पुख्ता करने के लिए हाल ही में भारत ने कई कदम उठाए हैं। कुछ दिन पहले ही भारतीय सेना प्रमुख जनरल धीरज सेठ ने चिकन नेक यानी सिलीगुड़ी कॉरिडोर का दौरा किया था। इस दौरान उन्होंने सुरक्षा रणनीतियों और तमाम तैयारियों की बड़ी समीक्षा की थी। लेकिन अब खबर है कि गृह मंत्री अमित शाह भी चिकन नेक का दौरा करने जा रहे हैं। इस खबर ने बांग्लादेश में खलबली मचा दी है। अब हर जगह इस बात की चर्चा हो रही है कि क्या बांग्लादेश बॉर्डर पर कुछ बड़ा होने वाला है।
सिलगुड़ी में बीएसएफ की जुमागा सीमा चौकी का दौरा करेंगे। 18वीं बटालियन बॉर्डर आउटपोस्ट पर जवानों से बातचीत करेंगे। इस मौके पर बीएसएफ के अलग-अलग विकास कार्यों का उद्घाटन और शिलान्यास भी करेंगे। यही नहीं बल्कि शाह पश्चिम बंगाल में बॉर्डर से जुड़े मामलों पर बैठक की अध्यक्षता करेंगे। इसके बाद वे पश्चिम बंगाल में तीन नए कानूनों की भी समीक्षा मीटिंग लेंगे। दरअसल चीन की लंबे समय से सिलुगुड़ी कॉरिडोर यानी कि चिकन नेक पर बोरी नजर रही है। ऐसे में बीजिंग का बॉर्डर के करीब आना खतरे की घंटी से कम नहीं है। भारत भी इस बात को अच्छी तरह से जानता है। इसीलिए भारत चिकनेक और बांग्लादेश बॉर्डर से लगते इलाकों में सुरक्षा व्यवस्था को लगातार मजबूत कर रहा है।