चिकन नेक कॉरिडोर में 40 किमी अंडरग्राउंड रेल ट्रैक बनेगा:किशनगंज में 6 किमी टनल, 4 नई लाइन बिछेंगी, पूर्वोत्तर कनेक्टिविटी होगी मजबूत
केंद्र सरकार ने भारत-बांग्लादेश और नेपाल सीमा से सटे 'चिकन नेक कॉरिडोर' की सुरक्षा को अभेद्य बनाने की तैयारी शुरू कर दी है। इस अति महत्वपूर्ण सामरिक क्षेत्र में 40 किलोमीटर लंबी अंडरग्राउंड रेल ट्रैक का निर्माण किया जाएगा, साथ ही चार नई रेल लाइनें भी बिछाई जाएंगी। केंद्रीय रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने सोमवार को पत्रकारों को यह जानकारी दी। 'चिकन नेक' के अंतर्गत पश्चिम बंगाल के उत्तर दिनाजपुर जिले में कानकी से इस्लामपुर थाना क्षेत्र तक का इलाका आता है। बिहार के किशनगंज में 6 किलोमीटर का क्षेत्र
इसके मध्य में लगभग 6 किलोमीटर का क्षेत्र बिहार के किशनगंज जिले में पड़ता है। यह क्षेत्र सामरिक दृष्टिकोण से अत्यंत महत्वपूर्ण है, क्योंकि यहां से बांग्लादेश सीमा की दूरी महज 25 किलोमीटर और नेपाल लगभग 50 किलोमीटर दूर है। भारत के मानचित्र में पश्चिम बंगाल और बिहार का यह इलाका मुर्गी की गर्दन जैसा दिखता है, इसलिए इसे 'चिकन नेक' कहा जाता है। इस 40 से 45 किलोमीटर के संकरे क्षेत्र से सड़क और रेल मार्ग एक साथ गुजरते हैं। यदि इन मार्गों को अवरुद्ध कर दिया जाए, तो पूर्वोत्तर के सात राज्यों का शेष भारत से संपर्क कट सकता है, यही कारण है कि केंद्र सरकार इस पूरे इलाके पर विशेष ध्यान दे रही है। चिकन नेक को लेकर विवाद टिप्पणी भी आ चुकी
इस कॉरिडोर की संवेदनशीलता को देखते हुए, पहले भी ऐसी धमकियां सामने आ चुकी हैं। नागरिकता संशोधन अधिनियम (CAA) लागू होने के बाद, शारजील इमाम ने 'चिकन नेक' को काटने की धमकी दी थी। दिल्ली जेल में बंद शरजील इमाम ने साल 2020 में अपने एक भाषण में कहा था कि चिकन नेक को यदि हम काट दे तो असम अलग हो जाएगा और सरकार को हमारी बात मजबूरन मानना पड़ेगा ।वही बांग्लादेश में शेख हसीना सरकार के तख्ता पलट के बाद अंतरिम सरकार के नेता मोहम्मद युनुस भी कई बार इस इलाके को लेकर विवादास्पद बयान दे चुके है। बांग्लादेश चीन के हाथों की कठपुतली
बांग्लादेश और चीन की नजदीकियां किसी से छुपी हुई नहीं है। बांग्लादेश चीन के हाथों की कठपुतली बन चुका है और चिकन नेक कॉरिडोर से सटे बांग्लादेश में चीन कई प्रोजेक्ट पर काम कर रहा है ।जिसे देखते हुए अब भारत सरकार ने भी इस क्षेत्र की सुरक्षा को लेकर ठोस कदम उठाना शुरू कर दिया है । बीते दिनों गृहमंत्री अमित शाह ने सिलीगुड़ी दौरे के दौरान कहा था कि चिकन नेक भारत की भूमि है किसी के बाप की भूमि नहीं है ।इसी से समझा जा सकता है कि यह इलाका कितना महत्वपूर्ण है ।किशनगंज में सेना के कई कैंप प्रस्तावित है जिनके लिए जमीन अधिग्रहण की प्रक्रिया शुरू हो चुकी है। डिफेंस लॉजिस्टिक्स की आवाजाही पक्की हो सकेगी
कॉरिडोर की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए इस पूरे इलाके की ऐसी किलेबंदी की जा रही है कि परिंदा भी पर न मार सके। 40 किलोमीटर लंबे रेलवे टनल और चार नई रेल लाइन के निर्माण से पूर्वोत्तर के सात राज्यों के साथ शेष भारत का न सिर्फ संपर्कमजबूत होगा बल्कि डिफेंस लॉजिस्टिक्स की बिना रुकावट आवाजाही पक्की हो सकेगी।
केंद्र सरकार ने भारत-बांग्लादेश और नेपाल सीमा से सटे 'चिकन नेक कॉरिडोर' की सुरक्षा को अभेद्य बनाने की तैयारी शुरू कर दी है। इस अति महत्वपूर्ण सामरिक क्षेत्र में 40 किलोमीटर लंबी अंडरग्राउंड रेल ट्रैक का निर्माण किया जाएगा, साथ ही चार नई रेल लाइनें भी बिछाई जाएंगी। केंद्रीय रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने सोमवार को पत्रकारों को यह जानकारी दी। 'चिकन नेक' के अंतर्गत पश्चिम बंगाल के उत्तर दिनाजपुर जिले में कानकी से इस्लामपुर थाना क्षेत्र तक का इलाका आता है। बिहार के किशनगंज में 6 किलोमीटर का क्षेत्र
इसके मध्य में लगभग 6 किलोमीटर का क्षेत्र बिहार के किशनगंज जिले में पड़ता है। यह क्षेत्र सामरिक दृष्टिकोण से अत्यंत महत्वपूर्ण है, क्योंकि यहां से बांग्लादेश सीमा की दूरी महज 25 किलोमीटर और नेपाल लगभग 50 किलोमीटर दूर है। भारत के मानचित्र में पश्चिम बंगाल और बिहार का यह इलाका मुर्गी की गर्दन जैसा दिखता है, इसलिए इसे 'चिकन नेक' कहा जाता है। इस 40 से 45 किलोमीटर के संकरे क्षेत्र से सड़क और रेल मार्ग एक साथ गुजरते हैं। यदि इन मार्गों को अवरुद्ध कर दिया जाए, तो पूर्वोत्तर के सात राज्यों का शेष भारत से संपर्क कट सकता है, यही कारण है कि केंद्र सरकार इस पूरे इलाके पर विशेष ध्यान दे रही है। चिकन नेक को लेकर विवाद टिप्पणी भी आ चुकी
इस कॉरिडोर की संवेदनशीलता को देखते हुए, पहले भी ऐसी धमकियां सामने आ चुकी हैं। नागरिकता संशोधन अधिनियम (CAA) लागू होने के बाद, शारजील इमाम ने 'चिकन नेक' को काटने की धमकी दी थी। दिल्ली जेल में बंद शरजील इमाम ने साल 2020 में अपने एक भाषण में कहा था कि चिकन नेक को यदि हम काट दे तो असम अलग हो जाएगा और सरकार को हमारी बात मजबूरन मानना पड़ेगा ।वही बांग्लादेश में शेख हसीना सरकार के तख्ता पलट के बाद अंतरिम सरकार के नेता मोहम्मद युनुस भी कई बार इस इलाके को लेकर विवादास्पद बयान दे चुके है। बांग्लादेश चीन के हाथों की कठपुतली
बांग्लादेश और चीन की नजदीकियां किसी से छुपी हुई नहीं है। बांग्लादेश चीन के हाथों की कठपुतली बन चुका है और चिकन नेक कॉरिडोर से सटे बांग्लादेश में चीन कई प्रोजेक्ट पर काम कर रहा है ।जिसे देखते हुए अब भारत सरकार ने भी इस क्षेत्र की सुरक्षा को लेकर ठोस कदम उठाना शुरू कर दिया है । बीते दिनों गृहमंत्री अमित शाह ने सिलीगुड़ी दौरे के दौरान कहा था कि चिकन नेक भारत की भूमि है किसी के बाप की भूमि नहीं है ।इसी से समझा जा सकता है कि यह इलाका कितना महत्वपूर्ण है ।किशनगंज में सेना के कई कैंप प्रस्तावित है जिनके लिए जमीन अधिग्रहण की प्रक्रिया शुरू हो चुकी है। डिफेंस लॉजिस्टिक्स की आवाजाही पक्की हो सकेगी
कॉरिडोर की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए इस पूरे इलाके की ऐसी किलेबंदी की जा रही है कि परिंदा भी पर न मार सके। 40 किलोमीटर लंबे रेलवे टनल और चार नई रेल लाइन के निर्माण से पूर्वोत्तर के सात राज्यों के साथ शेष भारत का न सिर्फ संपर्कमजबूत होगा बल्कि डिफेंस लॉजिस्टिक्स की बिना रुकावट आवाजाही पक्की हो सकेगी।