कौन हैं मेजर नव्या शेखावत? राष्ट्रपति मुर्मू की पहली महिला एडीसी बनकर रचा इतिहास
Who is Major Navya Shekhawat: राजस्थान के सीकर जिले की रहने वाली मेजर नव्या शेखावत ने राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू की पहली महिला थल सेना (Indian Army) एडीसी (Aide-de-Camp) बनकर इतिहास रच दिया है। राष्ट्रपति भवन में आधिकारिक कार्यक्रमों और सैन्य ...
Who is Major Navya Shekhawat: राजस्थान के सीकर जिले की रहने वाली मेजर नव्या शेखावत ने राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू की पहली महिला थल सेना (Indian Army) एडीसी (Aide-de-Camp) बनकर इतिहास रच दिया है। राष्ट्रपति भवन में आधिकारिक कार्यक्रमों और सैन्य समारोहों के दौरान वे राष्ट्रपति के साथ महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं।
कौन हैं मेजर नव्या शेखावत?
- गृह नगर : मेजर नव्या शेखावत राजस्थान के सीकर जिले की रहने वाली हैं।
- शिक्षा और चयन : उन्होंने संघ लोक सेवा आयोग (UPSC) की संयुक्त रक्षा सेवा (CDS) परीक्षा में सफलता प्राप्त की।
- सैन्य प्रशिक्षण : चयन के बाद उन्होंने चेन्नई स्थित ऑफिसर्स ट्रेनिंग अकादमी (OTA Chennai) से शॉर्ट सर्विस कमीशन महिला नॉन-टेक्निकल कोर्स का प्रशिक्षण पूरा किया।
- सेना में कमीशन : प्रशिक्षण के बाद उन्हें वर्ष 2021 में भारतीय सेना की 'आर्मी सर्विस कॉर्प्स' (Army Service Corps - ASC) में कमीशन मिला, जो सेना के लॉजिस्टिक्स और सप्लाई चेन प्रबंधन का कार्य संभालती है।
राष्ट्रपति की ADC बनने का रिकॉर्ड
- भारतीय थल सेना की पहली महिला ADC : मेजर नव्या शेखावत भारतीय सेना (Indian Army) की पहली महिला अधिकारी हैं, जिन्हें देश के राष्ट्रपति के एडीसी पद पर नियुक्त किया गया है।
- तीनों सेनाओं में दूसरी महिला अधिकारी : तीनों सशस्त्र बलों (थल सेना, नौसेना और वायु सेना) को मिलाकर देखें तो वे इस पद पर पहुंचने वाली दूसरी महिला अधिकारी हैं। उनसे पहले वर्ष 2025 में भारतीय नौसेना की लेफ्टिनेंट कमांडर यशस्वी सोलंकी को राष्ट्रपति की पहली महिला एडीसी बनने का गौरव प्राप्त हुआ था।
क्या होती है राष्ट्रपति के एडीसी (Aide-de-Camp) की भूमिका?
- संख्या और संरचना : राष्ट्रपति के पास परंपरा के अनुसार कुल 5 सैन्य एडीसी (ADCs) तैनात होते हैं, जिनमें 3 थल सेना से और 1-1 नौसेना व वायु सेना से होते हैं।
- जिम्मेदारियां : एडीसी केवल आधिकारिक कार्यक्रमों में राष्ट्रपति के साथ उपस्थित रहने तक सीमित नहीं होते, बल्कि वे राष्ट्रपति भवन के औपचारिक आयोजनों, सैन्य प्रोटोकॉल, समन्वय और आधिकारिक कार्यक्रमों के संचालन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।
भारतीय सेना में महिलाओं की बढ़ती भूमिका की मिसाल
भारतीय सेना में महिलाओं की अधिकारी के रूप में एंट्री की शुरुआत 1990 के दशक की शुरुआत (1992) में शॉर्ट सर्विस कमीशन के ज़रिए हुई थी। वर्ष 2020 में उच्चतम न्यायालय के ऐतिहासिक फैसले (बबिता पूनिया केस) के बाद महिला अधिकारियों के लिए आर्मी सर्विस कॉर्प्स समेत विभिन्न शाखाओं में स्थायी कमीशन (Permanent Commission) के रास्ते खुले। मेजर नव्या शेखावत की यह ऐतिहासिक उपलब्धि भारतीय सशस्त्र बलों में महिलाओं के बढ़ते अवसरों और सशक्तिकरण की एक प्रमुख मिसाल है।



