कांग्रेस ने मनरेगा पर केंद्र सरकार की नीतियों का विरोधकिया:ग्रामीण गरीबों के संवैधानिक अधिकारों की रक्षा के लिए संघर्ष का ऐलान

भदोही में कांग्रेस जिलाध्यक्ष वसीम अंसारी ने शनिवार को केंद्र सरकार की जनविरोधी नीतियों पर निशाना साधा। उन्होंने कहा कि भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस मनरेगा और ग्रामीण गरीबों के संवैधानिक अधिकारों की रक्षा के लिए सड़क से संसद तक संघर्ष करेगी। उत्तर प्रदेश के कोऑर्डिनेटर दयाशंकर पांडेय और जिलाध्यक्ष वसीम अंसारी ने कांग्रेस की तीन प्रमुख मांगें बताईं। इनमें VB GRAM G कानून को तत्काल वापस लेना, मनरेगा को अधिकार आधारित कानून के रूप में पूरी तरह बहाल करना और काम के अधिकार तथा पंचायतों के संवैधानिक अधिकारों को पुनः स्थापित करना शामिल है। इन मांगों को लेकर कांग्रेस पार्टी 10 जनवरी से 25 फरवरी तक देशव्यापी "मनरेगा बचाओ संग्राम" अभियान चला रही है। यह अभियान काम के अधिकार की रक्षा के लिए एक राष्ट्रीय पहल है। श्री पांडेय ने जोर देकर कहा कि मनरेगा कोई दान नहीं, बल्कि कानून द्वारा दी गई गारंटी है। उन्होंने बताया कि इस योजना से करोड़ों गरीबों को गांवों में रोजगार मिला, पलायन रुका, ग्रामीण मजदूरी बढ़ी और महिलाओं की आर्थिक आत्मनिर्भरता मजबूत हुई। हालांकि, कांग्रेस नेताओं ने आरोप लगाया कि केंद्र सरकार द्वारा लाया गया VB GRAM G कानून इसी अधिकार को समाप्त करने की साजिश है। उन्होंने कहा कि नए कानून से काम का अधिकार केवल अनुमति तक सीमित हो जाएगा। कांग्रेस ने यह भी आरोप लगाया कि सीमित बजट के कारण संकट के समय काम बंद हो सकता है। दिल्ली से काम और फंड तय होने से पंचायतें व ग्राम सभाएं कमजोर होंगी। 60 दिन का कार्य ब्लैकआउट सबसे जरूरतमंद समय में काम न देने को वैध बना देगा। नेताओं ने कहा कि मजदूरी असुरक्षित और घटाई जा सकने वाली हो जाएगी। राज्यों पर 40 प्रतिशत फंड का बोझ डालकर संघीय ढांचे को कमजोर किया जाएगा। इसके अतिरिक्त, बायोमेट्रिक और ऐप आधारित तकनीकी अड़चनों से मजदूरों को बाहर किया जाएगा।उन्होंने यह भी बताया कि गांव की जरूरतों के बजाय ठेकेदार मॉडल की परियोजनाएं थोप दी जाएंगी। मनरेगा कोऑर्डिनेटर सुरेशचंद्र मिश्र और पूर्व जिलाध्यक्ष डॉ. राजेंद्र दुबे राजन ने "मनरेगा बचाओ संग्राम" के तहत कांग्रेस पार्टी द्वारा चलाए जा रहे सुसंगठित और चरणबद्ध आंदोलन पर भी प्रकाश डाला।

Jan 10, 2026 - 15:48
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कांग्रेस ने मनरेगा पर केंद्र सरकार की नीतियों का विरोधकिया:ग्रामीण गरीबों के संवैधानिक अधिकारों की रक्षा के लिए संघर्ष का ऐलान
भदोही में कांग्रेस जिलाध्यक्ष वसीम अंसारी ने शनिवार को केंद्र सरकार की जनविरोधी नीतियों पर निशाना साधा। उन्होंने कहा कि भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस मनरेगा और ग्रामीण गरीबों के संवैधानिक अधिकारों की रक्षा के लिए सड़क से संसद तक संघर्ष करेगी। उत्तर प्रदेश के कोऑर्डिनेटर दयाशंकर पांडेय और जिलाध्यक्ष वसीम अंसारी ने कांग्रेस की तीन प्रमुख मांगें बताईं। इनमें VB GRAM G कानून को तत्काल वापस लेना, मनरेगा को अधिकार आधारित कानून के रूप में पूरी तरह बहाल करना और काम के अधिकार तथा पंचायतों के संवैधानिक अधिकारों को पुनः स्थापित करना शामिल है। इन मांगों को लेकर कांग्रेस पार्टी 10 जनवरी से 25 फरवरी तक देशव्यापी "मनरेगा बचाओ संग्राम" अभियान चला रही है। यह अभियान काम के अधिकार की रक्षा के लिए एक राष्ट्रीय पहल है। श्री पांडेय ने जोर देकर कहा कि मनरेगा कोई दान नहीं, बल्कि कानून द्वारा दी गई गारंटी है। उन्होंने बताया कि इस योजना से करोड़ों गरीबों को गांवों में रोजगार मिला, पलायन रुका, ग्रामीण मजदूरी बढ़ी और महिलाओं की आर्थिक आत्मनिर्भरता मजबूत हुई। हालांकि, कांग्रेस नेताओं ने आरोप लगाया कि केंद्र सरकार द्वारा लाया गया VB GRAM G कानून इसी अधिकार को समाप्त करने की साजिश है। उन्होंने कहा कि नए कानून से काम का अधिकार केवल अनुमति तक सीमित हो जाएगा। कांग्रेस ने यह भी आरोप लगाया कि सीमित बजट के कारण संकट के समय काम बंद हो सकता है। दिल्ली से काम और फंड तय होने से पंचायतें व ग्राम सभाएं कमजोर होंगी। 60 दिन का कार्य ब्लैकआउट सबसे जरूरतमंद समय में काम न देने को वैध बना देगा। नेताओं ने कहा कि मजदूरी असुरक्षित और घटाई जा सकने वाली हो जाएगी। राज्यों पर 40 प्रतिशत फंड का बोझ डालकर संघीय ढांचे को कमजोर किया जाएगा। इसके अतिरिक्त, बायोमेट्रिक और ऐप आधारित तकनीकी अड़चनों से मजदूरों को बाहर किया जाएगा।उन्होंने यह भी बताया कि गांव की जरूरतों के बजाय ठेकेदार मॉडल की परियोजनाएं थोप दी जाएंगी। मनरेगा कोऑर्डिनेटर सुरेशचंद्र मिश्र और पूर्व जिलाध्यक्ष डॉ. राजेंद्र दुबे राजन ने "मनरेगा बचाओ संग्राम" के तहत कांग्रेस पार्टी द्वारा चलाए जा रहे सुसंगठित और चरणबद्ध आंदोलन पर भी प्रकाश डाला।