करौली में सवर्ण समाज का फूटा आक्रोश:रैली निकाली, यूजीसी नियमों के विरोध में बाजार बंद

करौली में यूजीसी के नए नियमों के विरोध में रविवार को सवर्ण समाज का आक्रोश फूट पकड़ा। यहां जिले के कई क्षेत्रों में बंद का व्यापक असर देखा गया। सवर्ण समाज के आह्वान पर हुए इस बंद से जनजीवन प्रभावित रहा। करौली और मंडरायल सहित विभिन्न स्थानों पर सुबह से ही मुख्य बाजार, दुकानें और व्यावसायिक प्रतिष्ठान बंद रहे। यह विरोध सवर्ण समाज संघर्ष समिति के बैनर तले दर्ज कराया गया। राष्ट्रपति और प्रधानमंत्री के नाम सौंपा ज्ञापन प्रदर्शनकारियों ने यूजीसी के नए नियमों पर नाराजगी व्यक्त की। उन्होंने इन नियमों को सामान्य वर्ग के मेधावी छात्रों के खिलाफ बताया और इनके दुरुपयोग की आशंका भी जताई। मंडरायल में सवर्ण समाज के लोगों ने एक रैली निकाली और एसडीएम को राष्ट्रपति तथा प्रधानमंत्री के नाम एक ज्ञापन सौंपा। ज्ञापन में यूजीसी के नए नियमों को तत्काल निरस्त करने या उन पर रोक लगाने की मांग की गई। नारेबाजी भी की विरोध प्रदर्शन के दौरान सरकार के खिलाफ नारेबाजी भी की गई। साथ ही, आगामी चुनावों में नोटा (NOTA) के प्रयोग की अपील भी की गई। बंद और प्रदर्शन के दौरान पुलिस प्रशासन सतर्क रहा और सभी स्थानों पर स्थिति शांतिपूर्ण बनी रही। उल्लेखनीय है कि सवर्ण समाज की पूर्व बैठकों में 1 फरवरी को बंद का निर्णय लिया गया था। इस बंद को व्यापारी वर्ग और दुकानदारों का भी व्यापक समर्थन मिला, जिससे अधिकांश स्थानों पर यह पूरी तरह सफल रहा।

Feb 1, 2026 - 14:00
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करौली में सवर्ण समाज का फूटा आक्रोश:रैली निकाली, यूजीसी नियमों के विरोध में बाजार बंद
करौली में यूजीसी के नए नियमों के विरोध में रविवार को सवर्ण समाज का आक्रोश फूट पकड़ा। यहां जिले के कई क्षेत्रों में बंद का व्यापक असर देखा गया। सवर्ण समाज के आह्वान पर हुए इस बंद से जनजीवन प्रभावित रहा। करौली और मंडरायल सहित विभिन्न स्थानों पर सुबह से ही मुख्य बाजार, दुकानें और व्यावसायिक प्रतिष्ठान बंद रहे। यह विरोध सवर्ण समाज संघर्ष समिति के बैनर तले दर्ज कराया गया। राष्ट्रपति और प्रधानमंत्री के नाम सौंपा ज्ञापन प्रदर्शनकारियों ने यूजीसी के नए नियमों पर नाराजगी व्यक्त की। उन्होंने इन नियमों को सामान्य वर्ग के मेधावी छात्रों के खिलाफ बताया और इनके दुरुपयोग की आशंका भी जताई। मंडरायल में सवर्ण समाज के लोगों ने एक रैली निकाली और एसडीएम को राष्ट्रपति तथा प्रधानमंत्री के नाम एक ज्ञापन सौंपा। ज्ञापन में यूजीसी के नए नियमों को तत्काल निरस्त करने या उन पर रोक लगाने की मांग की गई। नारेबाजी भी की विरोध प्रदर्शन के दौरान सरकार के खिलाफ नारेबाजी भी की गई। साथ ही, आगामी चुनावों में नोटा (NOTA) के प्रयोग की अपील भी की गई। बंद और प्रदर्शन के दौरान पुलिस प्रशासन सतर्क रहा और सभी स्थानों पर स्थिति शांतिपूर्ण बनी रही। उल्लेखनीय है कि सवर्ण समाज की पूर्व बैठकों में 1 फरवरी को बंद का निर्णय लिया गया था। इस बंद को व्यापारी वर्ग और दुकानदारों का भी व्यापक समर्थन मिला, जिससे अधिकांश स्थानों पर यह पूरी तरह सफल रहा।