लड़कियों से छेड़छाड़, प्राइवेट पार्ट पर बरसाई लाठी, CJP के के आरोपों पर हाईकोर्ट ने केन्द्र से मांगा जवाब
CJP Sansad March Delhi High Court: कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के 'संसद चलो मार्च' और लद्दाख के एक्टिविस्ट सोनम वांगचुक को जंतर-मंतर से हटाए जाने के मुद्दे पर बुधवार को दिल्ली हाईकोर्ट में जोरदार बहस हुई। प्रदर्शनकारियों की ओर से पेश हुए देश के दिग्गज ...
CJP Sansad March Delhi High Court: कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के 'संसद चलो मार्च' और लद्दाख के एक्टिविस्ट सोनम वांगचुक को जंतर-मंतर से हटाए जाने के मुद्दे पर बुधवार को दिल्ली हाईकोर्ट में जोरदार बहस हुई। प्रदर्शनकारियों की ओर से पेश हुए देश के दिग्गज वकीलों ने दिल्ली पुलिस पर बेहद गंभीर और रोंगटे खड़े कर देने वाले आरोप लगाए। वकीलों ने दावा किया कि शांतिपूर्ण प्रदर्शन कर रहे छात्र-छात्राओं पर पुलिस ने बर्बरता की, छात्राओं से छेड़छाड़ की गई और उनके प्राइवेट पार्ट्स पर लाठियां मारी गईं।
हाईकोर्ट ने मामले की गंभीरता को देखते हुए केंद्र सरकार को 4 सप्ताह के भीतर जवाब दाखिल करने का निर्देश दिया है, जबकि सोनम वांगचुक को जंतर-मंतर से हटाने के खिलाफ दायर याचिका को खारिज कर दिया है। ALSO READ: CJP Protest: जंतर-मंतर पर प्रदर्शनकारियों के लिए देशभर से पहुंच रहा खाना, अनजान लोगों ने भेजे सैकड़ों फूड ऑर्डर
सीजेपी द्वारा 20 जुलाई को निकाले गए 'संसद चलो मार्च' के दौरान हुई हिंसा और पुलिस कार्रवाई का मामला अब अदालत के दरवाजे तक पहुंच गया है। चीफ जस्टिस देवेंद्र कुमार उपाध्याय और जस्टिस तेजस करिया की पीठ के समक्ष जनहित याचिकाओं पर सुनवाई करते हुए केंद्र सरकार और पुलिस को कड़े सवालों का सामना करना पड़ा।
क्या है याचिकर्ताओं की दलील?
याचिकाकर्ताओं की तरफ से वरिष्ठ अधिवक्ता एन. हरिहरण, विकास सिंह और गोपाल शंकरनारायणन ने अदालत में पैरवी की। वरिष्ठ वकील विकास सिंह ने कहा कि 20 जुलाई को बड़ी संख्या में युवा और छात्र-छात्राएं संसद मार्च के लिए एकत्र हुए थे। प्रदर्शन पूरी तरह से शांतिपूर्ण था, लेकिन सिविल कपड़ों में आए कुछ लोगों और पुलिस ने मिलकर प्रदर्शनकारियों पर हमला किया। ALSO READ: CJP protest Photos : CJP के जंतर-मंतर पर प्रदर्शन की 10 तस्वीरें, देखें पूरे दिन क्या हुआ
वरिष्ठ वकील एन. हरिहरण ने कोर्ट को बताया कि पुलिस ने प्रदर्शनकारियों को तितर-बितर करने के लिए कीलों वाली लाठियों, पेलेट गन और इलेक्ट्रिक लाठियों का इस्तेमाल किया। इस कार्रवाई में कम से कम 90 छात्र गंभीर रूप से घायल हुए हैं।
छात्राओं के साथ अमानवीय व्यवहार : कोर्ट में सबसे चौंकाने वाला दावा करते हुए हरिहरण ने कहा कि प्रदर्शन में शामिल छात्राओं के साथ पुलिसकर्मियों ने छेड़छाड़ की। वीडियो फुटेज में पुलिसकर्मी छेड़छाड़ करते और छात्र-छात्राओं के प्राइवेट पार्ट्स पर लाठियां मारते दिख रहे हैं। यह बेहद भयानक है। याचिकाकर्ताओं के वकीलों ने अदालत से इन घटनाक्रमों की वीडियो फुटेज देखने का अनुरोध किया और मामले की जांच दिल्ली पुलिस के बजाय किसी स्वतंत्र एजेंसी या विशेष जांच दल (SIT) से कराने तथा दोषी पुलिसकर्मियों पर प्राथमिकी दर्ज करने की मांग की।
क्या कहा सरकार ने?
दूसरी ओर, केंद्र सरकार की ओर से पेश हुए एडिशनल सॉलिसिटर जनरल (ASG) एसवी राजू ने पुलिस कार्रवाई का बचाव करते हुए सभी आरोपों को खारिज कर दिया। ASG राजू ने कहा कि इस बात के पर्याप्त वीडियो साक्ष्य मौजूद हैं कि प्रदर्शन के दौरान भीड़ हिंसक हो गई थी और पुलिसकर्मियों पर पथराव किया गया। उन्होंने दलील दी कि उपद्रवियों ने पुलिस के वाहनों में तोड़फोड़ की और कई पुलिसकर्मी इस झड़प में घायल हुए हैं। सरकार का कहना था कि अक्सर शांतिपूर्ण आंदोलनों को असामाजिक तत्व हाईजैक कर लेते हैं। जहां भी कानून का उल्लंघन हुआ है, वहां नियमानुसार FIR दर्ज की जा रही है।
अदालत की सख्त टिप्पणी और निर्देश
दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद चीफ जस्टिस की पीठ ने सरकार के रुख पर सवाल उठाए। कोर्ट ने कहा कि मिस्टर राजू, यदि यह गैर-कानूनी जमावड़ा था, तो इससे कैसे निपटना है, इसको लेकर स्पष्ट कानून और रामलीला मैदान मामले पर सुप्रीम कोर्ट का दिशा-निर्देश मौजूद है। यदि जनहित याचिका में इस तरह के गंभीर मुद्दे उठाए गए हैं, तो आप यह कैसे कह सकते हैं कि सभी पीड़ितों को अलग-अलग एफआईआर करानी चाहिए?
दिल्ली हाईकोर्ट ने दो याचिकाओं पर सुनवाई करते हुए केंद्र सरकार से 4 सप्ताह के भीतर अपना जवाब दाखिल करने को कहा है। मामले की अगली सुनवाई 11 सितंबर को तय की गई है। इसी के साथ अदालत ने सोनम वांगचुक को जंतर-मंतर से हटाए जाने के खिलाफ दायर याचिका को विचार योग्य न मानते हुए खारिज कर दिया।



