महेंद्रगढ़ एसपी की चेतावनी-सिर्फ आवाज सुनकर न करें भरोसा:AI से क्लोन हो रही वाइस, एक कॉल में खाली हो सकता है बैंक अकाउंट

हरियाणा के नारनौल में एसपी ने कहा कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) के बढ़ते इस्तेमाल के साथ साइबर अपराधियों ने ठगी का नया तरीका अपना लिया है। अब एआई आधारित वॉयस क्लोनिंग के जरिए किसी भी व्यक्ति की हूबहू आवाज तैयार कर उसके परिजनों और परिचितों से पैसे या गोपनीय जानकारी हासिल करने की कोशिश की जा रही है। इस तरह के बढ़ते मामलों को देखते हुए महेंद्रगढ़ के पुलिस अधीक्षक ने लोगों से सतर्क रहने की अपील की है। एसपी ने बताया कि साइबर ठग सोशल मीडिया, यूट्यूब, व्हाट्सएप या अन्य प्लेटफॉर्म पर उपलब्ध कुछ सेकेंड की ऑडियो क्लिप से किसी की नकली आवाज तैयार कर लेते हैं। आवाज लगती है वास्तविक इसके बाद उसी आवाज में परिवार या रिश्तेदारों को फोन कर आपात स्थिति का हवाला देकर तुरंत पैसे भेजने या बैंक से जुड़ी गोपनीय जानकारी साझा करने के लिए कहते हैं। कई बार आवाज इतनी वास्तविक होती है कि लोग बिना पुष्टि किए भरोसा कर लेते हैं। कर सकते हैं बड़ा क्राइम पुलिस के अनुसार, ठग केवल पैसों की मांग तक सीमित नहीं हैं। वे बातचीत के दौरान परिवार, कारोबार और बैंकिंग से जुड़ी जानकारी जुटाकर बाद में बड़े साइबर फ्रॉड को अंजाम दे सकते हैं। एआई और डीपफेक तकनीक के कारण अब केवल आवाज या वीडियो देखकर किसी की पहचान सुनिश्चित करना सुरक्षित नहीं माना जा सकता। एसपी बोले- घबराएं नहीं एसपी दीपक कुमार ने लोगों से अपील की है कि किसी परिचित की आवाज में पैसे या गोपनीय जानकारी मांगे जाने पर घबराएं नहीं। पहले संबंधित व्यक्ति के पुराने मोबाइल नंबर पर स्वयं कॉल कर पुष्टि करें। परिवार में एक सीक्रेट कोड वर्ड भी तय किया जा सकता है, जिसकी जानकारी केवल सदस्यों को हो। साथ ही OTP, UPI PIN, CVV और बैंक संबंधी गोपनीय जानकारी किसी के साथ साझा न करें। साइबर हेल्प लाइन पर करें शिकायत महेंद्रगढ़ पुलिस ने कहा कि किसी भी संदिग्ध कॉल या ऑनलाइन ठगी की स्थिति में तुरंत साइबर हेल्पलाइन 1930 पर शिकायत दर्ज करें और संबंधित पुलिस थाना या साइबर क्राइम थाना नारनौल को सूचना दें। समय पर शिकायत करने से ठगी गई राशि बचाने की संभावना बढ़ जाती है।

Sep 6, 2026 - 11:07
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महेंद्रगढ़ एसपी की चेतावनी-सिर्फ आवाज सुनकर न करें भरोसा:AI से क्लोन हो रही वाइस, एक कॉल में खाली हो सकता है बैंक अकाउंट
हरियाणा के नारनौल में एसपी ने कहा कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) के बढ़ते इस्तेमाल के साथ साइबर अपराधियों ने ठगी का नया तरीका अपना लिया है। अब एआई आधारित वॉयस क्लोनिंग के जरिए किसी भी व्यक्ति की हूबहू आवाज तैयार कर उसके परिजनों और परिचितों से पैसे या गोपनीय जानकारी हासिल करने की कोशिश की जा रही है। इस तरह के बढ़ते मामलों को देखते हुए महेंद्रगढ़ के पुलिस अधीक्षक ने लोगों से सतर्क रहने की अपील की है। एसपी ने बताया कि साइबर ठग सोशल मीडिया, यूट्यूब, व्हाट्सएप या अन्य प्लेटफॉर्म पर उपलब्ध कुछ सेकेंड की ऑडियो क्लिप से किसी की नकली आवाज तैयार कर लेते हैं। आवाज लगती है वास्तविक इसके बाद उसी आवाज में परिवार या रिश्तेदारों को फोन कर आपात स्थिति का हवाला देकर तुरंत पैसे भेजने या बैंक से जुड़ी गोपनीय जानकारी साझा करने के लिए कहते हैं। कई बार आवाज इतनी वास्तविक होती है कि लोग बिना पुष्टि किए भरोसा कर लेते हैं। कर सकते हैं बड़ा क्राइम पुलिस के अनुसार, ठग केवल पैसों की मांग तक सीमित नहीं हैं। वे बातचीत के दौरान परिवार, कारोबार और बैंकिंग से जुड़ी जानकारी जुटाकर बाद में बड़े साइबर फ्रॉड को अंजाम दे सकते हैं। एआई और डीपफेक तकनीक के कारण अब केवल आवाज या वीडियो देखकर किसी की पहचान सुनिश्चित करना सुरक्षित नहीं माना जा सकता। एसपी बोले- घबराएं नहीं एसपी दीपक कुमार ने लोगों से अपील की है कि किसी परिचित की आवाज में पैसे या गोपनीय जानकारी मांगे जाने पर घबराएं नहीं। पहले संबंधित व्यक्ति के पुराने मोबाइल नंबर पर स्वयं कॉल कर पुष्टि करें। परिवार में एक सीक्रेट कोड वर्ड भी तय किया जा सकता है, जिसकी जानकारी केवल सदस्यों को हो। साथ ही OTP, UPI PIN, CVV और बैंक संबंधी गोपनीय जानकारी किसी के साथ साझा न करें। साइबर हेल्प लाइन पर करें शिकायत महेंद्रगढ़ पुलिस ने कहा कि किसी भी संदिग्ध कॉल या ऑनलाइन ठगी की स्थिति में तुरंत साइबर हेल्पलाइन 1930 पर शिकायत दर्ज करें और संबंधित पुलिस थाना या साइबर क्राइम थाना नारनौल को सूचना दें। समय पर शिकायत करने से ठगी गई राशि बचाने की संभावना बढ़ जाती है।