झज्जर में हुड्डा देखते रहे, भुक्कल नियम तोड़ती रहीं:संगठन सर्वोपरि' का नारा पड़ा फीका, पूर्व CM और MLA ने तोड़े राहुल गांधी के नियम

कांग्रेस नेता राहुल गांधी पिछले कई महीनों से पार्टी संगठन को मजबूत करने, जिला अध्यक्षों को सम्मान देने और कार्यकर्ताओं को पार्टी की सबसे बड़ी ताकत बताने का संदेश दे रहे हैं। लेकिन झज्जर में आयोजित एक कार्यक्रम के बाद कांग्रेस के अंदर ही राहुल गांधी के संदेश और जमीनी हकीकत को लेकर बड़ा विवाद खड़ा हो गया है। मामला झज्जर विधानसभा क्षेत्र में आयोजित मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) अभियान एवं कार्यकर्ताओं हेतु प्रशिक्षण बैठक का है। कार्यक्रम की अगुआई झज्जर से कांग्रेस विधायक गीता भुक्कल कर रही थीं, जबकि हरियाणा के पूर्व मुख्यमंत्री भूपेंद्र सिंह हुड्डा मुख्य अतिथि के रूप में मौजूद थे। कार्यक्रम समाप्त होने के बाद कांग्रेस कार्यकर्ताओं व सियासी गलियारों में सबसे ज्यादा चर्चा इस बात की रही कि जिस संगठन को राहुल गांधी पार्टी की रीढ़ बताते हैं, उसी संगठन के जिला अध्यक्ष की कार्यक्रम में कथित तौर पर अनदेखी होती रही और पूर्व मुख्यमंत्री हुड्डा सब कुछ देखते रहे। पोस्टर से गायब रहा जिला अध्यक्ष का फोटो कार्यक्रम के लिए लगाए गए पोस्टरों और होर्डिंग्स में कई नेताओं की तस्वीरें दिखाई दीं, लेकिन कांग्रेस के झज्जर जिला अध्यक्ष संजय यादव की तस्वीर नहीं थी। कांग्रेस के भीतर इसे सामान्य चूक नहीं माना जा रहा। कार्यकर्ताओं का कहना है कि पार्टी प्रोटोकॉल के अनुसार जिला स्तर के बड़े कार्यक्रमों में जिला अध्यक्ष को उचित स्थान मिलना चाहिए। कार्यकर्ता ने नाम प्रकाशित न करने की शर्त पर कहा कि जब राहुल गांधी संगठन को सर्वोपरि बता रहे हैं, तब जिला अध्यक्ष का पोस्टर से गायब होना गलत संदेश देता है और वो भी मिल MLA द्वारा। जिला अध्यक्ष को नहीं मिली कुर्सी, कार्यकर्ताओं में नाराजगी कार्यक्रम में मौजूद कुछ कांग्रेस कार्यकर्ताओं का दावा है कि जिला अध्यक्ष संजय यादव कार्यक्रम स्थल पर अपनी सीट तलाशते नजर आए, लेकिन उन्हें उचित स्थान तक नहीं मिला। कार्यकर्ताओं का कहना है कि यदि जिले का सर्वोच्च संगठनात्मक पदाधिकारी ही सम्मान के लिए संघर्ष करता दिखाई दे तो फिर आम कार्यकर्ता की स्थिति का अंदाजा लगाया जा सकता है। कई कार्यकर्ताओं ने सवाल उठाया कि जब पूर्व मुख्यमंत्री भूपेंद्र सिंह हुड्डा स्वयं कार्यक्रम में मौजूद थे, तब उन्होंने इस स्थिति पर कोई आपत्ति क्यों नहीं जताई। राहुल गांधी बार-बार दे रहे संगठन को सम्मान का संदेश राहुल गांधी कई सार्वजनिक मंचों से कह चुके हैं कि कांग्रेस का भविष्य संगठन और कार्यकर्ताओं के दम पर ही तय होगा। उन्होंने कार्यकर्ताओं को पार्टी का बब्बर शेर बताते हुए कहा है कि संगठन को मजबूत किए बिना कांग्रेस आगे नहीं बढ़ सकती। इसी कारण झज्जर का यह घटनाक्रम अब राहुल गांधी के संदेश और स्थानीय नेताओं की कार्यशैली के बीच टकराव के रूप में देखा जा रहा है। पूर्व CM हुड्डा की भूमिका पर भी उठे सवाल कांग्रेस कार्यकर्ताओं का कहना है कि कार्यक्रम में जो कुछ हुआ वह पूर्व मुख्यमंत्री भूपेंद्र सिंह हुड्डा की मौजूदगी में हुआ। कार्यकर्ताओं का आरोप है कि यदि जिला अध्यक्ष की अनदेखी हो रही थी तो बतौर वरिष्ठ नेता हुड्डा को हस्तक्षेप करना चाहिए था। कुछ कार्यकर्ताओं ने तो यहां तक आरोप लगाया कि पार्टी के कुछ प्रभावशाली नेता और विधायक संगठन को कमजोर कर खुद को ही केंद्र में रखने की राजनीति कर रहे हैं। हालांकि इन आरोपों पर किसी भी नेता की ओर से आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। 2024 की हार से भी नहीं लिया सबक? कांग्रेस के कुछ कार्यकर्ताओं का मानना है कि 2024 विधानसभा चुनाव में पार्टी की अपेक्षित सफलता नहीं मिलने के पीछे भी संगठन और जनप्रतिनिधियों के बीच दूरी एक बड़ा कारण रही। कार्यकर्ताओं का कहना है कि यदि स्थानीय स्तर पर संगठन और कार्यकर्ताओं को सम्मान नहीं मिलेगा तो इसका सीधा असर चुनावी नतीजों पर पड़ता है। उनका दावा है कि पार्टी के बड़े नेताओं को पिछली हार से सबक लेना चाहिए था, लेकिन झज्जर का घटनाक्रम बताता है कि स्थिति में ज्यादा बदलाव नहीं आया है। कार्यकर्ताओं ने बीजेपी का भी दिया उदाहरण नाराज कार्यकर्ताओं ने झज्जर में भाजपा संगठन का उदाहरण देते हुए कहा कि वहां जिला अध्यक्ष को पूरा सम्मान और प्रोटोकॉल दिया जाता है, जबकि कांग्रेस में संगठन के पदाधिकारियों को कई बार नजरअंदाज किया जाता है। कार्यकर्ताओं का कहना है कि जब तक संगठन और कार्यकर्ताओं को बराबरी का सम्मान नहीं मिलेगा, तब तक कांग्रेस के लिए सत्ता तक पहुंचना मुश्किल रहेगा। अब कार्रवाई होगी या नहीं? कांग्रेस के राष्ट्रीय संगठन महासचिव के.सी. वेणुगोपाल और हरियाणा कांग्रेस अध्यक्ष राव नरेंद्र सिंह समय-समय पर संगठनात्मक अनुशासन की बात करते रहे हैं। ऐसे में झज्जर के इस पूरे घटनाक्रम के बाद अब कांग्रेस कार्यकर्ताओं के बीच सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या पार्टी इस मामले को केवल स्थानीय विवाद मानकर छोड़ देगी या फिर संगठनात्मक प्रोटोकॉल को लेकर कोई स्पष्ट संदेश देगी। फिलहाल, झज्जर में आयोजित यह बैठक समाप्त हो चुकी है, लेकिन पूर्व मुख्यमंत्री भूपेंद्र सिंह हुड्डा की मौजूदगी में जिला अध्यक्ष की कथित अनदेखी और राहुल गांधी के संगठन मॉडल पर उठे सवाल पूरे जिले में चर्चा का विषय बने हुए हैं।

Jun 23, 2026 - 08:38
 0
झज्जर में हुड्डा देखते रहे, भुक्कल नियम तोड़ती रहीं:संगठन सर्वोपरि' का नारा पड़ा फीका, पूर्व CM और MLA ने तोड़े राहुल गांधी के नियम
कांग्रेस नेता राहुल गांधी पिछले कई महीनों से पार्टी संगठन को मजबूत करने, जिला अध्यक्षों को सम्मान देने और कार्यकर्ताओं को पार्टी की सबसे बड़ी ताकत बताने का संदेश दे रहे हैं। लेकिन झज्जर में आयोजित एक कार्यक्रम के बाद कांग्रेस के अंदर ही राहुल गांधी के संदेश और जमीनी हकीकत को लेकर बड़ा विवाद खड़ा हो गया है। मामला झज्जर विधानसभा क्षेत्र में आयोजित मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) अभियान एवं कार्यकर्ताओं हेतु प्रशिक्षण बैठक का है। कार्यक्रम की अगुआई झज्जर से कांग्रेस विधायक गीता भुक्कल कर रही थीं, जबकि हरियाणा के पूर्व मुख्यमंत्री भूपेंद्र सिंह हुड्डा मुख्य अतिथि के रूप में मौजूद थे। कार्यक्रम समाप्त होने के बाद कांग्रेस कार्यकर्ताओं व सियासी गलियारों में सबसे ज्यादा चर्चा इस बात की रही कि जिस संगठन को राहुल गांधी पार्टी की रीढ़ बताते हैं, उसी संगठन के जिला अध्यक्ष की कार्यक्रम में कथित तौर पर अनदेखी होती रही और पूर्व मुख्यमंत्री हुड्डा सब कुछ देखते रहे। पोस्टर से गायब रहा जिला अध्यक्ष का फोटो कार्यक्रम के लिए लगाए गए पोस्टरों और होर्डिंग्स में कई नेताओं की तस्वीरें दिखाई दीं, लेकिन कांग्रेस के झज्जर जिला अध्यक्ष संजय यादव की तस्वीर नहीं थी। कांग्रेस के भीतर इसे सामान्य चूक नहीं माना जा रहा। कार्यकर्ताओं का कहना है कि पार्टी प्रोटोकॉल के अनुसार जिला स्तर के बड़े कार्यक्रमों में जिला अध्यक्ष को उचित स्थान मिलना चाहिए। कार्यकर्ता ने नाम प्रकाशित न करने की शर्त पर कहा कि जब राहुल गांधी संगठन को सर्वोपरि बता रहे हैं, तब जिला अध्यक्ष का पोस्टर से गायब होना गलत संदेश देता है और वो भी मिल MLA द्वारा। जिला अध्यक्ष को नहीं मिली कुर्सी, कार्यकर्ताओं में नाराजगी कार्यक्रम में मौजूद कुछ कांग्रेस कार्यकर्ताओं का दावा है कि जिला अध्यक्ष संजय यादव कार्यक्रम स्थल पर अपनी सीट तलाशते नजर आए, लेकिन उन्हें उचित स्थान तक नहीं मिला। कार्यकर्ताओं का कहना है कि यदि जिले का सर्वोच्च संगठनात्मक पदाधिकारी ही सम्मान के लिए संघर्ष करता दिखाई दे तो फिर आम कार्यकर्ता की स्थिति का अंदाजा लगाया जा सकता है। कई कार्यकर्ताओं ने सवाल उठाया कि जब पूर्व मुख्यमंत्री भूपेंद्र सिंह हुड्डा स्वयं कार्यक्रम में मौजूद थे, तब उन्होंने इस स्थिति पर कोई आपत्ति क्यों नहीं जताई। राहुल गांधी बार-बार दे रहे संगठन को सम्मान का संदेश राहुल गांधी कई सार्वजनिक मंचों से कह चुके हैं कि कांग्रेस का भविष्य संगठन और कार्यकर्ताओं के दम पर ही तय होगा। उन्होंने कार्यकर्ताओं को पार्टी का बब्बर शेर बताते हुए कहा है कि संगठन को मजबूत किए बिना कांग्रेस आगे नहीं बढ़ सकती। इसी कारण झज्जर का यह घटनाक्रम अब राहुल गांधी के संदेश और स्थानीय नेताओं की कार्यशैली के बीच टकराव के रूप में देखा जा रहा है। पूर्व CM हुड्डा की भूमिका पर भी उठे सवाल कांग्रेस कार्यकर्ताओं का कहना है कि कार्यक्रम में जो कुछ हुआ वह पूर्व मुख्यमंत्री भूपेंद्र सिंह हुड्डा की मौजूदगी में हुआ। कार्यकर्ताओं का आरोप है कि यदि जिला अध्यक्ष की अनदेखी हो रही थी तो बतौर वरिष्ठ नेता हुड्डा को हस्तक्षेप करना चाहिए था। कुछ कार्यकर्ताओं ने तो यहां तक आरोप लगाया कि पार्टी के कुछ प्रभावशाली नेता और विधायक संगठन को कमजोर कर खुद को ही केंद्र में रखने की राजनीति कर रहे हैं। हालांकि इन आरोपों पर किसी भी नेता की ओर से आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। 2024 की हार से भी नहीं लिया सबक? कांग्रेस के कुछ कार्यकर्ताओं का मानना है कि 2024 विधानसभा चुनाव में पार्टी की अपेक्षित सफलता नहीं मिलने के पीछे भी संगठन और जनप्रतिनिधियों के बीच दूरी एक बड़ा कारण रही। कार्यकर्ताओं का कहना है कि यदि स्थानीय स्तर पर संगठन और कार्यकर्ताओं को सम्मान नहीं मिलेगा तो इसका सीधा असर चुनावी नतीजों पर पड़ता है। उनका दावा है कि पार्टी के बड़े नेताओं को पिछली हार से सबक लेना चाहिए था, लेकिन झज्जर का घटनाक्रम बताता है कि स्थिति में ज्यादा बदलाव नहीं आया है। कार्यकर्ताओं ने बीजेपी का भी दिया उदाहरण नाराज कार्यकर्ताओं ने झज्जर में भाजपा संगठन का उदाहरण देते हुए कहा कि वहां जिला अध्यक्ष को पूरा सम्मान और प्रोटोकॉल दिया जाता है, जबकि कांग्रेस में संगठन के पदाधिकारियों को कई बार नजरअंदाज किया जाता है। कार्यकर्ताओं का कहना है कि जब तक संगठन और कार्यकर्ताओं को बराबरी का सम्मान नहीं मिलेगा, तब तक कांग्रेस के लिए सत्ता तक पहुंचना मुश्किल रहेगा। अब कार्रवाई होगी या नहीं? कांग्रेस के राष्ट्रीय संगठन महासचिव के.सी. वेणुगोपाल और हरियाणा कांग्रेस अध्यक्ष राव नरेंद्र सिंह समय-समय पर संगठनात्मक अनुशासन की बात करते रहे हैं। ऐसे में झज्जर के इस पूरे घटनाक्रम के बाद अब कांग्रेस कार्यकर्ताओं के बीच सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या पार्टी इस मामले को केवल स्थानीय विवाद मानकर छोड़ देगी या फिर संगठनात्मक प्रोटोकॉल को लेकर कोई स्पष्ट संदेश देगी। फिलहाल, झज्जर में आयोजित यह बैठक समाप्त हो चुकी है, लेकिन पूर्व मुख्यमंत्री भूपेंद्र सिंह हुड्डा की मौजूदगी में जिला अध्यक्ष की कथित अनदेखी और राहुल गांधी के संगठन मॉडल पर उठे सवाल पूरे जिले में चर्चा का विषय बने हुए हैं।